ऑनलाइन शिक्षा व्यवस्था में सुधार के साथ रेगुलर प्राध्यापकों की भर्ती करें सरकार : प्रो. सुभाष सपड़ा

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-लाखों छात्र-छात्राओं का भविष्य दांव पर

-पूर्व कॉमर्स विभागाध्यक्ष ने एक्सटेंशन लेक्चरर भर्ती घोटाले की सीबीआई जांच की मांग की

गुरुग्राम, 22 मई। कोरोना वायरस के संक्रमण से बचने के लिए लागू किए गए लॉक डाउन के बाद पूरे प्रदेश के स्कूल कॉलेज पिछले 15 मार्च से बंद पड़े हैं। इसके चलते प्रदेश में लाखों छात्र-छात्राओं का भविष्य दांव पर लगा है, क्योंकि स्टूडेंट के सिलेबस भी अभी पूरे नहीं हुए थे। स्कूल-कॉलेजों के लिए यह लॉक डाउन और कितने दिन चलेंगे, इसकी कोई निश्चितता नहीं है। ऊपर से कोर्स पूरे करने के लिए उच्चतर शिक्षा विभाग द्वारा गंभीर प्रयास नहीं किए गए हैं।

गुरुग्राम के द्रोणाचार्य राजकीय महाविद्यालय के पूर्व कॉमर्स विभागाध्यक्ष व हरियाणा गवर्नमेंट कॉलेज टीचर एसोसिएशन के पूर्व प्रादेशिक उपाध्यक्ष प्रोफेसर सुभाष सपड़ा का कहना है कि प्रदेश के प्राइवेट कॉलेजों में आधुनिक व महंगी तकनीकी व्यवस्था होने के कारण स्टूडेंट्स को ऑन लाइन शिक्षा दी जा रही है, मगर प्रदेश के सरकारी कॉलेजो के पास ना तो आधुनिक तकनीक व्यवस्था है और ना ही पर्याप्त रेगुलर स्टाफ हैं। ऊपर से सरकारी कॉलेजों के छात्र-छात्राओं के पास निजी संसाधनों का अभाव है। इन कारणों से प्रदेश के सरकारी कॉलेजों में ऑन लाइन शिक्षा की योजना सफल नहीं हो पा रही है। प्रदेश सरकार की उच्चतर शिक्षा व्यवस्था चरमरा गई है। दूसरी तरफ सरकार लॉक डाउन में ऑन लाइन शिक्षा व्यवस्था पर लीपापोती कर रही है।

प्रो. सपड़ा बताते हैं कि प्रदेश में 157 सरकारी कॉलेजों में 3514 रेगुलर लेक्चरर वर्क कर रहे हैं, इसके अलावा करीब 1800 एक्सटेंशन लेक्चरर पर शिक्षा की जिम्मेवारी सौंप दी गई है। जिनकी भर्ती में पहले से ही घोटाले के आरोप लग रहे हैं। प्रो. सपड़ा का आरोप है कि कुछ एक्सटेंशन लेक्चरर अयोग्यता के कारण अपनी जिम्मेवारी निभाने में कमजोर साबित हो रहे हैं। चिंता की बात है कि प्रदेश के सरकारी कॉलेजों में दशकों से चल रही एजूसेट (एजुकेशनल सेटेलाइट) शिक्षा प्रणाली जिस पर करोड़ों रुपए खर्च किए गए थे, कुछ वर्ष पूर्व ही बंद कर दी गई थी। प्रदेश में करीब 68 कॉलेजों में प्राचार्यो के पद रिक्त पड़े हैं व एक-एक प्राचार्य को कई-कई कॉलेजों के प्राचार्यों की जिम्मेवारी सौंपी गई है। ऐसे में ऑन लाइन शिक्षा व्यवस्था में सुधार की आशा नहीं की जा सकती। सरकार की इन लापरवाहियों का खामियाजा प्रदेश के सरकारी कॉलेजों के लाखों छात्र-छात्राओं को भुगतना पड़ रहा है।

 

ऐसे में प्रो. सपड़ा का सरकार से आग्रह है कि सरकार एचपीएससी द्वारा स्वीकृत 2592 पदों पर तुरंत रेगुलर कॉलेज प्राध्यापकों की भर्ती करें, ऑनलाइन शिक्षा व्यवस्था सुधारें और पिछले कई वर्षों से प्रदेश में हुए एक्सटेंशन लेक्चरर भर्ती घोटाले की सीबीआई जांच करवाई जाए।

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