मुस्लिम पक्ष के वकील जफरयाब जिलानी ने कहा : आज का निर्णय हमारे लिए संतोषजनक नहीं है, विचार विमर्श के बाद पुनर्विचार याचिका दायर करने का निर्णय लेंगे

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नई दिल्ली। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने राम मंदिर जन्मभूमि मामले में आज आये सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद आयोजित ज्वाइंट प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुस्लिम पक्ष के वकील जफरयाब जिलानी ने कहा कि चीफ जस्टिस ने लगभग अपने आधा घंटा के निर्णय में सूट नंबर 4 की डिक्री की लेकिन पूरी की पूरी जमीन को दूसरे पक्ष को दे दी गई। इस पर हम मशवरा करेंगे। अपने सीनियर वकील राजीव धवन से भी सलाह करेंगे ।

श्री जिलानी ने कहा कि हमारा मानना है कि इस पॉइंट पर जो फाइंडिंग है कोर्ट की वह ठीक नहीं है । लेकिन मैं देश की पूरी आवाम से अपील करता हूं कि वह पूरी तरह शांति बनाए रखें। किसी भी तरह का कोई विरोध नहीं जताया जाना चाहिए। यह किसी की हार नहीं और ना किसी की जीत है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जो कुछ भी कानूनी संभावना होगी, कानूनी प्रावधान के तहत हम आने वाले समय में कदम उठाएंगे । उन्होंने साफ किया कि आज का निर्णय हमारे लिए संतोषजनक नहीं है और हमारी उम्मीदों के अनुरूप नहीं है। जमीन जो हिंदू पक्ष को दी गई है उस पर हम विचार करके आगे कदम उठाएंगे ।

उन्होंने कहा कि इस जजमेंट में चीफ जस्टिस साहब ने बहुत सारे ऑब्जर्वेशंस दिए हैं । वास्तव में वह इस देश के लिए फायदेमंद हो सकते हैं । उन्होंने कहा कि कोर्ट ने अपनी फाइंडिंग में यह माना है कि मस्जिद के स्ट्रक्चर को माना गया लेकिन नमाज अता करने के मामले में इसे इसके सबूत पर विश्वास नहीं किया गया।

उन्होंने कहा कि जब पूरी जजमेंट की कॉपी हमारे पास आएगी उसका पूरा अध्ययन करने के बाद हम फिर आगे का कोर्स आफ एक्शन तय करेंगे। उन्होंने कहा कि हम अपने वरिष्ठ वकील राजीव धवन और अन्य अपने वकीलों के साथ सलाह मशविरा करने के बाद यह तय करेंगे कि इस संबंध में हमें रिव्यू पिटिशन दायर करना चाहिए या नहीं । श्री गिलानी ने कहा कि आज के निर्णय की फाइंडिंग में जो कई ऐसे ऑब्जर्वेशंस हैं वह मुल्क के लिए बहुत फायदेमंद हो सकते हैं लेकिन कुछ फाइंडिंग से वह संतुष्ट नहीं है। उन्होंने कहा कि सूट नंबर चार को लिमिटेशन से बाहर नहीं माना लेकिन उक्त सूट की जमीन दूसरे पक्ष को दी गई ।

जिलानी ने एक सवाल के जवाब में कहा कि जिस सबूत को हिंदू के पक्ष में माना गया है उसी सबूत को मुस्लिम पक्ष के लिए नकारा गया । जब एक तरफ यह माना गया कि वहां मस्जिद थी तो दूसरी तरफ 1957 से पहले नमाज अता करने की बात नहीं स्वीकारी गई।

उन्होंने कहा कि 20वीं सदी के मंदिरों के स्ट्रक्चर से मिलते जुलते तथ्यों को एएसआई द्वारा प्रस्तुत किया गया लेकिन उसके बाद के वर्षों के बारे में कोई तथ्य या सबूत नहीं दिए गए। उन्होंने कहा कि एएसआई की रिपोर्ट में बाद के बरसो से संबंधित कोई रिपोर्ट या कोई सबूत प्रस्तुत नहीं किये गए हैं।

इस अवसर पर मौलाना जैदी, मौलाना फजलुर रहमान, शकील अहमद सैयद, शमशाद अहमद, और मौलाना रियाज फारुकी सहित कई प्रमुख लोग मौजूद थे।

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