हरियाणा के भू-संपदा अपीलीय न्यायाधिकरण में 1 जून से शुरू होगी सुनवाई

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चंडीगढ़, 28 मई :  नोवल कोरोना वायरस (कोविड-19) वैश्विक महामारी के चलते वर्तमान में उत्पन्न हुई स्थिति के मद्देनजर हरियाणा भू-संपदा अपीलीय न्यायाधिकरण ने अधिवक्ताओं, कर्मचारियों और वादियों की सुरक्षा को सुनिश्चित रखने के मद्देनजर आगामी 1 जून, 2020 से अगले आदेशों तक विभिन्न व्यवस्थाओं के अनुसार कार्यदिवसों पर न्यायाधिकरण के कार्य का संचालन करने का निर्णय लिया है।

         इस संबंध में जानकारी देते हुए न्यायाधिकरण के एक प्रवक्ता ने बताया कि इस बारे में न्यायाधिकरण के चेयरमैन ने एक कार्यालय आदेश जारी किया हैं।

उन्होंने बताया कि सभी प्रकार के मामले, जिनमें तात्कालिकता है, न्यायाधिकरण द्वारा विचार किया जाएगा।  हालाँकि, तात्कालिकता के विषय में निर्णय न्यायाधिकरण द्वारा लिया जाएगा और इसकी मैनशनिंग न्यायाधिकरण की आधिकारिक वेबसाइट पर की जाएगी।

         अपीलों की सुनवाई के संबंध में जानकारी देते हुए प्रवक्ता ने बताया कि मामलों की सुनवाई वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से सॉफ्टवेयर ‘वैबैक्स’ के माध्यम से ही आयोजित की जाएगी। हालांकि, तकनीकी विफलता के मामले में, सुनवाई ‘वटसअप्प’ या ‘गूगल डुओ’ के माध्यम से  ट्रिब्यूनल की सुविधा के अनुसार वीडियो कॉल द्वारा आयोजित की जा सकता है वीडियो-कॉन्फ्रेंसिंग या वीडियो कॉलिंग में शामिल होना और डिस्कनेक्ट करना ट्रिब्यूनल के अधिकार में होगा।

         उन्होंने बताया कि संबंधित अधिवक्ता/वादी यह सुनिश्चित करेंगे कि वह वीडियो- कॉन्फ्रेंसिंग या वीडियो कॉल के माध्यम से प्रस्तुत होने वाले कमरे या स्थान को सभी प्रकार की अव्यवस्था/अशांति से मुक्त रखेंगें। न्यायाधिकरण के सम्मुख नियमित कार्यवाहियों के दौरान शिष्टाचार और प्रोटोकॉल के साथ न्यायिक कार्यवाहियां सुनिश्चित की जाएगी। जिस कमरे से वीडियो-कान्फ्रेंसिंग/वीडियो कॉल सुविधा के माध्यम से वादी/अधिवक्ता प्रस्तुत हो रहे हैं, वहां पर अधिवक्ता/वादी के अलावा किसी और व्यक्ति को अनुमति नहीं होगी।

         प्रवक्ता ने बताया कि न्यायाधिकरण अपने कोर्ट-रूम या चैम्बर और लर्नड काऊंसल/पार्टी/एडवोकेट जनरल इत्यादि से वीडियो कान्फे्रंसिंग आयोजित करेगा।  स्वास्थ्य की सुरक्षा के उद्देश्य के लिए नोवल कोरोना वायरस (कोविड-19) से उत्पन्न हुई स्थिति में सभी अधिवक्ताओं को सहयोग देने का आग्रह किया गया है। उन्होंने बताया कि वीडियो कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से तर्क-वितर्क के दौरान अधिवक्ताओं/वादियों को सही तरीके से डेऊस पहनने की सलाह दी गई हैं। इसके अलावा, न्यायाधिकरण के भवन में बिना मास्क पहने किसी भी व्यक्ति को प्रवेश की अनुमति नहीं होगी और सरकार के नियमों के अनुसार सोशल डिस्टेंसिंग को बनाए रखा जाएगा।

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