आइकेट का ‘इंटरनेशनल सिम्पोजियम ऑन लाइटिंग’ मील का पत्थर : अर्जुन राम मेघवाल

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  • केन्द्रीय भारी उद्योग एवं लोक उपक्रम राज्य मंत्री ने चौथी औद्योगिक क्रांति को मेक इन इंडिया से जोड़ने पर दिया बल 
  • ऑटोमोटिव लाइटिंग इंडस्ट्री के दुनिया भर से आये 800 प्रोफेशनल्स ले रहे हैं भाग 
  • लाइटिंग से सम्बंधित विविध पहलुओं पर 24 टेक्नीकल पेपर्स होंगे प्रदर्शित 
  • प्रति दो वर्ष पर आयोजित होने वाला यह छठा इंटरनेशनल सिम्पोजियम 
  • 14 ओईएमएस के 14 से अधिक नए मॉडलों के वाहन भी प्रदर्शित 
  • प्रदर्शनी में मोटर वाहन कलपुर्जो के 30 से अधिक स्टॉ

सुभाष चौधरी /संपादक 

गुरुग्राम : 21 वीं सदी में चल रही चौथी औद्योगिक क्रांति के दौर में इंटरनेशनल सेंटर फॉर ऑटोमोटिव टेक्नोलॉजी (आइकेट) जैसे संस्थान देश के विकास में महती भूमिका अदा कर सकते हैं. हमारे सामने बेरोजगारी समाप्त करने, सड़क सुरक्षा को प्राथमिकता देने और तकनीकि विकास को समयानुकूल निरंतर जारी रखने का लक्ष्य है जिसे प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी के “मेक इन इंडिया” से जोड़ने की जरूरत है. इससे समाज का भला होगा. इस थीम को लेकर आइकेट द्वारा आयोजित ‘इंटरनेशनल सिम्पोजियम ऑन लाइटिंग’ iSol – 2019 का आयोजन मील का पत्थर साबित होगा.

यह विचार केन्द्रीय राज्य मंत्री, भारी उद्योग और लोक उपक्रम एवं संसदीय कार्य राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने व्यक्त किया. श्री मेघवाल गुरुवार को गुरुग्राम के मानेसर स्थित इंटरनेशनल सेंटर फॉर ऑटोमोटिव टेक्नोलॉजी (आइकेट) के सेंटर 2 में आयोजित ‘इंटरनेशनल सिम्पोजियम ऑन लाइटिंग’ iSol – 2019 में ऑटोमोटिव लाइटिंग इंडस्ट्री से सम्बन्ध रखने वाले दुनिया भर से आये 800 प्रोफेशनल्स को उद्घाटन सत्र के दौरान संबोधित कर रहे थे. केन्द्रीय राज्य मंत्री ने इस बात की उम्मीद जताई कि लाइटिंग से सम्बंधित विविध पहलुओं पर जिन 24 टेक्नीकल पेपर्स को यहाँ प्रदर्शित किया जाएगा उनसे देश के प्रधान मंत्री श्री मोदी के मेक इन इंडिया के लक्ष्य को बल मिलेगा. सभी बड़े लाइटिंग उद्योग के प्रतिनिधियों की उपस्थिति से इस क्षेत्र के विभिन्न पहलुओं पर विचार किया जाना संभव हो सकेगा.

उन्होंने अपने संबोधन में औद्योगिक क्रांति और तत्कालीन आवश्यकताओं को रेखांकित करते हुए 16 वीं सदी में शुरू हुई प्रथम इंडस्ट्रियल क्रान्ति, द्वितीय औद्योगिक क्रांति और तृतीय औद्योगिक क्रांति के योगदान का तुलनातमक उदाहरण देते हुए वर्तमान दौर की आवश्यकताओं के प्रति आगाह किया. भाफ इंजन आविष्कार से लेकर बिजली की खोज और 18 वीं सदी में आई टी सेक्टर में मिली अप्रत्याशित उप्लबद्धि की चर्चा करते हुए इनकी प्रासांगिकता को बेहद व्यावहारिक शब्दों में उकेरा. उन्होंने यह कहते हुए चेताया कि एक समय देश में कंप्यूटर के आने से बेरोजगारी बढ़ने की आशंका व्यक्त की जा रही थी लेकिन वह निर्मूल साबित हुई.

उनका कहना था कि ‘इंटरनेशनल सिम्पोजियम ऑन लाइटिंग’ iSol – 2019 जैसे सेमिनार में सभी सम्बंधित पक्षों की भागीदारी सुनिश्चित की जानी चाहिए तभी इसकी उपयोगिता आवश्यकता के अनुरूप बन सकेगी. केन्द्रीय राज्य मंत्री ने चौथी औद्योगिक क्रांति के तीन प्रमुख आधार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स और थ्री डी प्रिंटिंग की याद दिलाते हुए नए युग के सूत्रपात की उमीद जताई. इस महत्वपूर्ण तकनीकि प्लेटफोर्म पर उन्होंने गुरु नानक देव के प्रकाश पर्व से मिलने वाले आध्यात्मिक सन्देश को सांसारिक जीवन से जोड़ते हुए लाइटिंग को इस समारोह के चर्चा के विषय के रूप में चयन के लिए आइटेक के निदेशक दिनेश त्यागी की प्रशंसा की. दूसरी तरफ रिटायरमेंट के वक्त दिवंगत पूर्व राष्ट्रपति डॉ अब्दुल कलाम के राष्ट्रपति भवन छोड़ने के समय शिक्षक बनने की उनकी दी गयी सीख का उल्लेख करते हुए सभी रिसर्च करने वालों को समाज के प्रति उनके उत्तरदायित्व का बोध भी कराया.

लगभग आधे घंटे के भाषण के दौरान औद्योगिक समूहों के प्रतिनिधियों के बीच श्री मेघवाल पूरी तरह अनौपचारिक दिखे लेकिन देश के प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा पिछली पंचवर्षीय योजना के दौरान एल ई डी को जनांदोलन बनाने का जिक्र करना नहीं भूले. तालियों की गड़गड़ाहट के बीच उन्होंने प्रमुख शहर अमृतसर स्थित गोल्डन टेम्पल और जयपुर सिटी की लाइटिंग ब्यूटीफिकेशन को रिसर्च के लिए चुने जाने पर प्रसन्नता व्यक्त की जबकि देश के संसद भवन के तिरंगे लाइटिंग को देश प्रेम पैदा करने के साथ साथ लाइटिंग की दिशा में भी मजबूत सन्देश देने वाला बताया. बीकनेर नगर निगम में एल ई डी इंस्टालेशन के कारण बिजली के बिलों में आई भारी कमी का जिक्र करते हुए यह दर्शाने की कोशिश की कि तकनीकि विकास , व्यवस्था में सुधार के साथ आर्थिक प्रबंधन के दृष्टिकोण को भी पुष्ट करता है. संगोष्ठी में उपस्थित सभी औद्योगिक प्रतिनिधियों को श्री मेघवाल ने ऊर्जा की बचत और देश भर में प्रकाश व्यवस्था में सुधार लाने के लिए एलईडी टेक्नोलॉजी का दायरा बढ़ाने का भी सुझाव दिया।

उन्होंने प्रति दो वर्ष पर होने वाले सिम्पोजियम के अब तक के परफॉरमेंस को लेकर सन्तोष जताया. केन्द्रीय भारी उद्योग राज्य मंत्री ने आगले दो वर्ष बाद यानि वर्ष 2022 में होने वाले सिम्पोजियम जो देश की स्वतंत्रता के 75 वें वर्ष में आयोजित होगी  को लाइटिंग तकनीक के क्षेत्र में विकास के लिए मील के पत्थर की संज्ञा दी.

इस अवसर पर श्री मेघवाल ने आइकेट प्रबंधन की ओर से बच्चों के विकास पर काम करने वाली सामाजिक संस्था संकल्प वेलफेयर सोसाइटी को रु. 1.75 लाख का चेक प्रदान किया और तकनीकि विकास के साथ साथ सामाजिक विकास में भी योगदान करने के लिए आइकेट के निदेशक दिनेश त्यागी की प्रशंसा की.

