चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने पीएम मोदी को लिखीं तीन चिट्ठी, बड़े बदलाव की मांग

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नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट और उच्च न्यायालयों में 43 लाख से अधिक लंबित मामलों के निपटारे के लिए भारत के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को तीन चिट्ठी लिखी हैं। चिट्ठी में मुख्य न्यायाधीश ने पीएम मोदी से सर्वोच्च प्राथमिकता के साथ दो संवैधानिक संशोधनों का अनुरोध किया है। उन्होंने देश की बड़ी अदालतों के समक्ष लंबित मामले के निबटारे को लेकर खास संवैधानिक व्यवस्था करने पर बल दिया है।

उल्लेखनीय है कि देश मे अक्सर विभिन्न अदालतों में जिसमें सुप्रीम कोर्ट भी शामिल है में वर्षों से हजारों ।अमले लंबित होने और मुकदमे के निस्तारण में कई कई साल लगने के मुद्दे उठाए जाते रहे हैं। लेकिन अदालतों में न्यायाधीशों की संख्या काफी कम होने और आवश्यक आधारभित संरचना की कमी होने के विषय पर लोगो की आवाज मुखर नही होती है। ऐसे में सर्वोच्च अदालत ले प्रमुख की ओर से पीएम को पत्र लिख कर विशेष कदम उठाने की मांग करना या उन्हें सलाह देना वास्तव में महत्वपूर्ण घटना है।

मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने पीएम मोदी से अनुरोध किया है कि एक तो सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों की संख्या में बढ़ोतरी की जाए। गौरतलब है कि यह संख्या वर्तमान में 31 है। उन्होंने कहा है कि उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों की सेवानिवृत्ति की आयु 62 से बढ़ाकर 65 वर्ष की जाए।

मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने पीएम मोदी को दिए तीसरे पत्र में संविधान के अनुच्छेद 128 और 224ए के तहत सुप्रीम कोर्ट और उच्च न्यायालयों के सेवानिवृत्त न्यायाधीशों के कार्यकाल की पुरानी परंपरा को पुनर्जीवित करने की मांग की है।

ऐसा करने से वर्षों से लंबित मामलों का निपटारा किया जा सकता है। मुख्य न्यायाधीश ने लिखा है कि सुप्रीम कोर्ट में इस समय न्यायाधीशों का कोई पद खाली नहीं है।

सुप्रीम कोर्ट में अभी कुल 31 न्यायाधीश हैं जबकि कोर्ट में कुल 58669 मामले लंबित हैं। जाहिर है लगातार नए मामले आने की वजह से ये संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। खास कर बड़े प्रशासनिक और राजनीतिक फैसले जिनमें संवैधानिक पहलू शामिल होते है के अधिकतर मामले सुप्रीम कोर्ट में लाये जाने से यह संख्या लगातार बढ़ती जा रही है।

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