फूड प्रोसेसिंग की सूक्ष्म इकाई लगाने का सुनहरा अवसर, युवा उठाएं लाभ : डॉ0 यश गर्ग

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– इकाई लगाने के लिए सरकार दे रही 10 लाख रुपये तक की सब्सिडी

गुरूग्राम, 5 अक्टूबर। आत्मनिर्भर भारत अभियान को बढ़ावा देने तथा किसानों व लघु उद्योगों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से सरकार द्वारा प्रधानमन्त्री फॉर्मालाइजेशन ऑफ माइक्रो फूड प्रोसेसिंग इन्टरप्राइजिज योजना (पीएमएफएमई) शुरू की गई है। इस योजना का लाभ अधिक से अधिक पात्र लोगों तक पहुंचाने के उद्देश्य से आज उपायुक्त डा. यश गर्ग की अध्यक्षता में बैठक आयोजित की गई। यह बैठक लघु सचिवालय में उपायुक्त कार्यालय में आयोजित की गई।

बैठक में योजना की जानकारी जन-जन तक पहुंचाने तथा पात्र व्यक्तियों को जोड़ने संबंधी विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। इस योजना के क्रियान्वयन का कार्य हाल ही में जिला उद्योग केन्द्र से अलग करके बनाए गए जिला एमएसएमई केन्द्र को दिया गया है। बैठक में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई )केन्द्र गुरूग्राम के संयुक्त निदेशक दिग्विजय सिंह ने पावर प्वाइंट प्रैजेंटेशन के माध्यम से योजना की रूपरेखा रखी। उन्होंने बताया कि योजना के तहत हरियाणा प्रदेश के प्रत्येक जिले में एक खाद्य उत्पाद का चयन करके उसे बढ़ावा दिए जाने का कार्य शुरू किया गया है। गुरुग्राम जिला के लिए वन डिस्ट्रकट वन प्रोडेक्ट (ओ.डी.ओ.पी ) के तहत आँवला का चयन हुआ है ।

उपायुक्त ने कहा कि गुरूग्राम एक बड़ा जिला होने के कारण यहां पर इसकी क्षमता और संभावनाएं अधिक हैं। उन्होंने कहा कि यह सरकार की एक महत्वाकंाक्षी योजना है जिसकी जानकारी जन-जन तक पहुंचाई जानी आवश्यक है ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग इसका फायदा उठा सकें। इसके साथ ही जिला में कृषि विभाग, एनआरएलएम, एनयूएलएम, मत्स्य पालन, बागवानी विभाग , पशुपालन विभाग सहित कई अन्य ऐसे विभाग है जो प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से किसानों व स्वयंसेवी समूहों(स्वयंसेवी समूह) सहित विभिन्न संगठनों से जुड़े हुए हैं। ऐसे में जरूरी है कि इन विभागों के साथ तालमेल करके योजना को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाया जाए।

इसी प्रकार , सोहना की तरफ मत्स्य पालकों की संख्या अधिक है जिन्हें इस योजना से जोड़ते हुए उन्हें इसका लाभ पहुंचाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि इस योजना के बेहतर क्रियान्वयन में बैंकर्स की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने बैठक में उपस्थित एमएसएमई गुरूग्राम के संयुक्त निदेशक दिग्विजय सिंह से कहा कि वे जल्द ही जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करवाएं ।

दिग्विजय सिंह ने योजना के बारे में विस्तार से बताया कि यह योजना सूक्ष्म इकाईयों को प्रोत्साहित व बढ़ावा देने के उद्देश्य से लागू की जा रही है, जिनमें वे इकाइयां आती हैं जिनकी मशीन आदि की लागत मिलाकर 1 करोड़ रूपये तक और उनका सालाना टर्न ओवर 5 करोड़ रूपये तक है। उन्होंने बताया कि इस योजना के तहत देशभर में लगभग 2 लाख युनिट लगाई जानी प्रस्तावित है जिसके लिए केन्द्र सरकार ने 10 हजार करोड़ रूपये का प्रावधान किया है । इसमें हरियाणा में 4125 युनिटे स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है जिसके लिए 3 हजार करोड़ रूपये का प्रावधान किया गया है। उन्होंने यह भी बताया कि इस योजना में इकाई लगाने पर सरकार कुल परियोजना लागत का 35 प्रतिशत ( अधिकतम 10 लाख रुपये ) की सब्सिडी देगी।

उन्होंने बताया कि इस योजना का लाभ लेने के लिए आवेदक की न्यूनतम आयु 18 वर्ष या उससे अधिक तथा शैक्षिक योग्यता कम से कम आठवीं पास हो। एक परिवार से एक ही व्यक्ति इस योजना का लाभ ले सकता है। पहले से संचालित खाद्य उत्पादन इकाइयां , एफपीओ व एसएचजी भी इस योजना का लाभ ले सकते हैं जिनकी युनिट में कर्मचारियों की संख्या 10 या उससे कम हो।

बैठक में अतिरिक्त आयुक्त विश्राम कुमार मीणा , जिला विकास एवं पंचायत अधिकारी नरेन्द्र सारवान , अग्रणी जिला प्रबंधक प्रहलाद रॉय गोदारा , डॉ आत्मप्रकाश , विनय त्रिपाठी , अंकित चौहान , मनमीत यादव , एनआरएलएम से दीप्ती ढींढसा सहित कासन गांव के सरपंच सतदेव मौजूद थे ।

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