राष्ट्रपति व उपराष्ट्रपति ने देशवासियों को राम नवमी की शुभाकामनाएं दी

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नई दिल्ली : देश के राष्ट्रपति , उपराष्ट्रपति ने देशवासियों को राम नवमी की शुभाकामनाएं दी.  राष्ट्रपति  रामनाथ कोविंद ने राम नवमी के अवसर पर अपने संदेश में कहा कि  “राम नवमी के पावन अवसर पर, मैं सभी देशवासियों को बधाई और शुभकामनाएं देता हूं।

उन्होंने कहा कि मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के जन्मोत्सव के रूप में मनाई जाने वाली रामनवमी, हमारे मेहनतकश किसानों के लिए नव-धान्य का भी अवसर होती है। श्रीराम का आदर्श जीवन हमें सदाचार, सहनशीलता, सहृदयता और मैत्री-भाव का संदेश देता है। अपने-अपने कर्तव्य पथ पर हमें इन शाश्वत जीवन-मूल्यों के प्रति सच्ची निष्ठा दर्शानी चाहिए।

राष्ट्रपति ने कहा कि आइए, राम नवमी के इस उल्लास-पूर्ण पर्व पर हम, अपने जीवन में श्रीराम के आदर्शों का अनुसरण करने और गौरवमयी भारत के निर्माण का संकल्प लें। साथ ही, त्योहार मनाते समय सोशल डिस्टेंसिंग सहित सभी सरकारी निर्देशों का पालन कर विश्वव्यापी आपदा कोविड-19 वायरस का मुकाबला करके इसे परास्त करना है।”

 

देश  के उपराष्ट्रपति, एम. वेंकैया नायडू ने रामनवमी के अवसर पर राष्ट्र को शुभकामनाएं दी। उन्होंने अपने संदेश में कहा कि श्री राम द्वारा अनुकरण किए गए मूल्यों को आत्मसात करके, हम एक ऐसी दुनिया बना सकते हैं जो समावेशी, स्वस्थ, समृद्ध और प्राकृति सम्मत स्थायी हो।

उन्होंने कहा कि यह पावन अवसर, हमारे सनातन मूल्यों, सम्पूर्ण मानवता के प्रति करुणा, न्याय परायणता, सत्य निष्ठा के हमारे संस्कारों के साक्षात स्वरूप, मर्यादा पुरूषोत्तम श्री राम के जन्मदिन के रूप में मनाया जाता है। वे हमारे आदर्श पुरुष हैं। मैं राम नवमी के शुभ अवसर पर सभी देशवासियों को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं देता हूं।

उन्होंने कहा कि यह दिवस भगवान श्री राम के जन्म का प्रतीक है, जो सत्य, धार्मिकता, ईमानदारी, करुणा और मानव कल्याण के प्रति प्रतिबद्धता के प्रतीक हैं। वह उन गुणों का प्रतिनिधित्व करते हैं, जिन्हें हम एक आदर्श इंसान के रूप में देखते हैं। श्री राम के आदर्श का अनुकरण कर, अपने जीवन तथा विश्व दर्शन में उन्हीं संस्कारों को अपना कर, हम उस विश्व का निर्माण कर सकते हैं जिसकी हम अपेक्षा करते हैं, एक ऐसा विश्व जो समावेशी हो, समृद्ध हो, स्वस्थ हो और प्रकृति सम्मत स्थायी हो।

उन्होंने कहा कि आइए इस पावन अवसर पर अपनी गौरवशाली सनातन परम्परा, अपने प्राचीन महाकाव्यों तथा कालजयी दार्शनिक एवं साहित्यिक ग्रंथों में निहित उत्कृष्ट जीवन मूल्यों को अपने जीवन में अपनाने का संकल्प लें। यह पावन पर्व हमारे देशवासियों के जीवन में स्वास्थ्य, समृद्धि, सुख, संतोष, शांति और खुशहाली लाए। हम, आज हमारे सामने उपस्थित इस गंभीर स्वास्थ्य चुनौती का सम्मिलित रूप से कारगर समाधान ढूंढने में सक्षम और सफल हों।”

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