श्री मेघवाल ने मोटर वाहन क्षेत्र में परीक्षण, अनुसंधान और विकास के लिए विश्व स्तर के केंद्र के रूप में उभरने के लिए आइकेट के सभी विशेषज्ञों और खास तौर से निदेशक श्री त्यागी को बधाई दी और 850 सीटों वाले नवनिर्मित आधुनिक ऑडीटोरियम और एक्सपो सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए भी उनकी सराहना की।

सिम्पोजियम अब एक वैश्विक कार्यक्रम में परिवर्तित : दिनेश त्यागी

आइकेट निदेशक दिनेश त्यागी ने मोटर वाहनों में प्रकाश व्यवस्था के लिए परीक्षण और अनुसंधान और विकास के क्षेत्र में इस संस्थान की तरक्की में नए तकनीकि विकास के क्षेत्र में किये जा रहे कार्यों की जानकारी दी। उन्होंने प्रकाश टेक्नोलॉजी के भविष्य की भी चर्चा की और बताया कि परिवर्तनकाल के दौरान किस प्रकार आइकेट मूल उपकरण निर्माताओं (ओईएम) और प्रकाश व्यवस्था करने वाले आपूर्तिकर्ताओं की सहायता करेगा। अपने स्वागत भाषण के दौरान श्री त्यागी ने बताया कि वर्ष 2009 से शुरू इस इंटरनेशनल लाइटिंग सिम्पोजियम ने उत्तरोत्तर इस क्षेत्र में के ऐसे द्विवार्षिक प्लेटफोर्म के रूप में अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर जगह बना ली है जो उत्पादनकर्ताओं और आपूर्तिकर्ताओं के लिए बेहद सहायक सिद्ध हो रहा है. उन्होंने केन्द्रीय राज्य मंत्री को आश्वस्त किया कि इस प्लेटफोर्म पर लाइटिंग इंजीनियर्स , ट्रेफिक सेफ्टी एक्सपर्ट्स, रेगुलेटरी एजेंसी, उत्पादकों, आपूर्तिकर्ताओं और ओ ई एम् एस के बीच होने वाले तकनीकि सूचनाओं के आदान प्रदान से देश की लाइटिंग इंडस्ट्री को आशातीत लाभ पहुंचेगा.

श्री त्यागी का कहना था कि प्रकाश व्यवस्था पर अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी (आईएसओएल) 2009 से आगे बढ़ते हुए यह सिम्पोजियम अब एक वैश्विक कार्यक्रम में परिवर्तित हो चुकी है। उनके अनुसार आइकेट, प्रकाश अनुसंधान और परीक्षण के क्षेत्र से 2006 से जुड़ा हुआ है। इस प्रतिबद्धता को अधिक ऊंचाईयों तक ले जाते हुए ‘इंटरनेशनल सिम्पोजियम ऑन लाइटिंग’ iSol – 2019 का उद्देश्य ज्ञान बांटने वाला मंच बनाना है ताकि जानकारी का आदान-प्रदान सुनिश्चित किया जा सके।

‘इंटरनेशनल सिम्पोजियम ऑन लाइटिंग’ iSol – 2019 प्रदर्शनी में मोटर वाहन कलपुर्जो के 30 से अधिक स्टॉल लगाए गए हैं. इनमें प्रकाश व्यवस्था से जुड़े उपकरणों पर विशेष ध्यान दिया गया है। साथ ही 14 ओईएमएस के 14 से अधिक नए मॉडलों के वाहन भी प्रदर्शित किए गए हैं।

‘इंटरनेशनल सिम्पोजियम ऑन लाइटिंग’ iSol – 2019 के दौरान इंटेलिजेंट लाइटिंग : द रोड अहेड एंड रोड सेफ्टी इन डार्क आवर्स : असिसटिंग एंड अलार्मिंग टेक्नोलॉजीस विषय पर चर्चा का आयोजन किया गया। नवोन्मेष और उत्कृष्टता के लिए अनेक पुरस्कार वितरित किए गए। साथ ‘इंटरनेशनल सिम्पोजियम ऑन लाइटिंग’ iSol – 2019 सम्बन्धी एक सोवेनियर का अनावरण भी किया गया . 

इस अवसर पर विशिष्ठ अतिथि के रूप में मारूति सुजुकि इंडिया लिमिटिड से सी वी रमन, होन्डा कार्स इंडिया लिमिटिड से प्रवीण परांजपे, फेम इंडस्ट्री से डा. जे के जैन, यूनो मिंडा ग्रुप से एन के मिंडा, इंडिया यामाहा लिमिटिड से यासुओ इशिहारा, आइकेट के डीजी एम् और सिम्पोजियम के संयोजक डा. मधुसूदन जोशी सहित प्रमुख ऑटो कंपनियों के अनेक प्रतिनिधि भी उपस्थित थे।

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