अक्षय तृतीया का पावन पर्व होगा 3 मई को : अबूझ मुहूर्त पर बड़ी संख्या में अक्षय तृतीया पर होंगे विवाह

Font Size

संपूर्ण पापों का नाश करने वाली एवं सभी सुखों को प्रदान करने वाली मानी जाती है अक्षय तृतीया

गुरुग्राम , 1 मई :  अक्षय तृतीया का पावन पर्व वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया को मनाया जाता है। यह पर्व इस बार 3 मई, मंगलवार को मनाया जाएगा। मान्यता है कि त्रेता और सतयुग का आरंभ भी इसी तिथि को हुआ था, इसलिए इसे कृतयुगादि तृतीया भी कहा जाता है। शास्त्रों में उल्लेख है कि इस दिन स्नान, दान, जप, होम, स्वाध्याय, तर्पण आदि जो भी कर्म किए जाते हैं वे सब अक्षय हो जाते हैं। यह तिथि सम्पूर्ण पापों का नाश करने वाली एवं सभी सुखों को प्रदान करने वाली मानी गई है। इस तिथि की अधिष्ठात्री देवी पार्वती हैं।

स्वयंसिद्ध अबूझ मुहूर्त है अक्षय तृतीया 

बिना पंचांग देखे भी इस दिन कोई भी शुभ मांगलिक कार्य जैसे विवाह, गृह प्रवेश, घर, भूखंड या वाहन आदि की खरीदारी से सम्बंधित कार्य किए जा सकते हैं। तृतीया तिथि को पार्वती जी ने अमोघ फल देने की सामथ्र्य का आशीर्वाद दिया था। उस आशीर्वाद के प्रभाव से इस तिथि को किया गया कोई भी कार्य निष्फल नहीं होता। धार्मिक ग्रंथों में यह भी उल्लेख है कि धर्मराज को इस तिथि का महत्व समझाते हुए माता पार्वती ने कहा था कि कोई भी स्त्री, जो किसी भी तरह का सुख चाहती है उसे यह व्रत करते हुए नमक का पूरी तरह से त्याग करना चाहिए। स्वयं में भी यही व्रत करके मैं भगवान शिव के साथ आनंदित रहती हूं। विवाह योग्य कन्याओं को भी उत्तम वर की प्राप्ति के लिए यह व्रत करना चाहिए। जिनको संतान नहीं हो रही हो वे स्त्रियां भी इस व्रत करके संतान सुख प्राप्त कर सकती हैं।

दान करने से मिलता है पुण्य

शास्त्रों के अनुसार इस माह में प्याऊ लगाना,छायादार वृक्ष की रक्षा करना, पशु-पक्षियों के खान-पान की व्यवस्था करना, राहगीरों को जल पिलाना जैसे सत्कर्म मनुष्य के जीवन को समृद्धि के पथ पर ले जाते हैं। स्कंद पुराण के अनुसार जल दान का सर्वाधिक महत्व बताया गया है। अनेक तीर्थ करने से जो फल प्राप्त होता है, वह केवल वैशाख मास में जलदान करने से प्राप्त हो जाता है।

ज्योतिषाचार्यों का है कहना

अक्षय तृतीया के दिन सूर्योदय से पूर्व उठकर भगवान विष्णु एवं माँ लक्ष्मी की विधिवत पूजा की जाए तो सुख की प्राप्ति होती है। लक्ष्मीनारायण के साथ-साथ ही सुख-सौभाग्य-समृद्धि हेतु इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती जी का पूजन भी किया जाता है। उनका कहना है कि इस दिन दान देने वाला प्राणी सूर्य लोक को जाता है और जो अक्षय तृतीया पर उपवास करता है वह रिद्धि-वृद्धि और श्री से संपन्न हो जाता है। शहर के विभिन्न बैंकट हॉल व शादी आयोजन स्थल अक्षय तृतीया पर समारोह के लिए पहले से ही बुक हो चुके हैं। अक्षय तृतीया पर बड़ी संख्या में शहर में शादियां होंगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published.

You cannot copy content of this page
%d bloggers like this: