यमुनानगर-जगाधरी व सोनीपत-कुण्डली मल्टीफंक्शनल अर्बन कॉम्पलेक्स-2031 को मिली स्वीकृति

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चंडीगढ़ :  हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल की अध्यक्षता में आज यहां हुई नगर एवं ग्राम आयोजना विभाग की राज्य स्तरीय कमेटी की बैठक में यमुनानगर-जगाधरी तथा सोनीपत-कुण्डली मल्टीफंक्शनल अर्बन कॉम्पलेक्स-2031 की प्रारूप विकास योजनाओं को स्वीकृति प्रदान की गई। इसके अलावा, खरखौदा की प्रारूप विकास योजना-2041 तथा कैथल व रोहतक-2031 की संशोधित विकास योजनाओं को भी स्वीकृति प्रदान की गई। शहरी स्थानीय निकाय मंत्री कविता जैन भी बैठक में उपस्थित थी।

यमुनानगर-जगाधरी की प्रारूप विकास योजना वर्ष 2031 तक 13,13,500 व्यक्तियों की अनुमानित आबादी के लिए तैयार की गई है। प्रस्तावित औसत आवासीय घनत्व 250 व्यक्ति प्रति हेक्टेयर होगा। इस विकास योजना में 3339.58 हेक्टेयर क्षेत्र को आवासीय उद्देश्य के लिए और 376.86 हेक्टेयर क्षेत्र को व्यावसायिक उद्देश्य के लिए रखा गया है। इसी प्रकार, 1070.55 हेक्टेयर क्षेत्र को औद्योगिक उद्देश्य के लिए तथा 953.33 हेक्टेयर क्षेत्र परिवहन और संचार के लिए, 181.89 हेक्टेयर क्षेत्र सार्वजनिक उपयोगिताओं के लिए, 315.46 हेक्टेयर क्षेत्र सार्वजनिक और अर्ध-सार्वजनिक उपयोग के लिए जबकि 854.87 हेक्टेयर क्षेत्र ओपन स्पेस के लिए रखा गया है।
सोनीपत-कुंडली मल्टीफंक्शनल अर्बन कॉम्पलेक्स की प्रारूप विकास योजना 16 लाख लोगों की अनुमानित आबादी के लिए तैयार की गई है। औसत आवासीय सेक्टर घनत्व 260 व्यक्ति प्रति हेक्टेयर होगा। इस विकास योजना में 4771 हेक्टेयर क्षेत्र को आवासीय उद्देश्य के लिए, 1006 हेक्टेयर क्षेत्र को वाणिज्यिक उद्देश्य के लिए, 3332 हेक्टेयर क्षेत्र को औद्योगिक उद्देश्य के लिए, 1645 हेक्टेयर क्षेत्र को परिवहन और संचार के लिए, 354 हेक्टेयर क्षेत्र सार्वजनिक उपयोगिताओं के लिए, 4268 हेक्टेयर क्षेत्र सार्वजनिक और अर्ध सार्वजनिक उपयोगों के लिए, 3719 हेक्टेयर क्षेत्र पार्कों और ओपन स्पेस के लिए तथा 512 हेक्टेयर क्षेत्र जलाशयों और प्राकृतिक संरक्षण क्षेत्र के लिए रखा गया है।
खरखौदा की प्रारूप विकास योजना 2041 तक 4.70 लाख व्यक्तियों की अनुमानित आबादी के लिए तैयार की गई है। औसत आवासीय सेक्टर घनत्व 300 व्यक्ति प्रति हेक्टेयर होगा। इस प्रारूप विकास योजना में 1300 हेक्टेयर क्षेत्र आवासीय उद्देश्य के लिए, 118 हेक्टेयर क्षेत्र वाणिज्यिक उद्देश्य के लिए, 2229 हेक्टेयर क्षेत्र औद्योगिक उद्देश्य के लिए, 616 हेक्टेयर क्षेत्र परिवहन और संचार के लिए, 79 हेक्टेयर क्षेत्र सार्वजनिक उपयोगिताओं के लिए, 139 हेक्टेयर क्षेत्र सार्वजनिक और अर्ध सार्वजनिक उपयोग के लिए , 483 हेक्टेयर क्षेत्र ओपन स्पेस के लिए और 84 हेक्टेयर क्षेत्र जलाशयों तथा प्राकृतिक संरक्षण क्षेत्र के लिए रखा गया है।
इसी प्रकार, कैथल की संशोधित विकास योजना वर्ष 2031 तक 5 लाख व्यक्तियों की अनुमानित आबादी के लिए तैयार की गई है। औसत आवासीय घनत्व 270 व्यक्ति प्रति हेक्टेयर होगा। संशोधित प्रारूप विकास योजना-2031 राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 152 की नई अलाइनमेंट का समावेश करने, जमीनी वास्तविकताओं या सैटेलाइट इमेजरीज़ के अनुसार प्रस्तावित सेक्टर की सडक़ों का समावेश, नई नीतियों का समावेश और नए राष्ट्रीय राजमार्ग के निर्माण तथा उद्योगों की आमद के आधार पर शहरी क्षेत्र की वृद्धि को देखते हुए शहरीकरण योग्य क्षेत्र के विस्तार के उद्देश्य से तैयार की गई है। इस संशोधित विकास योजना में 1850 हेक्टेयर क्षेत्र आवासीय उद्देश्य के लिए, 305 हेक्टेयर क्षेत्र वाणिज्यिक उद्देश्य के लिए,352 हेक्टेयर क्षेत्र औद्योगिक उद्देश्य के लिए, 448 हेक्टेयर क्षेत्र परिवहन और संचार के लिए, 154 हेक्टेयर क्षेत्र सार्वजनिक उपयोगिताओं के लिए, 221 हेक्टेयर क्षेत्र सार्वजनिक और अर्ध-सार्वजनिक उपयोग के लिए और 464 हेक्टेयर क्षेत्र पार्कों और ग्रीन बेल्ट समेत ओपन स्पेस के लिए रखा गया है।
रोहतक की संशोधित विकास योजना सेक्टर 27 ए और 27 के साथ-साथ आईएमटी चौक से सेक्टर 27, 28 डिवाइडिंग रोड तक 12 मीटर सर्विस रोड के साथ-साथ 30 मीटर चौड़ी ग्रीन बेल्ट को बनाए रखने के लिए तैयार की गई है।
बैठक में मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव श्री राजेश खुल्लर, अतिरिक्त प्रधान सचिव श्री वी. उमाशंकर, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव श्रीमती नवराज संधू, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव श्रीमती धीरा खंडेलवाल, लोक निर्माण (भवन एवं सडक़ें) विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव श्री आलोक निगम, बिजली विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव श्री टी.सी. गुप्ता, शहरी स्थानीय निकाय विभाग के प्रधान सचिव श्री आनंद मोहन शरण, नगर एवं ग्राम आयोजना विभाग के प्रधान सचिव श्री ए.के. सिंह, हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण के मुख्य प्रशासक श्री डी. सुरेश, नगर एवं ग्राम आयोजना विभाग के निदेशक श्री के. एम. पांडुरंग और राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
क्रमांक-2019

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