प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लेह से चीन को ललकारा : विस्तारवाद वाली ताकतें मिट गई हैं

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लेह। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज लेह के नीमू में सेना के जवानों को संबोधित करते हुए चीन पर अप्रत्यक्ष लेकिन करारा हमला बोला। उन्होंने चीन की विस्तारवाद की नीति की तीखी आलोचना की और किसी का नाम लिए विना कहा कि विस्तारवाद ने मानवता का विनाश करने का प्रयास किया है। विस्तारवाद की जिद्द जब किसी पर सवार हो गई उसने हमेशा विश्व शांति के सामने खतरा पैदा किया। उन्होंने कहा कि हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि इतिहास गवाह है ऐसी ताकतें मिट गई हैं या मुड़ने के लिए मजबूर हो गई है। विश्व का हमेशा यही अनुभव रहा है और इसी अनुभव के आधार पर अब इस बार फिर से पूरे विश्व ने विस्तारवाद के खिलाफ मन बना लिया है। आज विश्व विकासवाद को समर्पित है और विकास की खुली स्पर्धा का स्वागत करता है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लेह में सेना के जवानों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि जवानों का शौर्य, समर्पण अतुलनीय है। जवानों की इच्छाशक्ति पहाड़ों जैसी मजबूत है। देश की रक्षा जवानों के मजबूत हाथों और इरादों में है। मैं ही नहीं देश भी पूरा निश्चिंत है। पूरे देश को आप पर अद्भुत विश्वास है। लेह में जवानों के बीच पीएम मोदी का संबोधन बेहद उत्साहवर्धक रहा।

उन्होंने कहा कि जवानों का शौर्य समर्पण अतुलनीय है। आपकी भुजाएं चट्टानों से ज्यादा मजबूत हैं। भारतीय जवानों की वीरता दुनिया में किसी से कम नहीं। कठिन ऊंचाई में जवान मां भारती की ढाल बने हुए हैं। जवानों ने जो वीरता दिखाई उससे पूरी दुनिया में संदेश गया है। पीएम ने कहा कि मैं गलवान घाटी में शहीद हुए अपने वीर जवानों को भी पुनः श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं और मैं आज आपकी सराहना करता हूं।

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पीएम ने रामधारी सिंह दिनकर की कविता की पंक्ति के सहारे भारतीय सेना का उत्साहवर्धन किया। उन्होंने उनकी गाथा का गान किया । उन शहीद हुए जवानों को याद करते हुए कहा कि उनके सिंहनाद से आज भी धरती गुंजायमान है । आज हर भारतीय की छाती आपकी वीरता और पराक्रम से फूली हुई है । पीएम ने कहा कि मैं जवानों की जय और अभिनंदन करता हूं । यह धरती पुण्य हुई है। वीर सपूतों के शौर्य और पराक्रम की गाथाओं को यह धरती अपने आप में समेटे हुए हैं। लेह लद्दाख से लेकर करगिल और सियाचिन तक , बर्फीली चोटियों से लेकर गलवान घाटी के ठंडे पानी की धारा तक हर चोटी, हर पहाड़ ,हर जर्रा जर्रा ,हर कंकर पत्थर, भारतीय सैनिकों के पराक्रम की गवाही देते हैं ।

आपने जो जवाबी कार्रवाई की उसे दुनिया ने आज देखा है जाना है। आपकी शौर्य गाथाएं घर-घर में गूंज रही है और भारत माता ने आपकी आपकी फायर और फ्यूरी भी देखी है। आपका मकसद 130 करोड़ भारतीयों के मान सम्मान का प्रतीक है। यह लद्दाख, यह धरती, भारत के लिए हमेशा सर्वस्व त्याग करने वाले राष्ट्र भक्तों की धरती है।

