महामारी में प्रासंगिक बनने हेतु शिक्षकों को गीता एवं अनु-गीता के पाठों को आत्मसात करना होगा : प्रो. एम.एम. गोयल

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गुरुग्राम, 04 सितम्बर :   “महामारी में प्रासंगिक बनने हेतु शिक्षकों को गीता एवं अनु-गीता में दिए गए पाठों को आत्मसात करना होगा” । ये शब्द  कुलपति स्टारेक्स यूनिवर्सिटी प्रो. एम.एम. गोयल ने आज यहां शिक्षक दिवस पर आयोजित एक समारोह में शिक्षकों को संबोधित करते हुए कहे ।

प्रो. गोयल जो चार पीढ़ियों से शिक्षकों के परिवार से संबंधित हैं ने बताया  कि छात्रों की परिपक्वता और चरित्र के पोषण के लिए एक शिक्षक ज्ञान के दूत से कहीं अधिक है ।

कुलपति स्टारेक्स यूनिवर्सिटी प्रो. एम.एम. गोयल ने कहा कि  एक शिक्षण कार्य पेशे और व्यवसाय की सीमा से परे   नेतृत्व की भावना के साथ आजीविका अर्जित करना और दूसरों के प्रेरक होना है ।

प्रो. गोयल का मानना है कि आध्यात्मिक उत्साह आज की आवश्यकता है क्योंकि आध्यात्मिक दिवालियेपन और व्यावसायीकरण शिक्षा में बिगड़ते मानकों के दो प्रमुख कारण हैं। प्रो. एम.एम. गोयल ने कहा कि  शिक्षक आज की ज्ञान अर्थव्यवस्था में सरस्वती के बच्चों के रूप में  सम्मान के पात्र हैं यदि डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन जैसे महान शिक्षक नहीं भी हैं।

स्टारेक्स यूनिवर्सिटी के संस्थापक रजिस्ट्रार डॉ एस एल वशिष्ठ ने कहा कि शिक्षक छात्रों के रोल मॉडल होते हैं। एक अच्छा शिक्षक हमेशा छात्रों के दिल और दिमाग में रहता है।

इस अवसर पर स्टारेक्स विश्वविद्यालय के आठ संस्थापक शिक्षकों में प्रो. सालिनी जौहरी, प्रो. दिव्या त्यागी, प्रो. ऋचा चतुर्वेदी, सुश्री सपना पंवार, सुश्री शिवानी शर्मा, सुश्री वंदना कौशिक, सुश्री सुरुचि कपूर एवं भूपिंदर सिंह को प्रशस्ति पत्र दिया गया।

इस अवसर पर कुलाधिपति मोहिंदर सिंह, पूनम सिंह, संस्थापक रजिस्ट्रार डॉ. एस.एल. वशिष्ठ,  अरुणा गोयल और अनीता वशिष्ठ उपस्थित थे ।

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