दिल्ली-अहमदाबाद हाईस्पीड रेल कॉरिडोर का खाका तैयार , गुरुग्राम से गुजरेगा कॉरिडोर

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एडीसी विश्राम कुमार मीणा की अध्यक्षत में ग्रामीणों के साथ हुई बैठक

नई दिल्ली : दिल्ली-अहमदाबाद हाईस्पीड रेल कॉरिडोर का खाका अर्थात् डीपीआर तैयार की जा रही है। यह कोरिडोर गुरूग्राम से होकर गुजरेगा। इस कोरिडोर को लेकर नेशनल हाईस्पीड रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड ने आज गुरूग्राम में पर्यावरण और सामाजिक परामर्श बैठक आयोजित की जिसमें आम जनता से सुझाव आमंत्रित किए गए। बैठक की अध्यक्षता अतिरिक्त उपायुक्त विश्राम कुमार मीणा ने की और उनके साथ कारपोरेशन के एसडीओ अनिल शर्मा उपस्थित थे।

गुरुग्राम के 33 गाव होंगे प्रभावित ,

 

बैठक में कॉरपोरेशन के अधिकारियों ने पावर प्वांइट प्रैजेंटेशन के माध्यम से हाईस्पीड रेल का खाका प्रस्तुत करते हुए जनप्रतिनिधियों से सुझाव लिया। नेशनल हाईस्पीड रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड के एसडीओ अनिल शर्मा ने बताया कि यह रेल कॉरिडोर दिल्ली के द्वारका स्थित सैक्टर-21 से शुरू होगा जिसकी अलाइनमेंट गुरूग्राम में द्वारका एक्सप्रेस-वे के साथ से प्रस्तावित है। गुरूग्राम से आगे यह गुरूग्राम-जयपुर रेल लाइन के साथ साथ रेवाड़ी जाएगा। उसके बाद, एनएच-48 के समानांतर जाते हुए अहमदाबाद पहुंचेगा। उन्होंने बताया कि इस परियोजना के तहत दिल्ली से अहमदाबाद तक कुल 14 स्टेशन प्रस्तावित हैं जिनमें मानेसर भी एक है। इसकी लंबाई लगभग 886 किलोमीटर है और यह चार राज्यों नामतः दिल्ली , हरियाणा , राजस्थान व गुजरात से होते हुए गुजरेगा। हरियाणा राज्य में इस परियोजना की कुल लंबाई 78.22 किलोमीटर होगी।

 

गुरूग्राम में हाईस्पीड रेल कॉरिडोर लगभग 48.08 किलोमीटर लम्बी

बैठक में बताया गया कि जिला गुरूग्राम में यह हाईस्पीड रेल कॉरिडोर लगभग 48.08 किलोमीटर दूरी में बनेगा, जो जिला के 33 गांवों को प्रभावित करेगा। हरियाणा प्रदेश में यह रेल दो जिलो नामतः गुरूग्राम व रेवाड़ी से होकर गुुजरेगी। यह हाईस्पीड रेल कॉरिडोर मैट्रो की तरह ऐलिवेटिड होगा और इसपर चलने वाली रेल की अधिकतम गति 350 किलोमीटर प्रति घंटा होगी जबकि औसतन गति 250 किलोमीटर प्रति घंटा रहेगी।

इस हाईस्पीड रेल परियोजना को लेकर रेल कॉरपोरेशन द्वारा सर्वे व इंवेस्टिगेशन आदि का कार्य किया जा रहा है जिसके बाद इसकी डीपीआर तैयार कर रेल मंत्रालय को भेजी जाएगी। उन्होंने बताया कि इस परियोजना को अमलीजामा पहनाने के लिए आमजन की भागीदारी सुनिश्चित करते हुए काम किया जा रहा है ताकि पर्यावरण और सामाजिक परामर्श के साथ परियोजना का खाका तैयार हो। इस परियोजना के शुरू होने से दिल्ली से अहमदाबाद तक का सफर मात्र 3 से 4 घंटे में तय किया जा सकेगा।

 

क्या है विशेषता ?

हाई स्पीड रेल ट्रैक का कंस्ट्रक्शन इस प्रकार की टेक्नोलॉजी से किया जाएगा जिससे उस ट्रैक पर 350 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से ट्रेन दौड़ सकेगी.

हाई स्पीड रेल ट्रैक के निर्माण में इंडियन ठेकेदारों को भी काम मिलेंगे.

इसमें काम करने वाले सुपरवाइजर और वर्कर्स को विशेष ट्रेनिंग दी जाएगी क्योंकि हाई स्पीड रेल ट्रैक के निर्माण में मैक्सिमम स्टील फैब्रिकेशन का उपयोग किया जाएगा।

इसमें दो अंतरराष्ट्रीय स्तर के एक्सपर्ट तैनात होंगे जो स्टील वेल्डिंग फेब्रिकेशन के काम पर 24 घंटे नजर रखेंगे।

इस ट्रैक के निर्माण में जापानी क्वालिटी की स्टील का उपयोग किया जाएगा.

इस ट्रैक पर चलने वाली ट्रेन पूरी तरह जापान में निर्मित होगी जिसे भारत में लाकर असेंबल किया जाएगा.

हाई स्पीड रेल ट्रैक पर सिग्नल और टेलिकॉम सुविधा के लिए जापानी या फिर यूरोपियन टेक्नोलॉजी का उपयोग किया जाएगा.

देश में लगभग एक दर्जन हाई स्पीड रेल कॉरिडोर के निर्माण की संभावना पर काम किया जा रहा है.

अतिरिक्त उपायुक्त विश्राम कुमार मीणा ने कहा हालांकि यह परियोजना शुरूआती चरण में है जिसे अमलीजामा पहनाने के लिए हाईस्पीड रेल कॉरपोरेशन को जिला प्रशासन द्वारा पूरा सहयोग दिया जाएगा। इस परियोजना से जहां एक ओर उद्योगों को पहले की अपेक्षा गति मिलेगी, वहीं दूसरी ओर इससे यहां के स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे। उन्होंने रेल कॉरपोरेशन के पदाधिकारियों को हर संभव मदद देने का आश्वासन दिलाया। बैठक में कई गांवो के ग्रामीण भी उपस्थित थे जिन्होंने इस प्रस्तावित परियोजना का स्वागत किया।

 

 

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