भारत की ताकत जब बढ़ती है तो दुनिया की ताकत भी बढ़ती है : नरेंद्र मोदी

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नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सन के साथ कोपेनहेगन स्थित बेला सेंटर में भारतीय समुदाय को संबोधित किया और उनके साथ बातचीत की। डेनमार्क में भारतीय समुदाय के 1000 से अधिक सदस्यों, जिनमें छात्र, शोधकर्ता, पेशेवर और व्यवसायी शामिल थे, ने इस कार्यक्रम में भाग लिया।

इस अवसर पर प्रधानमंत्री श्री मोदी ने प्रधानमंत्री सुश्री फ्रेडरिक्सन की गर्मजोशी एवं भारतीयों के प्रति सम्मान की सराहना की और इस बात पर जोर दिया कि दोनों देश हरित विकास के लिए मौलिक समाधान खोजने में मिलकर काम कर सकते हैं। उन्होंने डेनमार्क में भारतीय समुदाय द्वारा निभाई गई सकारात्मक भूमिका की सराहना की। उन्होंने भारत की आर्थिक क्षमता पर प्रकाश डाला तथा भारत एवं डेनमार्क के बीच और अधिक सहयोग को आमंत्रित किया।

अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि सबसे पहले तो मैं डेनमार्क के प्रधानमंत्री का हृदय से आभारी हूँ कि उन्होंने इतना समय हमारे लिए दिया, मुझे मालूम है कि उन्हें अगले कार्यक्रम के लिए बीच में से निकलना पड़ेगा । मैं उनसे भी आग्रह करूँगा कि आप संकोच मत कीजिए अगर मेरा थोडा लम्बा चल जाए । आपको निकलना है तो बिना संकोच जरुर निकल सकते है । आप लोगों ने डेनमार्क के प्रधानमंत्री जी का और मेरा यहाँ जो भव्य स्वागत किया उसके लिए मैं आप सभी का बहुत आभारी हूँ । आज प्रधानमंत्री Frederiksen का यहाँ होना इस बात का प्रमाण है कि भारतीयों के प्रति उनके दिल में कितना प्यार और सम्मान है । मैं उन्हें इस कार्यक्रम के लिए समय निकालने के लिए, यहाँ रूबरू आने के लिए, ह्रदय से बहुत बहुत धन्यवाद करता हूँ ।

पीएम मोदी ने कहा कि कोरोना के कारण बहुत समय तक सभी की life एक तरफ से virtual mode में ही चल रही थी । अब online से हमें offline जाना है और हकीकत यह भी है कि offline ही lifeline है । पिछले साल जैसे ही आवाजाही मुमकिन हुई तो प्रधानमंत्री Frederiksen पहली Head of the Government थी जिनका हमे भारत में स्वागत करने का अवसर मिला था । ये भारत और डेनमार्क के मज़बूत होते संबंधो को दिखाता है और खास बात ये है कि हमारी Green Strategic Partnership प्रधामंत्री Frederiksen की व्यक्तिगत प्राथमिकताओं और उनकि values से guided है । आज उनके साथ मेरी जो चर्चा हुई है उससे दोनों देशो के संबंधो को नई ताकत मिलेगी, नई उर्जा मिलेगी । यहाँ आपसे बातचीत के बात मैं Her Majesty Queen of Denmark से मिलने जाऊंगा । कल नॉर्डिक-इंडिया समिट में नई संभावनाओं की ओर हम बढ़ने वालें हैं । मुझे ख़ुशी है कि पुरे Nordic region के साथ भी भारत के रिश्ते बहुत मज़बूत हो रहे हैं।

