इंडिया इंटरनेशनल साइंस फेस्टिवल-2020 में बोले पीएम मोदी : अब टेक्स्ट बुक पर नहीं, रिसर्च व एप्लीकेशन पर करें फोकस

57 / 100
Font Size

सुभाष चौधरी

नई दिल्ली : प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी ने इंडिया इंटरनेशनल साइंस फेस्टिवल-2020 के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि भारत के पास विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार की एक समृद्ध विरासत है। हमारे वैज्ञानिकों ने लीक से अलग हट कर रिकॉर्ड ब्रेक करने वाले शोध किये हैं। वैश्विक समस्याओं को सुलझाने में हमारा तकनीकी उद्योग सबसे आगे है। लेकिन, भारत और अधिक करना चाहता है। हम अतीत को गर्व के साथ देखते हैं लेकिन एक बेहतर भविष्य चाहते हैं।

भारत Basics पर जोर दे रहा है

पीएम मोदी ने कहा कि इसके लिए भारत Basics पर जोर दे रहा है। आप सभी से बेहतर ये कौन जानता है कि Scientific Temper develop करने के लिए बचपन से बेहतर समय क्या हो सकता है। आज भारत के Education System में Structural Reforms किए जा रहे हैं, ताकि किताबी ज्ञान से आगे निकलकर Spirit of enquiry को बढ़ावा मिले। 3 दशक के लंबे समय के बाद देश को National Education Policy मिल चुकी है। इस policy से Education Sector का focus ही बदल गया है।

पहले Outlays पर focus था अब Outcomes पर

उन्होंने कहा कि पहले Outlays पर focus था अब Outcomes पर है। पहले Textbook की पढ़ाई पर focus था, अब Research और Application पर है। नई National Education Policy एक ऐसा माहौल देश में बनाने पर भी focus कर रही है जिससे Top Quality Teachers का एक Pool देश में तैयार हो सके। ये approach हमारे नए और उभरते Scientists को भी मदद करेगी, Encourage करेगी।

स्कूलों में साइंस से जुड़ा Infrastructure बेहतर

प्रधानमन्त्री ने शिक्षा में बड़े बदलाव की वकालत करते हुए कहा कि Education Sector में जो ये बदलाव किए जा रहे हैं, इनको Complement करने के लिए Atal Innovation Mission भी शुरु किया गया है। ये मिशन Enquiry को, Enterprise को, Innovation को एक प्रकार से Celebrate करता है। इसके तहत देशभर के अनेक स्कूलों में Atal Tinkering Labs तैयार किए जा रहे हैं, जो Innovation के नए Playgrounds सिद्ध हो रहे हैं। इन Labs से हमारे स्कूलों में साइंस से जुड़ा Infrastructure बेहतर हो रहा है। Higher Education में Atal Incubation Centres तैयार किए जा रहे हैं, ताकि देश में R&D से जुड़ा Ecosystem बेहतर हो। इसी तरह ज्यादा और बेहतर इंजीनियरिंग कॉलेज, ज्यादा IITs बनाने पर भी बल दिया जा रहा है।

Quality Research के लिए सरकार PMRFS

अनुसंधान की गुणवत्ता को लेकर उन्होंने कहा कि Quality Research के लिए सरकार Prime Minister’s Research Fellowship Scheme को भी चला रही है। इसका लक्ष्य है कि जो देश का Best Talent है, उसे अपनी पसंद की Research करने में और सुविधा मिले। देश की सभी IITs, सभी IISERs, बेंगलुरू के Indian Institute of Science और कुछ Central Universities और NITs में ये स्कीम Students को काफी आर्थिक मदद दे रही है। देश के अन्य recognised institute और University में पढ़ रहे छात्र-छात्राओं को इसका लाभ मिल सके, इसके लिए 6-7 महीने पहले Scheme में कुछ बदलाव भी किए गए है।

Trust और Collaboration पर देश में हो रहा काम

अपने संबोधन में उन्होंने बताया कि बीते कुछ महीनों से मेरी अनेक Scientists से चर्चा हुई है। हाल में ही भारत ने वैभव Summit भी Host की है। महीनेभर चली इस Summit में पूरी दुनिया से भारतीय मूल के वैज्ञानिकों और researchers को एक मंच पर इकट्ठा किया गया। इसमें करीब 23 हज़ार साथियों ने हिस्सा लिया। 700 घंटों से भी ज्यादा की Discussions हुई। मेरी भी अनेकों Scientists से बातचीत हुई। इस बातचीत में ज्यादातर ने दो चीजों पर बल दिया। ये दो बातें हैं- Trust और Collaboration. देश आज इसी दिशा में काम कर रहा है।

भारत में अभाव और प्रभाव की खाई को भरने का एक बड़ा Bridge

प्रधानमन्त्री मोदी ने बल देते हुए कहा कि Science और Technology तब तक अधूरी है, जब तक इसका Benefit और Access हर किसी के लिए संभव ना हो। बीते 6 साल में युवाओं को अवसरों से कनेक्ट करने के लिए देश में Science and Technology के उपयोग का विस्तार किया है। Science and Technology अब भारत में अभाव और प्रभाव की खाई को भरने का एक बड़ा Bridge बन रही है। इसकी मदद से पहली बार गरीब से गरीब को भी सरकार के साथ, सिस्टम के साथ सीधा जोड़ा है। Digital Technology से सामान्य भारतीय को ताकत भी दी है और सरकारी सहायता की सीधी, तेज़ Delivery का भरोसा भी दिया है। आज गांव में Internet Users की संख्या शहरों से ज्यादा हो चुकी है। गाँव का गरीब किसान भी digital payment कर रहा है! आज भारत की एक बड़ी आबादी Smartphone आधारित apps से जुड़ चुकी है। आज भारत Global High-tech Power के Evolution और Revolution, दोनों का centre बन रहा है।

High-tech Solutions बनाने और अपनाने के लिए तत्पर

जनसामान्य तक मूलभूत सुविधाओं को आसानी से पहुंचाने के लिए तकनीक के विकास की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि भारत अब विश्व स्तरीय शिक्षा, स्वास्थ्य, connectivity, गरीब से गरीब तक, गांव-गांव तक पहुंचाने के लिए High-tech Solutions बनाने और अपनाने के लिए तत्पर है। भारत के पास High-tech Highway के लिए Data, Demography, Demand और इन सबको संभालने के लिए, संतुलन और संरक्षण देने के लिए Democracy भी है। इसलिए दुनिया आज भारत पर इतना भरोसा कर रही है।

Digital India अभियान का और विस्तार

सरकारी तौर पर उठाये गए कदमों की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि हाल में Digital India अभियान का और विस्तार करने के लिए PM-Wani Scheme की शुरुआत की गई है। इससे पूरे देश में public space में, सबके लिए, quality Wi-Fi connectivity संभव हो जाएगी। इसका सीधा लाभ Science को भी होगा क्योंकि देश के गांव का युवा भी दुनिया की best scientific knowledge को आसानी से हासिल कर पाएगा। उन्होंने कहा कि हमारे देश में Water Scarcity, Pollution, Soil Quality, Food Security जैसी अनेक चुनौतियां हैं जिनका आधुनिक हल Science के पास है। हमारे समंदर में जो Water, Energy और Food का खजाना है, उसे तेजी से Explore करने में भी Science की बड़ी भूमिका है। जिस तरह हमने Space के sector में सफलता पाई, वैसे ही हमें Deep Sea के क्षेत्र में भी सफलता पानी है। भारत इसके लिए Deep Ocean Mission भी चला रहा है।

इसका लाभ हमें Commerce में, व्यापार-कारोबार में भी

पीएम ने आर्थिक गतिविधियों में तकनीक के प्रयोग को भी रेखांकित किया. उन्होंने कहा कि Science में जो कुछ हम नया हासिल कर रहे हैं इसका लाभ हमें Commerce में, व्यापार-कारोबार में भी होगा। अब जैसे Space Sector में reforms किए गए हैं। इससे हम अपने युवाओं को, देश के Private Sector को भी आसमान ही नहीं असीम अंतरिक्ष की बुलंदियां छूने के लिए Encourage कर रहे हैं। जो नई Production Linked Incentive Scheme है, इसमें भी Science और Technology से जुड़े sectors पर focus रखा गया है। ऐसे कदमों से Scientific Community को बल मिलेगा, Science और Technology से जुड़ा Ecosystem बेहतर होगा। इससे innovation के लिए ज्यादा Resources Generate होंगे। इससे साइंस और इंडस्ट्री के बीच पार्टनर्शिप का एक नया कल्चर तैयार होगा। चाहे Hydrogen Economy हो, Blue Economy हो, या फिर Artificial Intelligence का उपयोग हो, नए Collaborations से नए रास्ते निकलेंगे। मुझे विश्वास है कि ये Festival, Science और Industry के बीच Spirit of Coordination और Collaboration को नए आयाम देगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You cannot copy content of this page
%d bloggers like this: