बिहार व मध्य प्रदेश के बाद अब गुरूग्राम से देश के उत्तर पूर्वी राज्यों को भेजी गई विशेष रेल

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-उत्तरपूर्वी राज्यों में शुक्रवार को पहली रेल गुवाहाटी-दीमापुर के लिए रवाना
– राज्य सरकार सकुशल पहुंचा रही है प्रवासी नागरिकों को उनके घर

गुरूग्राम, 22 मई। गुरूग्राम रेलवे स्टेशन से शुक्रवार को देश के उत्तरपूर्वी राज्यों को विशेष ट्रेन भेजनी शुरू की गई है और इस कड़ी में पहली ट्रेन गुरूग्राम से गुवाहाटी-दीमापुर के लिए रवाना हुई जिसमें 1400 प्रवासी नागरिक अपने घरों के लिए गए हैं। हरियाणा सरकार द्वारा उत्तरपूर्वी राज्यों के प्रवासी नागरिकों को लाॅकडाउन में घर पहुंचाने के लिए की गई रेल व्यवस्था से यात्री काफी खुश थे।

सभी प्रवासी नागरिकों की सकुशल घर वापसी की कामना करते हुए उन्हें वहां जाकर भी सोशल डिस्टेंसिंग की पालना करने के लिए प्रेरित किया गया। जिला प्रशासन के अमले ने जिस सामाजिक सद्भाव के साथ कार्य किया है, इससे देश प्रेम की भावना को बल मिला है। उनसे बातचीत के दौरान उन्हें बिमारी से बचाव के लिए शारीरिक दूरी बनाए रखने की अपील की गई और उन्हें सफर में रास्ते के लिए भोजन, बिस्किट, नमकीन, पानी आदि निःशुल्क दिया गया। यहां तक की उन्हें रेल यात्रा के लिए टिकट भी मुफत दी गई। इस व्यवस्था को देखकर उत्तरपूर्व भारत के लोग खुश तो थे ही , साथ में आश्चर्य भी जता रहे थे क्योंकि आज तक तो ऐसा पहले कभी हुआ नहीं। जब उन्हें टिकट तथा खाने का सामान निःशुल्क दिया जा रहा था तो वे जिला प्रशासन के कर्मियों को धन्यवाद करके खुशी जता रहे थे।

एक तरफ उन्हें अपने घर जाने की खुशी थी, वहीं दूसरी तरफ अपनी कर्मभूमि हरियाणा को छोड़कर जाने का मलाल भी था ।कई वर्षों तक गुरूग्राम तथा आस पास के शहरों में रहकर उन्होंने परिवार के लिए आजीविका के साधन जुटाए थे और दूर घरों में मौजूद परिवार के लोगों को भी पैसा कमाकर भेजा था।

बात करने पर आसाम जा रहे 40 वर्षीय गोपाल ने अपने भाव प्रकट करते हुए कहा कि हरियाणा ने उन्हें रोजगार दिया और स्थिति सामान्य होने के बाद वे दोबारा यहां आ सकते हैं क्योंकि यहां काम बहुत है और काम करके इतना पैसा जुटा लेते हैं जिससे अपना खर्च निकालकर घर पर भी पैसा भेज पाते हैं। नागालैंड जा रहे 22 वर्षीय एक यात्री तितुजो ने तो यहां तक कहा कि हरियाणा का गुरूग्राम शहर मुंबई की तरह सपने पूरे करने का शहर है, व्यक्ति की काम करने की इच्छा होनी चाहिए , यहां काम मिल जाता है। लाॅकडाउन से पहले स्थिति यह थी कि मुंबई की तरह गुरूग्राम भी कभी सोता नही था, यहां 24 घंटे काम चलता था।

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