प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि दुनिया भर में फैले भारतीय डायस्पोरा को अगर मिला लिया जाए तो उनकी संख्या कई देशों की आबादी से अधिक होगी । उनका पहनावा, खान-पान भले ही अलग अलग हो, लेकिन हमारी social harmony, oneness, co-existence की जो values सभी भारतीयों में एक समान है और यही हमारी ताकत है और जिनके roots किसी भी तरह मां भारती से जुडी है वो स्वाभाविक रूप से लोकतंत्र और rule of law के प्रति सम्मान रखते ही हैं। एक भारतीय, दुनिया में कहीं भी जाए वो अपनी कर्मभूमि के लिए,उद्देश्य के लिए पूरी ईमानदारी से contribute करता है । अनेक बार जब मेरी world leaders से मुलाकात होती है तो अपने देशों में बसे भारतीय समुदाय की उपलब्धियों के बारें में मुझे बड़े गर्व से बताते है, वे indian community के परिश्रम और शांतिपूर्ण nature की सराहना करते थकते नही है और इसके लिए धन्यवाद का हक़दार मैं नही आप सब हैं । आप लोगों का व्यव्हार, आप लोगो का संस्कार, ये उसके मूल्य में है और इसलिए मैं सबसे पहले ये जो बधाइयाँ मुझे मिलती है वो आपको समर्पित करता हूँ ।

उन्होंने कहा कि Inclusiveness और cultural diversity, विविधता,विशेषता, भारतीय समुदाय की ऐसी शक्ति है जो हम सबको प्रति पल जीवंतता का एहसास कराती है, हजारो वर्षो के कालखंड ने इन values को हमारे भीतर विकसित किया है । आप यहाँ डेनमार्क में ही देखिए, भारत के अलग अलग राज्यों से लोग यहाँ आए हैं, बसे हैं । कोई तेलुगु बोलता है कोई पंजाबी, कोई बंगला, आने कोई मराठी, आने केटला केम छो गुजरती, तो कोई तमिल वडकम्म से शुरू करता है, तो कोई मलयाली, तो कोई ओडिया जय जगन्नाथ, कोई कन्नडा, तो कोई असमियाँ ।

पीएम ने कहा कि भाषा कोई भी हो लेकिन भाषा अनेक भाव एक ! भाषा कोई भी हो लेकिन हम सभी के संस्कार भारतीय ही हैं। हमारे खाने की थाली बदल जाती है, taste बदल जाता है लेकिन स्नेह से बार बार आग्रह करने का भारतीय तरीका कभी नही बदलता और हमे मालूम है कि कुछ लोगो को तो आग्रह करने का ऐसा स्वभाव होता है कि नमक के लिए भी कर देते हैं । हम राष्ट्र सुरक्षा के लिए मिलकर खड़े होते हैं,राष्ट्र निर्माण में मिलकर जुटते हैं । भारतीयता सबका साथ- सबका विकास और सबका विश्वास । अब देखिए घर-घर बात पहुँच चुकी है और डेनमार्क में भी गूंज रही है । सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वाश और सबका प्रयास और इसी से समृद्धि होती है और साथियों, ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ यानी one world पूरा विश्व एक परिवार, हमरा ये concept व्यापार, कारोबार के अवधारणा से भी कहीं अधिक विस्तृत है, बहुत व्यापक है, बहुत गहरा है,हिमालय से भी ऊँचा है । हमारी one world की अवधारणा अपनत्व पर, बंधुत्व पर,संवेदन शीलता पर,सम्मान पर टिकी है । 21वीं सदी का भारत भी नए global order के लिये इसी vision को लेकर के आगे बढ़ रहा है ।

उनका कहना था कि आज भारत जो कुछ भी हासिल कर रहा है, वो उपलब्धि सिर्फ भारत की नही है बल्कि वो करीब ⅕th humanity की उपलब्धि है । कल्पना कीजिए कि अगर भारत में हम vaccination को हर परिवार तक नही पहुंचा पाते तो उसका दुनिया पर क्या असर होता । अगर भारत made in india, सस्ती और प्रभावी vaccine पर काम न करता, बड़े scale पर production न करता तो दुनियां के अनेक देशो की स्थिति क्या होती । भारत जब अपने नागरिकों को गरीबी से बाहर निकालता है तो दुनियां से गरीबी कम होती है । भारत में जब गरीब को housing, sanitation, clean drinking water,free healthcare, financial inclusion ऐसी जब अनेक सुविधाएँ मिलती है तो इससे दुनिया के अनेक देशो को एक नया विश्वाश मिलता है और इससे sustainable development के हमारे लक्ष्य मज़बूत होते हैं । भारत के हर घर में लगा हर LED bulb, भारत में लग रहा हर solar panel जितना emission बचाता है वो climate action के संकल्प को और अधिक मज़बूत करता है।

