आइकैट में सेफ्टी ग्लास की तकनीक को लेकर अंतर्राष्ट्रीय वेबिनार का आयोजन, विशेषज्ञों ने दिया ओईएम पर बल

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गुरुग्राम : केंद्र सरकार की संस्था इंटरनेशनल सेंटर फॉर आटोमोटिव टेक्नोलॉजी ऑफ इंडिया की ओर से सेफ्टी ग्लास टेक्नोलॉजी विषय पर इंटरनेशनल सिंपोजियम के प्रथम डिजिटल संस्करण iSSGT 21 का 18 मार्च, गुरुवार को किया गया. इस महत्वपूर्ण वेबीनार का उद्घाटन ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स के डिप्टी डायरेक्टर जनरल महीम जैन ने किया। इस अवसर पर मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट आलोक जेटली, असाही इंडिया ग्लास लिमिटेड के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर मिर्जा आसिफ बेग, सैंट गोबैन इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के हेड ऑफ क्वालिटी, किशोर कुमार और इंटरनेशनल सेंटर फॉर आटोमोटिव टेक्नोलॉजी की सीनियर जनरल मैनेजर एंड चीफ बिजनेस ऑफिसर पामेला टिक्कू भी शामिल हुए।

वेबीनार को संबोधित करते हुए अपने उद्घाटन भाषण में मुख्य अतिथि महीम जैन ने ओईएम की आवश्यकता पर बल दिया. उन्होंने कहा कि सेफ्टी ग्लास मैन्युफैक्चरर्स और ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स, क्वालिटी कंट्रोल ऑर्डर को लागू करने की दिशा में संयुक्त रूप से काम कर रहे हैं। उन्होंने सेफ्टी ग्लास के स्पेसिफिकेशन की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने सेफ्टी ग्लास की आवश्यकताओं को रेखांकित करते हुए आधुनिक तकनीक के बारे में भी बताया। इसके लिए निर्धारित टेस्ट की प्रक्रिया को भी अपनाने पर बल दिया।

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वेबीनार में विशिष्ट अतिथि मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट, आलोक जेटली ने अपने संबोधन में क्वालिटी कंट्रोल ऑर्डर के प्रभाव और संबंधित औद्योगिक क्षेत्रों की चुनौतियों पर भी विस्तार से प्रकाश डाला. उन्होंने चुनौतियों से निबटने के लिए उपयोगी सुझाव भी दिए।

असाही इंडिया ग्लास लिमिटेड के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर, मिर्जा आसिफ बेग ने सेफ्टी ग्लास इंडस्ट्री पर पड़े कोविड-19 महामारी के नकारात्मक असर का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि सेफ्टी ग्लास मैन्युफैक्चरिंग की लागत में हुई वृद्धि के बावजूद अपने अस्तित्व को बचाए रखने में यह इंडस्ट्री कामयाब रही और उत्पादन की गति को बरकरार रखा।

सेमिनार को संबोधित करते हुए किशोर कुमार ने इस इंडस्ट्री को रेगुलेट करने वाली सरकारी संस्थाओं के प्रयास की सराहना की। उन्होंने कहा कि संस्थाओं द्वारा क्यू सी ओ के अनुसरण के लिए किए गए प्रयास से भारत में निम्न स्तर के पार्ट्स की बिक्री पर रोग लग सकेगी।

इससे पूर्व अपने स्वागत भाषण में इंटरनेशनल सेंटर फॉर आटोमोटिव टेक्नोलॉजी की वरिष्ठ महाप्रबंधक पामेला टिक्कू ने  ग्लास इंडस्ट्री को बढ़ावा देने की दृष्टि से केंद्र सरकार द्वारा उठाए गए विभिन्न कदमों की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने क्वालिटी कंट्रोल ऑर्डर के नियम व शर्तों का पालन कराने में ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स और संबंधित इंडस्ट्री व इससे जुड़े अन्य क्षेत्रों को आईकेट की ओर से आवश्यक तकनीकी सहायता उपलब्ध करवाने का आश्वासन दिया. उन्होंने कहा कि उनकी संस्था उत्पादन की गुणवत्ता को बनाए रखने की दृष्टि से निर्धारित मानदंडों के अनुसार टेस्टिंग सर्विसेज की सुविधा उपलब्ध करवाएगी।

 iSSGT 21 वेबिनार के संयोजक एवं आइकैट के सहायक महाप्रबंधक अमित करवाल ने वेबिनार के दौरान अपने अनुभव साझा करने वाले सभी विशेषज्ञों एवं अतिथियों का धन्यवाद ज्ञापन किया

तकनीकी सत्र में राकेश कुमार, वैज्ञानिक-‘डी ‘और आदित्य दास, वैज्ञानिक-‘ डी”- ब्यूरो ऑफ़ इंडियन स्टैण्डर्ड ने गुणवत्ता नियंत्रण सम्बन्धी नियमों और आईएस के प्रति सेफ्टी ग्लास के बीआईएस प्रमाणन IS:2553(Part2) -2019 & IS:2553(Part1)-2018 के कार्यान्वयन के बारे में क्रमशः दर्शकों को विस्तार से समझाया.

देवेन्द्र कुमार, आईआईटी (BHU) और असाही इंडिया ग्लास के राहुल निखंज द्वारा “सेफ्टी ग्लासेस के विकास के लिए वैज्ञानिक दृष्टिकोण” के प्रकारों पर तकनीकी प्रस्तुतियों के साथ कार्यक्रम की कार्यवाही जारी रही। अंतिम सत्र को रवि बालाकृष्णन और सेंट गोबेन ने आइकेट के स्टेट ऑफ द आर्ट टेस्ट फैसिलिटीज की जानकारी दी साथ ही “सेफ्टी ग्लास के क्षेत्र में फ्यूचर टेक्नोलॉजीज” पर प्रस्तुति के साथ विभिन्न आवश्यक पहलुओं को चिह्नित किया।

वेबिनार का समापन मधुसूदन जोशी, डीजीएम आइकैट के वोट ऑफ़ थैंक्स के साथ हुआ। इस आयोजन का केंद्र बिंदु केन्द्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय द्वारा जारी किए गए नवीनतम सुरक्षा नियंत्रण आदेश के बारे में दर्शकों को जागरूक करना था। केंद्र सरकार द्वारा 25 फरवरी, 2021 को जारी आदेश एसओ नं 902 (ई) आगामी 1 अप्रैल 2022 से लागू होगा. विशेषज्ञों ने सेफ्टी ग्लास के क्षेत्र में नवीनतम तकनीक की भी जानकारी दी. इस एक दिवसीय कार्यक्रम में प्रख्यात वक्ताओं और सेफ्टी ग्लास एंड ऑटोमोटिव इंडस्ट्री, ओईएम, नियामक निकाय, कंसल्टेंट्स, शैक्षणिक संस्थानों, परीक्षण एजेंसियों और अन्य संबद्ध हितधारकों के 250 से अधिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

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