वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बैंकों, गैर-बैंकिंग वित्तीय संस्थानों के प्रमुखों के साथ बजट के बाद की बैठक की

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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बैंकों, गैर-बैंकिंग वित्तीय संस्थानों (एनबीएफसी) और वित्तीय संस्थानों के प्रमुखों के साथ बजट के बाद की बैठक की अध्यक्षता की

वित्त मंत्री ने सभी बैंकों से एकाउंट एग्रीगेटर फ्रेमवर्क से जुड़ने का आह्वान किया और कहा कि इससे ऋण के प्रवाह में सुधार होगा और डिजिटल ऋण को बढ़ावा मिलेगा

बैठक में डिजिटल बैंकिंग के लाभ को देश के कोने-कोने में उपभोक्ताओं के अनुकूल तरीके से पहुंचाने पर जोर दिया गया

मुम्बई : केंद्रीय वित्त और कॉरपोरेट कार्य मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण ने आज मुंबई में बैंकों, गैर-बैंकिंग वित्तीय संस्थानों (एनबीएफसी) और वित्तीय संस्थानों के प्रमुखों के साथ बजट के बाद की बैठक की अध्यक्षता की।

 

इस बैठक में केन्द्रीय वित्त राज्यमंत्री डॉ. भागवत किशनराव कराड; वित्तीय सेवा विभाग के सचिव श्री संजय मल्होत्रा; आर्थिक कार्य विभाग के सचिव श्री अजय सेठ और मुख्य आर्थिक सलाहकार डॉ. वी. अनंत नागेश्वरन मौजूद थे। इस बैठक में सभी सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों, चुनिंदा निजी क्षेत्र के बैंकों, गैर-बैंकिंग वित्तीय संस्थानों (एनबीएफसी) और वित्तीय संस्थानों के प्रमुख भी मौजूद थे।

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सूचना साझा करने और सहयोग के महत्व को रेखांकित करते हुए, वित्त मंत्री ने सभी बैंकों से एकाउंट एग्रीगेटर मॉडल, जोकि छोटे उधारकर्ताओं के लिए ऋण के निर्बाध प्रवाह की सुविधा प्रदान करेगा और डिजिटल ऋण को बढ़ावा देगा, से जुड़ने का आह्वान किया। वित्त मंत्री ने निर्देश दिया कि वाराणसी जिले में दो बैंकों द्वारा शुरू की गई पहल की तर्ज पर एकाउंट एग्रीगेटर मॉडल और नकद प्रवाह (कैशफ्लो) पर आधारित ऋण प्रदान करने से संबंधित प्रायोगिक कदमों (पायलट) को उत्तर पूर्वी क्षेत्र सहित देश भर के विभिन्न भागों में दोहराया जा सकता है।

इस बैठक में पीएम गतिशक्ति, रक्षा, दूरसंचार, विनिर्माण एवं निर्यात, आपातकालीन क्रेडिट लाइन गारंटी योजना (ईसीएलजीएस) और विनिर्माण से जुड़ी नई इकाइयों एवं स्टार्ट-अप को कर संबंधी रियायतों के संदर्भ में बजट की विभिन्न घोषणाओं, जोकि वित्तीय क्षेत्र को नए अवसर प्रदान करते हैं, पर विचार-विमर्श किया गया। इस बैठक में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को गौण ऋण, केसीसी, आत्मनिर्भर भारत योजनाएं और क्रेडिट आउटरीच प्रोग्राम, जिसने कर्जदारों और बैंकों को कोविड-19 महामारी के प्रभाव से तत्काल राहत प्रदान की, जैसी विभिन्न योजनाओं/कार्यक्रमों पर चर्चा की गई। ईसीएलजीएस की सीमा को बढ़ाकर पांच लाख करोड़ रुपये तक किए जाने और इसकी अवधि को 31 मार्च 2023 तक बढ़ाए जाने के बारे में भी चर्चा हुई।

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इस बात पर जोर दिया गया कि डिजिटल बैंकिंग, डिजिटल भुगतान और फिनटेक संबंधी नवाचार बैंकों के लिए मध्यस्थता की लागत को कम करने और किफायती सेवाएं प्रदान करने के नए तरीके खोजने का एक अवसर है और डिजिटल बैंकिंग के लाभों को उपभोक्ताओं के अनुकूल तरीके से देश के कोने-कोने तक पहुंचाया जाना चाहिए। इस बात पर भी जोर दिया गया कि बैंकिंग उद्योग को जन धन योजना के तहत बैंकिंग सेवा से वंचित वयस्कों के खाते खोलने पर ध्यान देना चाहिए और सभी पात्र वयस्कों के लिए बीमा/पेंशन की कवरेज सुनिश्चित करनी चाहिए।

इस बैठक में इस बात पर प्रकाश डाला गया कि वित्तीय वर्ष 2020-21 में 1.22 लाख करोड़ रुपये और 2021-22 की अर्द्ध-वार्षिक अवधि में 0.79 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड लाभ, सकल एनपीए के आंकड़ों के 11.20 प्रतिशत (मार्च ’18 के अनुसार) के सर्वकालिक उच्चतम स्तर से घटकर 6.90 प्रतिशत (सितंबर 2021 के अनुसार) तक आने और सीआरएआर से संबंधित 11.5 प्रतिशत के विनियामक अधिदेश की तुलना में 16.5 प्रतिशत (सितंबर 2021 स्थिति के अनुसार) के सर्वकालिक उच्च सीआरएआर के पर्याप्त बफर के साथ बैंक भविष्य के विकास को सहारा देने की दृष्टि से मजबूत स्थिति में हैं और इससे देश की अर्थव्यवस्था को गति मिल सकेगी।

इस बैठक में ऋण प्रदान करने की गतिविधि को तेज करने और व्यवसायों एवं आम लोगों के लिए ऋण प्राप्त करने हेतु अनुकूल वातावरण बनाने पर भी जोर दिया गया।

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