उन्होंने कहा कि Stereotypes और silos को तोड़कर जो Success मिलती है, वो देश को नई ऊंचाई पर ले जाती है। आपको याद होगा, जब मैंने डिजिटल इंडिया की बात की थी तो कुछ लोग कई तरह के सवाल उठाते थे। हिंदुस्तान में डिजिटल? ना जाने ऐसे सवाल पूछते थे, लेकिन आज मैं कहना चाहता हूँ दोस्तों, 5-6 साल पहले हम per capita data consumption के मामले में दुनिया के सबसे पिछड़े देशों में से एक थे। ये मैं बहुत दूर की बात नही कर रहा हूँ, 5-6 साल पहले, लेकिन आज स्थिति एकदम बदल गई है। अनेक बड़े देश मिलकर जितना Per Capita मोबाइल data consume करते हैं, उससे ज्यादा हम भारत में करते हैं। सबसे बड़ी बात ये है कि आज जो भी नया user जुड़ रहा है, वो शहरों से नही है, दूर सुदूर जंगलों में रहने वाले भारत के छोटे छोटे गाँव में हैं। इसने भारत के गांव और गरीब को तो empower किया ही है, बहुत बड़े डिजिटल मार्केट का गेट खोल दिया है। और यही तो है नए भारत की रियल स्टोरी । देश का मिजाज़ कैसे बदलता है, इसका एक और उदाहरण मैं आपको बताना चाहूंगा। ये हमारी आज़ादी का 75वां साल है। लगभग 75 महीने पहले, 75 months पहले की मैं बात कर रहा हूँ, हमने स्टार्ट अप इंडिया कार्यक्रम शुरु किया था। तब स्टार्ट अप इकोसिस्टम के रूप में दुनियां में भारत की कोई गिनती ही नहीं थी, नाम कहीं उल्लेख ही नही होता था। आज हम यूनिकॉर्न्स के मामले में दुनिया में नंबर-3 पर खड़े हैं। आज स्टार्ट अप्स के मामले में दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा इकोसिस्टम हिन्दुस्तान है। दो साल पहले जब दुनिया कोविड से जूझ रही थी, मौत कब आ करके थमकेगी, परिवार में कौन मुसीबत में फस जाएगा, बहार निकल पाएंगे की नही निकल पाएंगे, उस समय संकट के बादल घिरे हुए थे, चिंताएं चारो तरफ फैली हुई थी उस समय भारत का नौजवान, उस स्तिथि को याद कीजिए दोस्तों, भारत का नौजवान करीब-करीब हर महीने एक यूनिकॉर्न बना रहा था। 2021 में तो ये स्पीड और बढ़ गई और 8-10 दिन में ही वो यूनिकॉर्न बनाने लग गया । इस साल के शुरुआती, 2022 के शुरूआती, 3 महीने में तो हर हफ्ते में एक यूनिकॉर्न भारत में तैयार हुआ है।

