मोदी सरकार ने 30.67 लाख केंद्रीय कर्मचारियों को दिया त्योहार का बोनस तोहफा, केबिनेट में कई बड़े फैसले लिये

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सुभाष चंद्र चौधरी/संपादक

नई दिल्ली। केंद्रीय सूचना प्रसारण व पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावरेकड़ ने आज केबिनेट की बैठक में लिए गए निर्णयों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि विजयदशमी या दुर्गा पूजा के पहले ही केंद्र सरकार के 30.67 लाख नॉन गैजेटेड कर्मचारियों को 3737 करोड़ के बोनस का भुगतान किया जाएगा। यह बोनस डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर के माध्यम से तत्काल दिया जाएगा। इससे बाजार में मांग बढ़ेगी और फेस्टिवल सीजन में मध्यम वर्ग के हाथ में पैसा होगा।

उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने साल 2019-2020 के लिए उत्पादकता से जुड़े बोनस भुगतान करने को अपनी मंजूरी प्रदान कर दी है। इससे रेलवे, डाक, रक्षा, ईपीएफओ, ईएसआईसी, इत्यादि जैसे व्यवसायिक प्रतिष्ठानों के 16.97 लाख अराजपत्रित कर्मचारी लाभान्वित होंगे और वित्तीय भार 2,791 करोड़ रुपया होगा।

गैर-पीएलबी या एडहॉक बोनस अराजपत्रित केन्द्रीय कर्मचारियों को दिया जाएगा। इससे 13.70 लाख कर्मचारियों को लाभ मिलेगा और जिसका वित्तीय भार 946 करोड़ रुपया होगा।

बोनस की घोषणा से कुल 30.67 लाख कर्मचारियों को लाभ मिलेगा और कुल वित्तीय भार 3,737 करोड़ रुपया होगा।

उल्लेखनीय है कि पिछले साल अराजपत्रित कर्मचारियों को उनके प्रदर्शन के लिए बोनस का भुगतान आमतौर पर दुर्गा पूजा /दशहरा से पहले कर दिया जाता था। सरकार अपने अराजपत्रित कर्मचारियों के लिए उत्पादकता से जुड़े बोनस (पीएलबी) और एडहॉक बोनस के तत्काल भुगतान की घोषणा कर रही है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में कैबिनेट में आज लिए गए निर्णय के अनुसार केंद्र सरकार के कमर्शियल इस्टैब्लिशमेंट के 17 लाख नॉन गजटेड कर्मियों को 2971 करोड़ जबकि केंद्र सरकार के कार्यालयों में कार्यरत 13 लाख कर्मियों को 906 करोड़ रुपये बोनस के रूप में जारी किए जाएंगे। उनका कहना था कि इससे देश की आर्थिक व्यवस्था को गति मिलेगी क्योंकि बाजार में मांग बढ़ेगी। उल्लेखनीय है कि कमर्शियल इस्टैब्लिशमेंट में रेलवे, ईएसआई, ईपीएफओ और रक्षा उत्पादन जैसे संस्थान शामिल हैं। उनका कहना था कि इस सप्ताह में 30 लाख कर्मचारियों के हाथ में 3737 करोड़ रुपये और होंगे जिससे बाजार को बल मिलेगा। त्योहार के मौसम में माध्यम वर्ग के हाथ में पैसे आएंगे।

उन्होंने कहा कि कैबिनेट ने जम्मू-कश्मीर पंचायती राज अधिनियम, 1989 को लागू करने का फैसला लिया है। इसके तहत वहाँ पर त्रिस्तरीय पंचायत व्यवस्था स्थापित हो पाएगी। इस फैसले से देश के अन्य हिस्सों की तरह जम्मू-कश्मीर में भी जमीनी स्तर पर लोकतंत्र के तीनों स्तरों को स्थापित करने में मदद मिलेगी। साथ ही इस व्यवस्था से जम्मू एवं कश्मीर में ग्रामीण स्तर पर विकास को बढ़ावा मिलेगा क्योंकि पंचायती राज के प्रतिनिधियों को भी अधिकार मिलेंगे।