उन्होंने कहा कि यहां अलगाव पैदा करने की हर साजिश को लद्दाख की जनता ने नकारा है। गलवान घाटी हमारी है। आज देश के प्रत्येक लोग हर स्तर पर चाहे वह सेना हो या सामान्य नागरिक के कर्तव्य, राष्ट्र को सशक्त करने के लिए अद्भुत योगदान दे रहे हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि वीर अपने शस्त्र की ताकत से ही भारतीय मातृभूमि की रक्षा करते हैं। यह धरती वीर भोग्या है। वीरों के लिए है। इसकी रक्षा सुरक्षा के लिए हमारा संकल्प हिमालय जितना ही ऊंचा है । वह संकल्प इस समय मैं आपकी आंखों में देख सकता हूं। आपके चेहरे पर साफ साफ यह संकल्प नजर आता है। आप उसी धरती के वीर है जिसमें हजारों वर्षों से अनेकों आक्रांताओं के हमले को अत्याचारों का मुंह तोड़ जवाब दिया है। यह हमारी पहचान है। हम वह लोग हैं जो बांसुरी धारी कृष्ण की पूजा करते हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चीन का नाम लिए विना ललकारते हुए कहा कि वीरता ही शांति की प्रमाणिकता है। भारत अपनी ताकत बढ़ा रहा है। उन्होंने कहा कि मानवता के लिए शांति और मित्रता जरूरी है। निर्बल कभी शांति नहीं ला सकते। प्रधानमंत्री ने साफ शब्दों में कहा कि विस्तारवाद का युग समाप्त हो चुका है। यह विकासवाद का युग है। तेजी से बदलते हुए समय में विकासवाद ही प्रासंगिक है। विकासवाद के लिए ही अवसर है और विकासवाद ही भविष्य का आधार भी है। पिछली शताब्दियों ने विस्तारवाद ने ही मानवता का सबसे ज्यादा अहित किया ।

उन्होंने उन देशों का नाम लिए विना कहा कि विस्तारवाद ने मानवता को विनाश करने का प्रयास किया। विस्तारवाद की जिद्द जब किसी पर सवार हो गई उसने हमेशा विश्व शांति के सामने खतरा पैदा किया। उन्होंने कहा कि हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि इतिहास गवाह है ऐसी ताकतें मिट गई हैं या मुड़ने के लिए मजबूर हो गई है। विश्व का हमेशा यही अनुभव रहा है और इसी अनुभव के आधार पर अब इस बार फिर से पूरे विश्व ने विस्तारवाद के खिलाफ मन बना लिया है। आज विश्व विकासवाद को समर्पित है और विकास की खुली स्पर्धा का स्वागत करता है।

प्रधान मंत्री ने कहा कि जब जब मैं राष्ट्र रक्षा से जुड़े किसी निर्णय के बारे में सोचता हूं मैं सबसे पहले दो माताओं का स्मरण करता हूं । पहली हम सभी की भारत माता और दूसरी वह वीर माताएं जिन्होंने आप जैसे पराक्रमी योद्धाओं को जन्म दिया है। मेरे निर्णय की कसौटी यही है इसी कसौटी पर चलते हुए आपके सम्मान आपके परिवार के सम्मान और भारत माता की सुरक्षा को देश सर्वोच्च प्राथमिकता देता है। सेनाओं के लिए आधुनिक हथियार हो यह आपके लिए जरूरी साजो सामान इन सभी पर हम बहुत ध्यान देते रहे हैं । अब देश में बॉर्डर इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च करीब करीब 3 गुना बढ़ा दिया गया है। इससे बॉर्डर एरिया डेवलपमेंट और सीमा पर सड़कें , पुल बनाने का काम भी बहुत तेजी से हुआ है । इसका एक दूसरा लाभ यह भी हुआ है कि अब आप तक सामान भी कम समय में पहुंच जाता है ।

प्रधानमंत्री ने कहा कि सेनाओं में बेहतर समन्वय के लिए चीफ ऑफ स्टाफ के गठन की बात हो या नेशनल वॉर मेमोरियल का निर्माण, वन रैंक वन पेंशन का फैसला हो या फिर आपके परिवार की देखरेख से लेकर शिक्षा तक की सही व्यवस्था के लिए लगातार काम देश हर स्तर पर कर रहा है। हम अपनी सेनाओं सैनिकों को मजबूत कर रहै है। उन्होंने गौतम बुद्ध की उक्ति को याद करते हुए कहा कि साहस का संबंध प्रतिबद्धता से है , करुणा से है। साहस कम्पेशन है, साहस वह है जो सत्य के पथ में खड़े होना सिखाएं । साहस वह है जो हमें सही को सही कहने करने की ऊर्जा देता है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि देश के वीर सपूतों ने गलवान घाटी में जो अदम्य साहस दिखाया वह पराक्रम की पराकाष्ठा है। देश को आप पर गर्व है। आप पर नाज है ।आपके साथ ही आइटीबीपी के जवान हो, बीएसएफ के साथी हो, मुश्किल हालात में काम कर रहे हैं । इंजीनियर हो, श्रमिक हो, आप सभी देश के लिए काम कर रहे हैं । हर कोई कंधे से कंधा मिलाकर मां भारती की रक्षा के लिए सेवा में समर्पित है।

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