उन्होंने कहा कि भारत की ताकत, और ये बात दुनियां भी धीरे धीरे समझने लगी हैं, भारत की ताकत जब बढती है तो साथियों मेरे शब्द में विश्वाश कीजिए, तो दुनिया की ताकत भी बढ़ती है। फार्मेसी ऑफ द वर्ल्ड, इस भूमिका में भारत ने मुश्किल समय में पूरी दुनिया का साथ दिया है, दुनिया के अनेक देशों को दवाइयां भेजी हैं। ताकि हम संकट के समय मानवता के इस काम में पीछे ना रह जाएँ, दुनिया को संकट के समय मदद करें, ये सपना लेकर के काम करते रहे । भारत जब food grains के मामले में आत्मनिर्भर हुआ है तो दुनिया को भुखमरी से बचाने के लिए खुले दिल से ऑफर कर रहा है। IT के मामले में भारत की ताकत बढ़ी, तो इस सदी के बड़े संकटों के दौरान भारत ने दुनिया की मदद की। आज भारत एक बड़ी डिजिटल ग्लोबल पावर है, लेकिन इसको भी हम अपने तक सीमित नहीं रखा है, बल्कि दुनिया के साथ हम शेयर कर रहे हैं। भारत के पास स्केल और स्पीड के साथ-साथ share and care की Values भी हैं। इसलिए global challenges से निपटने के लिए भारत की कैपेसिटी में Invest करना, वो सिर्फ भारत के लिए ही नही दुनिया के लिए भी भलाई का काम है दुनिया के हित में है। भारत की आत्मनिर्भरता में एक सशक्त global supply chain का भविष्य जुड़ा है। वैश्विक supply chains में भारत एक Trusted और Reliable partner बन रहा है।

मोदी ने कहा कि दुनिया को बेहतर बनाने के लिए भारत और डेनमार्क की साझेदारी बहुत अहम है। विशेष रूप से Climate Change से जुड़ी हमारी चिंताएं भी और हमारे संकल्प भी साझा हैं। Climate को जो नुकसान हुआ है, उसमें भारत की भूमिका बहुत नगण्य है। दुनियां को तबाह करने में हिन्दुस्तानियों की कोई भूमिका नही है, हम तो वो लोग है जो पौधे में भी परमात्मा देखते है, हम वो लोग है जो नदी को मां मानते हैं Thank you ! Thank you excellency. इतने व्यस्त समय में भी प्रधानमंत्री जी का आकार के बैठना, हम सब से बात करना, आप लोगों के प्रति उनका कितना प्यार है उसका ये उदहारण है ।

उन्होंने कहा कि मैं जब आपसे ये बता रहा था कि हम जो भी अच्छा करने का प्रयास कर रहे हैं, उससे दुनियां लाभान्वित होती है । लेकिन दुनिया की भलाई को देखते हुए भारत ने वर्ष 2070 तक, जैसा मैं ने कहा हमने दुनियां में इस प्लेनेट को, इस पृथ्वी को बर्बाद करने में हिन्दुस्तानियों का कोई role नही है, हिन्दुस्तान का कोई role नही है। उसके बावजूद भी भारत ने वर्ष 2070 तक net zero का संकल्प लिया है। भारत, दुनिया के उन चंद देशों में है जो इस दिशा में किए गए अपने कमिटमेंट को समय से पहले पूरा कर रहा है। Non fossil sources से 40 परसेंट installed capacity का जो लक्ष्य हमने रखा था और लक्ष्य ,में हमारा deadline था 2030, अभी तो 2030 काफी दूर है लेकिन उस काम को हमने 9 साल पहले ही पूरा कर लिया । भारत में आज हम बहुत सस्ती सोलर एनर्जी पैदा कर रहे हैं, उसकी per unit कीमत सिर्फ ढाई रुपए है, यानी 3 यूरो-सेंट से भी कम। एक unit बिजली 3 यूरो-सेंट से भी कम और हमारी कोशिश है कि उसको हम ढाई रुपए से और निचे ले जा कर के 2 रूपए तक ले जाने की कोशिश कर रहे है ।