उन्होंने प्रेस वार्ता में जानकारी दी कि जनकल्याण के कई कानून जम्मू कश्मीर में अब लागू किए जा रहे हैं गत 16 अक्टूबर को ही त्रिस्तरीय पंचायत व्यवस्था लागू की गई जिससे अब तक उस राज्य को वंचित रखा गया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई आज कैबिनेट की बैठक में उस निर्णय पर मुहर लगा दी और अब ग्राम पंचायत, ब्लॉक पंचायत और जिला परिषद के सीधे चुनाव कराए जाएंगे। केंद्रीय मंत्री जावड़ेकर का कहना था कि इस कानून के लागू होने के बाद अब जम्मू कश्मीर में भी जिला परिषद अपने जिले की विकास की योजना तैयार कर सकेगी और उन्हें वित्तीय एवं अन्य अधिकार उसी तरह से मिलेंगे जिस तरह से देश के अन्य राज्यों में लागू किए गए हैं।

श्री जावड़ेकर ने स्पष्ट किया कि अब जम्मू कश्मीर में त्रिस्तरीय पंचायत व्यवस्था लागू हो जाएगी और इसके लिए शीघ्र ही चुनाव कराए जाएंगे ।उनका कहना था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जम्मू कश्मीर में और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी संसद में यह व्यवस्था जम्मू कश्मीर में लागू कराने का आश्वासन दिया था। उन्होंने कहा कि इससे त्रिस्तरीय पंचायत व्यवस्था मजबूत होगी और लोगों के हाथ में सत्ता आएगी। कश्मीर में सत्ता आम लोगों के पास नहीं थी बल्कि कुछ परिवारों तक सीमित थी लेकिन अब इससे आम जनता को सत्ता में भागीदारी मिलेगी।

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने पिछले सत्र यानी 2019-20 में जिस तरह से जम्मू कश्मीर में नियम और शर्तों का पालन किया गया था उसी तरह वर्तमान सत्र यानी 2020-21 में भी जम्मू एवं कश्मीर (जेएंडके) में सेब खरीद के लिए मार्केट इंटरवेंशन स्कीम के विस्तार को मंजूरी दे दी है।

सेब की खरीद केंद्रीय खरीद एजेंसी यानी राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ लिमिटेड (नैफेड) द्वारा राज्य नामित एजेंसी योजना और विपणन निदेशालय, बागवानी और जम्मू और कश्मीर बागवानी प्रसंस्करण और विपणन निगम (जेकेएचपीएमसी) के माध्यम से जम्मू एवं कश्मीर के सेब किसानों से सीधे की जाएगी और प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटी) के माध्यम से भुगतान किया जाएगा। इस योजना के तहत 12 लाख मीट्रिक टन सेब खरीदे जा सकते हैं।

सरकार ने नैफेड को इस अभियान के लिए 2,500 करोड़ रुपये की सरकारी गारंटी उपयोग करने की भी अनुमति दी है। इस अभियान में अगर कोई नुकसान होता है तो उसे 50:50 के आधार पर केंद्र सरकार और जम्मू एवं कश्मीर के केन्द्र शासित प्रदेश प्रशासन के बीच साझा किया जाएगा।

पिछले सत्र में गठित नामित मूल्य समिति को इस सीजन के लिए भी सेब के विभिन्न प्रकार और सेब के ग्रेड की कीमत निर्धारण के लिए जारी रखा जाएगा। जम्मू कश्मीर का केन्द्र शासित प्रशासन निर्दिष्ट मंडियों में मूलभूत सुविधाओं का प्रावधान सुनिश्चित करेगा।

खरीद प्रक्रिया के सुचारू और निरंतर कार्यान्वयन की निगरानी केंद्रीय स्तर पर कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता में गठित निगरानी समिति द्वारा की जाएगी और केन्द्र शासित स्तर पर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में कार्यान्वयन और समन्वय समिति का गठन किया जाएगा।

