26 नवम्बर को संसद का संयुक्त अधिवेशन क्यों ?

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नई दिल्ली। आगामी 26 नवंबर को संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक आयोजित की जाएगी। इस दिन को संविधान दिवस के रूप में मनाया जाता है। केंद्रीय मंत्री मुख्तार मुख्तार अब्बास नकवी के अनुसार संसद के संयुक्त अधिवेशन को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी संबोधित करेंगे। इसके अलावा सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी भी इस अवसर पर 10 दिवसीय प्रोग्राम आयोजित करेगी। भारत का संविधान 26 नवम्बर 1949 को पूरा कर डॉ आंबेडकर द्वारा राष्ट्र को समर्पित किया गया था.

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पार्टी के सभी पदाधिकारियों को जिला स्तर पर इस अवसर पर खास आयोजन करने की हिदायत दी है। उन्होंने पार्टी के नेताओं को यह भी कहा है कि 27 नवंबर से खास तौर पर समाज के बुद्धिजीवी वर्ग की बैठक आयोजित की जाए जो आगामी 6 दिसंबर तक प्रत्येक जिले में आयोजित की जाएगी । बैठक में भारतीय संविधान के निर्माता भारत रत्न डॉक्टर बी आर अंबेडकर को श्रद्धांजलि दी जाएगी।

पार्टी का मानना है कि इस प्रकार के प्रोग्राम के आयोजन से डॉक्टर अंबेडकर के संदेश आम जनता तक और पार्टी के प्रत्येक कार्यकर्ता तक पहुंचाए जा सकेंगे। साथ ही इसमें सामान्य नागरिक के मौलिक अधिकार और उनकी जिम्मेदारियों पर भी चर्चा होगी।

इनके अलावा बुद्धिजीवी वर्ग में मोदी सरकार द्वारा किए गए कार्यों पर भी चर्चा होगी ।पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने श्री साह के निर्देशानुसार सभी राज्यों के भाजपा के सांसदों और विधायकों तथा पार्टी के सभी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को यह निर्देश दिया है कि सभी इस अवसर पर आयोजित किए जाने वाले बैठकों में आवश्यक रूप से शामिल हों।

26 नवम्बर का ऐतिहासिक महत्व :

भारत गणराज्य का संविधान 26 नवम्बर 1949 को बनकर तैयार हुआ था। संविधान सभा के निर्मात्री समिति के अध्यक्ष डॉ॰ भीमराव आंबेडकर के 125वें जयंती वर्ष के रूप में 26 नवम्बर 2015 को पहली बार संविधान दिवस मनाया गया था . डॉ॰ भीमराव आंबेडकर ने भारत के संविधान को 2 वर्ष 11 माह 18 दिन में 26 नवम्बर 1949 को पूरा कर राष्ट्र को समर्पित किया था । गणतंत्र भारत में 26 जनवरी 1950 से संविधान लागू किया गया।

उल्लेखनीय है कि आंबेडकरवादी और बौद्ध लोगों द्वारा इस दिन कई दशकों पूर्व से ‘संविधान दिवस’ मनाया जाता है। भारत सरकार द्वारा पहली बार 2015 से डॉ॰ भीमराव आंबेडकर के इस महान योगदान को याद करने के लिए 26 नवम्बर को “संविधान दिवस” मनाया गया। केंद्र सरकार ने तब से ही 26 नवंबर का दिन संविधान के महत्व का प्रसार करने और डॉ॰ भीमराव आंबेडकर के विचारों और अवधारणाओं का प्रसार करने के लिए चुना.

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