प्रधान मंत्री मोदी ने कहा कि लेकिन साथियों, हमें यह भी मानना होगा कि वैश्विक Climate Action अभी तो कहीं सफल होता नज़र नहीं आ रहा है। दुनियां जहाँ थी वही ठहरी हुई है । इक्के-दुक्के कुछ कर पाते होंगे लेकिन हम कर पा रहे है इसका कारण क्या है? इसका कारण यह है कि हम climate action को सरकारों की multilateral संस्थाओं की जिम्मेदारी के रूप में देखते रहे हैं। जब तक सोसायटी इससे जुड़ा महसूस नहीं करेगी, मोदी मोदी करने से नही होता है, ये इसलिए हो रहा है कि हर हिन्दुस्तानी वचन बद्ध होकर के, संकल्प बद्ध होकर के खुद से जो हो सकता है करता है और जब हर व्यक्ति इसे खुद का दायित्व मानता है, तब लक्ष्य से हम कभी दूर नही रहते दोस्तों और आज हिन्दुस्तान इसीलिए कर पा रहा है । इस समस्या के समाधान में विश्व के अनेक विचार चल रहे है, अनेक योजनाएं चल रही है, अनेक NGO भी अपनी दुनियां चला रही है, बहुत कुछ हो रहा है अलग अलग तरीके से हो रहा है लेकिन भारत ने एक नया विचार रखा है, आग्रह किया है और मैंने Glasgow जब आया था तो मैंने एक शब्द में उस बात को वर्णित किया था और मैंने कहा था हमें LIFE पर focus करना है, LIFE! और जब मैं LIFE बोलता हूँ तो मेरा कहने का तात्पर्य होता है Lifestyle for environment! Lifestyle for environment को प्रोमोट करना आज समय की सबसे बड़ी मांग है। Consumption oriented approach, इससे बाहर निकलना बहुत ज़रूरी है। ‘Use and throw’ वाला माइंडसेट planet के लिए नकारात्मक है। हम कितना use करते हैं, यह Pocket के size से नहीं, बल्कि ज़रूरत से तय हो। हम ज़रूरत से ज्यादा जो भी use कर रहे हैं, उससे दुनिया में कोई ना कोई वंचित हो रहा है, उससे दुनिया के किसी कोने में Nature को exploit करने का दबाव बढ़ रहा है, इस sense of responsibility को हमें अपनी families में जागृत करते रहना होगा। और हर भारतीय को दुनियां में जहाँ जाए वहां इन हमारे संस्कारो को प्रकट करते ही रहना चाहिए । मुझे विश्वास है कि डेनमार्क और भारत साथ मिल कर विश्व की कई समस्याओं के लिए innovative समाधान तलाश सकते हैं। ऐसे समय में जब हम आज़ादी का अमृत महोत्सव मना रहे हैं, तब हमारी ये साझेदारी और अहम है। डेनमार्क भारत के white रेवोल्यूशन में हमारे साथ था; अब हमारे ग्रीन फ्यूचर में हमारा मज़बूत साझेदार बन रहा है। हमारे बीच इलेक्ट्रिक मोबिलिटी से लेकर, ग्रीन हाइड्रोजन, waste-to-wealth, sustainable urbanisation, green shipping, science, technology और innovation में सहयोग की अनंत संभावनाएं हैं। जैसा मैंने पहले कहा, आज भारत सोलर और विंड एनर्जी का दायरा बढ़ाने के लिए व्यापक काम कर रहा है। बायोफ्यूल से हमारे किसानों की आय बढ़ाने और हाइड्रोकार्बन पर निर्भरता कम करने के लिए बड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर बन रहा है। डेनमार्क की कंपनियों के पास इन क्षेत्रों में उल्लेखनीय experience भी है। इसलिए भारत में डेनिश इन्वेस्टमेंट के बहुत बड़े अवसर हैं। आप में से कई लोग डेनमार्क की बड़ी कंपनियों में काम कर रहे हैं। आप अपने डेनिश मित्रों को, अपने colleagues को भारत में मौजूद अवसरों के बारे में जरुर बताए । बताएंगे ना ? ऐसा ना हो कि मोदी जी ने हमको तो परोस दिया लेकिन हम किसी को परोसेंगे नही ।

उनका कहना था कि यहाँ कोपेनहेगेन यूनिवर्सिटी में विश्व प्रतिष्ठित नील बोर इंस्टिट्यूट है। आप सभी नील बोर के बारे में अवश्य जानते होंगे। Fundamental Physics के इतिहास में वे सबसे इलस्ट्रीयस व्यक्तियों में से एक हैं। उनकी intellectual उपलब्धियों के अलावा नील बोर इसलिए भी सम्मानित हैं क्योंकि उन्होंने अपने समय में कई टॉप साइंटिस्ट्स का जीवन बचाया था। लेकिन बहुत कम लोगों को इस बात का पता है कि नील बोर को जब खुद intellectual शरण की आवश्यकता होती थी, तो वे भारत के scriptures की तरफ जाते थे। उनका यह वाक्य बहुत प्रसिद्ध है और वो कई बार उसका उल्लेख करते थे – “I go to the Upanishad to ask questions.” आज नम्रतापूर्वक, लेकिन बड़े विश्वास के साथ हम अपने डेनिश दोस्तों को यह कहना चाहते हैं – “Come to India to jointly find answers to the problems of the planet”!

उन्होंने कहा कि ये मैं आपके बीच में आया हूँ और मेरे ये डेनमार्क की पहली visit है । तो मैं आपसे कुछ मांग सकता हूँ ? सचमुच में? अब मैं मांगूंगा और आप मानेंगे नही तो? मानेंगे लेकिन अगर करेंगे नही तो? पक्का करेंगे? कितने लोग है जो वादा पूरा करेंगे? ये आज़ादी का अमृत मोहोत्सव चल रहा है, आजादी के 75 साल है । इस अमृत मोहोत्सव से शुरू करना हैं , कौन मानता है ? अगर आप मानने वाले है तो मैं बताऊ? मैं देख रहा हूँ की धीरे-धीरे आवाज़ कम हो रही है आपकी। आपको लग रहा है कि कोई मुसीबत आ रही है ? ऐसा ही हो रहा है ना? मैं दुनियां में हमारे जितने देशवासी रहते है, उनसे मेरा एक आग्रह है । आप अपनी आवाज़ जरा कम करो, अपनी आवाज़ जरा कम करो। अब सबने देख लिया आप कहाँ बैठी हो। मैं कोई बहुत बड़ा गंभीर बात बताने वाला नही हूँ बस समान्य बात है, बहुत छोटी । करेंगे ? पक्का करेंगे? वादा निभाएंगे? देखिए भारत इतना महान देश है, भारत के प्रति हम इतना गर्व करते हैं। आप कम से कम हर वर्ष, हर वर्ष 5 नॉन इंडियन फ्रेंड्स, इंडियन नही ।पांच नॉन इंडियन फ्रेंड्स को हिंदुस्तान देखने के लिए भेजने का काम कर सकते हैं? उनको प्रेरित कर सकते हैं? अभी से target कीजिएगा इन पांच को तो मुझे हिन्दुस्तान देखने के लिए भेजना है और फिर उसको समझाइए, हमारे यहाँ दक्षिण में ये है, तमिलनाडू में ये है, ओड़िसा में ये है,बंगाल में ये है ,जाईए । आपको कल्पना है दोस्तों आप दुनियां की कितनी बड़ी ताकत बन जाओगे ? फिर ऐसा मत करना कि वहां direct flight नही है । रोना धोना करने वालों का ये काम नही है जी। एक जमाना था जब हवाई यात्राएँ नही थी, मेरा देश ऐसा था कि दुनिया के लोग हजारो किलोमीटर पैदल यात्रा कर के मेरा देश देखने के लिए आते थे ।हमें ये फिर से,फिर से ये वातावरण बनाना है । अब देखिए, देखते ही देखते दुनियां के लिए एक ही destination बन जाएगा, चलो इंडिया । और ये काम, ये काम embassy का नही है, ये काम राजदूतों का नही है, ये काम आप जैसे राष्ट्रदूतों का है ।राजदूत तो एक होता है, राष्ट्रदूत तो लाखो की तादात में होते है ।तो करेंगे? अब कुछ आवाज़ में दम है। चलिए दोस्तों मुझे बहुत अच्छा लगा, आप सबसे मिलने का मौका मिल गया और आप लोगो का उत्साह, उमंग पूरे हिन्दुस्तान में खबर फ़ैल गई होगी? आप भी तो वही से है, live करते होंगे शायद बैठे बैठे ।

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