भारतीय वैज्ञानिकों ने मोतियाबिंद की सरल, सस्ती और बिना ऑपरेशन के इलाज की तकनीक विकसित की

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नई दिल्ली :  मोतियाबिंद अंधेपन का एक प्रमुख रूप है जो तब होता है जब हमारी आंखों में लेंस बनाने वाले क्रिस्टलीय प्रोटीन की संरचना बिगड़ जाती है, जिससे क्षतिग्रस्त या अव्यवस्थित प्रोटीन एकत्र होकर एक और नीली या भूरी परत बनाते हैं, जो अंततः लेंस की पारदर्शिता को प्रभावित करता है। इस प्रकार, इन समुच्चयों के गठन के साथ-साथ रोग की प्रगति के प्रारंभिक चरण में रोकना मोतियाबिंद की एक प्रमुख उपचार रणनीति है, और इस कार्य के लिए सामग्री मोतियाबिंद की रोकथाम को सस्ती और सुलभ बना सकती है।

भारत सरकार के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के अंतर्गत आने वाले एक स्वायत्त संस्थान नैनो विज्ञान और प्रौद्योगिकी संस्थान (आईएनएसटी) के वैज्ञानिकों की एक टीम ने गैर-स्टेरॉयडल एंटी-इंफ्लेमेटरी ड्रग (गैर-दाहक या उत्तजेक दवा)-एनएसएआईडी एस्पिरिन से नैनोरोड विकसित किया है, जो एक लोकप्रिय दवा है जिसका उपयोग दर्द, बुखार, या सूजन को कम करने के लिए किया जाता है और यह मोतियाबिंद के खिलाफ एक प्रभावी गैर-आक्रामक छोटे अणु-आधारित नैनोथेरेप्यूटिक्स के रूप में भी पाया गया।

जर्नल ऑफ मैटेरियल्स केमिस्ट्री बी में प्रकाशित उनका शोध एक सस्ते और कम जटिल तरीके से मोतियाबिंद को रोकने में मदद कर सकता है। उन्होंने स्व-निर्माण की एंटी-एग्रीगेशन क्षमता का उपयोग मोतियाबिंद के खिलाफ एक प्रभावी गैर-प्रमुख छोटे अणु-आधारित नैनोटेराप्यूटिक्स के रूप में किया है। एस्पिरिन नैनोरोड क्रिस्टलीय प्रोटीन और इसके विखंडन से प्राप्त विभिन्न पेप्टाइड्स के एकत्रीकरण को रोकता है, जो मोतियाबिंद बनने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वे जैव-आणविक संबंधों के माध्यम से प्रोटीन/पेप्टाइड के एकत्रीकरण को रोकते हैं, जो बीटा-टर्न जैसे क्रिस्टलीय पेप्टाइड्स की संरचना में बदल देते हैं, जो कॉइल्स (लच्छे) और कुंडल में अमाइलॉइड बनने के लिए जिम्मेदार होते हैं। ये क्रिस्टलीन, और क्रिस्टलीन व्युत्पन्न पेप्टाइड समुच्चय के एकत्रीकरण को रोककर मोतियाबिंद बनने में रोकने के लिए पाए गए थे। उम्र बढ़ने के साथ और विभिन्न परिस्थितियों में, लेंस प्रोटीन क्रिस्टलीन समुच्चय नेत्र लेंस में अपारदर्शी संरचनाओं का निर्माण करता है, जो दृष्टि को बाधित करता है और बाद में मोतियाबिंद का कारण भी बनता है।

संचित अल्फा-क्रिस्टलीन प्रोटीन और क्रिस्टलीन व्युत्पन्न पेप्टाइड समुच्चय वृद्ध और मोतियाबिंद मानव लेंस में लक्षित असहमति को मोतियाबिंद बनने की रोकथाम के लिए एक व्यवहार्य चिकित्सीय रणनीति माना जाता है। एस्पिरिन नैनोरोड्स आणविक स्व-जमा होने की प्रक्रिया का उपयोग करके उत्पादित किए जाते हैं, जो आम तौर पर नैनोकणों के संश्लेषण के लिए उपयोग किए जाने वाले उच्च लागत और श्रमसाध्य भौतिक तरीकों की तुलना में एस्पिरिन नैनोरोड उत्पन्न करने के लिए कम लागत और उच्च-स्तरीय तकनीक से होता है।

आणविक गतिकी (एमडी) अनुकरण पर आधारित कम्प्यूटेशनल अध्ययन एस्पिरिन के एंटी-एग्रीगेशन व्यवहार और आणविक पेप्टाइड्स और एस्पिरिन के बीच प्रोटीन (पेप्टाइड) की प्रकृति के आणविक तंत्र की जांच करने के लिए किए गए थे। यह देखा गया कि पेप्टाइड-एस्पिरिन (अवरोधक) अंतःक्रियाओं ने पेप्टाइड्स को द्वितीयक संरचनाओं को बीटा-टर्न से बदल दिया, जो एमाइलॉयड्स बनने के लिए जिम्मेदार हैं, विभिन्न कॉइल्स (लच्छे) और कुंडल (हेलिक्स) में, इसके एकत्रीकरण को भी रोकते हैं। इस अनुकरण ने एस्पिरिन के मॉडल मोतियाबिंद पेप्टाइड्स द्वारा अमाइलॉइड जैसे फाइब्रिल गठन के लिए एक संभावित अवरोधक के रूप में कार्य करने की क्षमता को उजागर किया है।

कई प्राकृतिक यौगिकों को पहले ही क्रिस्टलीन एकत्रीकरण के लिए संभावित एकत्रीकरण अवरोधक के रूप में चिह्नित किया गया है, लेकिन इस दिशा में गैर-स्टेरॉयडल एंटी-इंफ्लेमेटरी ड्रग (गैर-दाहक या उत्तजेक दवा)-एनएसएआईडी जैसे एस्पिरिन उपयोगिता एक नया प्रतिमान भी स्थापित करेगी। इसके अलावा, अपने नैनो-आकार के कारण एस्पिरिन नैनोरोड्स जैव उपलब्धता, दवा की गुणवत्ता, कम विषाक्तता आदि में सुधार करेंगे। इसलिए, आई-ड्रॉप के रूप में एस्पिरिन नैनोरोड्स मोतियाबिंद के इलाज के लिए एक प्रभावी और व्यवहार्य विकल्प के रूप में कार्य करने वाला है।

प्रयोग करने में आसान और कम लागत वाले इस वैकल्पिक उपचार पद्धति से विकासशील देशों में उन रोगियों को लाभ होगा जो मोतियाबिंद के महंगे उपचार और शल्यचिकित्सा का खर्च वहन नहीं कर सकते।

 

(प्रकाशन विवरण:

बिष्टए.शर्माएम.शर्माएस.अलीएम. ई.और पांडाजे.जे. (2019)। अल्फा-क्रिस्टलीन-व्युत्पन्न पेप्टाइड समुच्चय के प्रति एंटी-एग्रीगेशन एजेंटों के रूप में करियर-मुक्त स्व-निर्मित एस्पिरिन नैनोरोड्स: गैर-आक्रामक मोतियाबिंद चिकित्सा में संभावित निहितार्थ। जर्नल ऑफ मैटेरियल्स केमिस्ट्री बी, 7 (44), 6945-6954

अधिक जानकारी के लिएडॉ. जीवन ज्योति पांडा (jyoti@inst.ac.in) से संपर्क किया जा सकता है।)

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