प्रॉपर्टी टैक्स डिफॉल्टरों पर नगर निगम निगम की कार्रवाई

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– चारों जोनों में चार टीमों द्वारा 9 डिफॉल्टर प्रॉपटियों को किया गया सीलगुरूग्राम, 14 जनवरी। नगर निगम गुरूग्राम के आयुक्त विनय प्रताप सिंह के निर्देशों की पालना में मंगलवार को बड़े प्रॉपर्टी टैक्स डिफॉल्टरों के खिलाफ नगर निगम द्वारा कार्रवाई शुरू कर दी गई है। इसके तहत चारों जोनों में चार टीमों द्वारा 9 डिफॉल्टर प्रॉपटीज को सील किया गया है।जोनल टैक्सेशन ऑफिसर-4 दिनेश कुमार की टीम मंगलवार को प्रात: सेक्टर-73 स्थित टूडे होम्स एंड कंस्ट्रक्शन के भवन पर पहुंची। इस पर नगर निगम गुरूग्राम का 2723520 रूपए का प्रॉपर्टी टैक्स बकाया है। इसके साथ ही सेक्टर-66 स्थित यूनिवर्सल बिजनेस पार्क पर 26414050 रूपए का प्रॉपर्टी टैक्स बकाया है। टीम ने दोनों बिल्डिंगों को सील कर दिया। इसके साथ ही जोनल टैक्सेशन ऑफिसर-1 विजय कपूर की टीम ने सैक्टर-88 स्थित रिलायंस की प्रॉपर्टी पर बकाया 4742220 रूपए तथा बसई स्थित एसके इलैक्ट्रीकल्स पर बकाया 5930550 रूपए के चलते दोनों प्रॉपटीज को सील करने की कार्रवाई की। सीलिंग की कार्रवाई जोन-2 क्षेत्र में भी जारी रही। यहां पर जोनल टैक्सेशन ऑफिसर देवेन्द्र कुमार की टीम ने ओल्ड दिल्ली रोड़ स्थित रेनॉल्ट सर्विस पर 3979475 रूपए तथा अंसल ट्राईएंगल पालम विहार पर 2509835 रूपए प्रॉपर्टी टैक्स अदायगी नहीं करने पर सीलिंग की कार्रवाई की। इसके अलावा, जोन-3 क्षेत्र में जोनल टैक्सेशन ऑफिसर समीर श्रीवास्तव की टीम ने ग्वाल पहाड़ी तथा घाटा में तीन प्रॉपटीज को सील करने की कार्रवाई की। इन प्रॉपर्टीज पर 2635400 रूपए, 2455220 रूपए तथा 2772000 रूपए का प्रॉपर्टी टैक्स बकाया है।उल्लेखनीय है कि नगर निगम आयुक्त विनय प्रताप सिंह ने सोमवार को प्रॉपर्टी टैक्स कार्य की समीक्षा के दौरान सभी जोनल टैक्सेशन ऑफिसरों को बड़े प्रॉपर्टी टैक्स डिफॉल्टरों को सूचीबद्ध करके उनके खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे। इसके तहत डिफॉल्टरों की प्रॉपर्टीज को सील करने, अटैच करने एवं नीलाम करने की कार्रवाई की जाएगी। निगमायुक्त के निर्देशों की पालना में मंगलवार को कार्रवाई शुरू कर दी गई है।निगमायुक्त विनय प्रताप सिंह के अनुसार हरियाणा नगर निगम अधिनियम-1994 के तहत नगर निगम गुरूग्राम की सीमा में स्थित सभी प्रकार के भवनों एवं खाली प्लॉटों पर प्रॉपर्टी टैक्स लागू होता है। प्रॉपर्टी टैक्स की अदायगी वार्षिक रूप से करना अनिवार्य है। ऐसा नहीं करने वालों पर नगर निगम द्वारा 18 प्रतिशत वार्षिक दर से ब्याज लगाया जाता है तथा प्रॉपर्टीज को सील, अटैच और नीलाम करने की कार्रवाई की जाती है।

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