भारत सरकार की यह घोषणा सेब उत्पादकों को एक प्रभावी विपणन मंच प्रदान करेगी और स्थानीय लोगों के लिए रोजगार सृजन की सुविधा मुहैया कराएगी। यह सेब के लिए पारिश्रमिक की कीमतें सुनिश्चित करेगा जिसके कारण जम्मू एवं कश्मीर में किसानों की समग्र आय में वृद्धि होगी।

केंद्रीय मंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में आज इंस्‍टीट्यूट ऑफ चार्टेर्ड एकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (आईसीएआई) और मलेशियन इं‍स्‍टीट्यूट ऑफ सर्टिफाइड पब्लिक एकाउंटेंट्स (एमआईसीपीए) के बीच परस्‍पर मान्‍यता समझौते को भी मंजूरी दी गई। इससे इन दोनों संस्‍थानों में से किसी भी एक के योग्‍य चार्टेर्ड एकाउंटेंट्स सदस्‍यों को अपनी मौजूदा एकाउंटेंसी योग्‍यता के समुचित अंकों के आधार पर दूसरे इं‍स्‍टीट्यूट में दाखिला लेने का मौका मिलेगा।    

लागू करने की रणनीति और लक्ष्‍य:

आईसीएआई और एमआईसीपीए एक दूसरे की योग्‍यता को मान्‍यता देने के लिए परस्‍पर समझौता करेंगे। वे एक दूसरे के समुचित तौर पर योग्‍य सदस्‍यों को परीक्षा के विशिष्‍ट मॉड्यूल और तय आधार पर अपने यहां दाखिला देंगे। इस प्रस्‍तावित समझौता ज्ञापन में इन दोनों व्‍यावसायिक संस्‍थानों के उन चार्टेर्ड एकाउंटेंट सदस्‍यों को शामिल किया जाएगा, जिन्‍होंने शिक्षा, परीक्षा, नैतिक व्‍यवहार और व्‍यावहारिक अभ्‍यास समेत इन दोनों संस्‍थानों की सदस्‍यता अनिवार्यताओं को पूर्ण कर लिया है। आईसीएआई और एमआईसीपीए दोनों अपनी योग्‍यता/दाखिला अनिवार्यता, सतत पेशेवर विकास (कंटीन्‍यूइंग प्रोफेशनल डेवलपमेंट –सीपीडी) नीति, रियायतें और किसी भी अन्‍य प्रासंगिक मामले में हुए बदलावों की जानकारी देंगे।

प्रमुख प्रभाव:

आईसीएआई एशिया प्रशांत क्षेत्र में स्थित संस्‍थानों के साथ द्विपक्षीय सहयोग स्‍थापित करने की मंशा रखता है इसलिए वह एमआईसीपीए के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्‍ताक्षर करना चाहता है। इस वैश्विक माहौल में एकाउंटेंसी के पेशे के सामने मौजूद नई चुनौतियों का मुकाबला करने के अवसर का लाभ उठाकर ये दोनों एकाउंटेंसी संस्‍थान नेतृत्‍वकारी भूमिका निभा सकते हैं। इन दोनों नियामक संस्‍थानों के बीच औपचारिक समझौते से दोनों ओर के एकाउंटेंसी समुदाय के बीच बेहतर सामंजस्‍य और व्‍यापक स्‍वीकार्यता में वृद्धि होगी तथा अधिक व्‍यावसायिक अवसरों के विकास का रास्‍ता प्रशस्‍त होगा।

पृष्‍ठभूमि:

इंस्‍टीट्यूट ऑफ चार्टेर्ड एकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया एक वैधानिक निकाय है, जिसे ‘द चार्टेर्ड एकाउंटेंट्स एक्‍ट 1949’ के तहत स्‍थापित किया गया था। इसका कार्य भारत में चार्टेर्ड एकाउंटेंसी के व्‍यवसाय का नियमन करना है। मलेशियन इं‍स्‍टीट्यूट ऑफ सर्टिफाइड पब्लिक एकाउंटेंट्स कंपनी, मलेशिया के कंपनीज एक्‍ट 1965 के तहत काम करती है।    

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