प्रधानमंत्री सुरक्षा चूक मामले पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई : मामले की जांच के लिए रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में कमिटी गठित करने का निर्णय

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प्रधानमंत्री

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गुरुग्राम :  प्रधानमंत्री सुरक्षा चूक मामले को लेकर आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. तीन जजों की बेंच की अध्यक्षता मुख्य न्यायाधीश एन वी रामना ने की.  केंद्र सरकार और पंजाब सरकार ने अपनी-अपनी दलीलें दी. लेकिन सर्वोच्च अदालत ने उन दलीलों को दरकिनार करते हुए इस मामले की जांच के लिए रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में एक कमेटी गठित करने का निर्णय लिया.  यह कमेटी जल्द ही अपनी रिपोर्ट अदालत के सामने रखेगी जिसके आधार पर आगे निर्णय लिया जाएगा.  सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान यह साफ कर दिया कि अदालत प्रधानमंत्री सुरक्षा चूक मामले को लेकर बेहद गंभीर है .

 

 सुप्रीम कोर्ट में आज हुई सुनवाई के दौरान पंजाब सरकार की ओर से पेश हुए वकील डी एस पटवालिया ने केंद्र सरकार द्वारा गठित कमेटी पर सवाल खड़े किया. उनका कहना था कि इस कमेटी में  केवल केंद्र सरकार के प्रतिनिधि ही शामिल हैं इसलिए इस कमेटी से हमें निष्पक्ष जांच की उम्मीद नहीं है.  उन्होंने अदालत के सामने पंजाब सरकार द्वारा गठित कमेटी को जांच करने देने की मांग की.  उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की ओर से पंजाब सरकार के मुख्य सचिव और डीजीपी को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया गया है.

ब्रेकिंग न्यूज : पीएम सुरक्षा चूक मामले पर सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई में क्या हुआ ?

 

 पंजाब सरकार के वकील पटवालिया  ने  कहा कि केंद्र सरकार की ओर से मुख्य सचिव को जारी नोटिस में दोषी ठहराते हुए उनसे जवाब तलब किया गया है.  उन्होंने कहा कि जांच रिपोर्ट आने से पहले ही केंद्र सरकार पंजाब के वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने पर तुली हुई है.  इस पर रोक लगाने की जरूरत है.

 

 सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश एनवी रामना ने बताया कि पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल की ओर से अदालत के सामने रिपोर्ट आज आई है.  इस पर याचिकाकर्ता की वकील ने अदालत से कल या परसों इस मामले की सुनवाई करने की मांग की.  उन्होंने कहा कि अदालत भी इस रिपोर्ट को देख ले और उसके बाद वकील भी अपनी दलीलें ठीक से रख पाएंगे.  इस पर केंद्र सरकार की ओर से अदालत में मौजूद सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को कोई रिपोर्ट नहीं देनी थी बल्कि डॉक्यूमेंट सीज कर कोर्ट के सामने रखना था. 

 

 पंजाब सरकार के वकील डी एस पटवालिया ने  केंद्र की कमेटी का पुरजोर विरोध किया.  इस पर केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि मुख्य सचिव और डीजीपी को नोटिस, सुप्रीम कोर्ट में मामला आने से पहले ही जारी किया गया है.  यह कदम केंद्र सरकार की ओर से नियमों के अनुरूप उठाया गया है. सॉलिसिटर जनरल ने यह भी कहा कि केंद्र सरकार की ओर से गठित कमेटी नियमों के अनुरूप है.  इसलिए उसे जांच करने की अनुमति दी जाए. सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत के सामने यह भी कहा कि केंद्र सरकार की कमिटी एक्सपर्ट की कमिटी है जिसमें गृह विभाग, आई बी और एसपीजी के अधिकारी हैं. इसलिए उन्हें काम करने दिया जाए.  उन्होंने अदालत को आश्वस्त करने की कोशिश की कि केंद्र की कमेटी की जांच रिपोर्ट अदालत के सामने रखी जाएगी और कोर्ट के निर्देश के बिना किसी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी. 

 

 इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर केंद्र सरकार ने कार्रवाई करने का मन बना ही लिया है और सब कुछ निर्णय लिया है तो फिर अदालत के सामने आने का क्या औचित्य है.  अदालत ने सॉलिसिटर जनरल से यह भी पूछा कि आप पंजाब सरकार की ओर से गठित कमेटी द्वारा जांच करने में अड़ंगे क्यों लगाना चाहते हैं.  चीफ जस्टिस एन वी रमना ने सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल से कहा कि इस स्थिति में फिर सुप्रीम कोर्ट द्वारा कमेटी गठित करने का क्या औचित्य है . 

 

 चीफ जस्टिस एन वी रामना ने पंजाब सरकार के वकील पटवालिया से केंद्र सरकार द्वारा गठित कमेटी पर सवाल पूछा तो उन्होंने केंद्र की कमेटी से जांच कराने पर अपनी सहमति देने से साफ तौर पर इंकार कर दिया. 

 

 ऐसे में सुप्रीम कोर्ट के पास कोई और विकल्प नहीं बचा था.  सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद प्रधानमंत्री सुरक्षा चूक मामले की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में कमेटी गठित करने का निर्णय लिया.  अदालत ने बताया कि यह कमेटी जल्द ही अपना निर्णय देगी जिसके आधार पर आगे निर्णय लिया जाएगा. 

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