विपक्ष के सवालों का जवाब देने मैदान में उतरे अरुण जेटली

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पत्रकारों के समक्ष वित्त मंत्रालय के अधिकारियों ने अर्थव्यवस्था की हालत पर दिया प्रजेंटेशन

वित्त मंत्री ने 6.90 लाख करोड़ रुपये के रोड प्रॉजेक्ट्स की घोषणा की

सरकारी बैंकों के लिए 2.11 लाख करोड़ रुपये की कैपिटलाइजेशन योजना

सुभाष चौधरी /प्रधान संपादक 

नई दिल्ली। अर्थव्यवस्था को लेकर विपक्ष की ओर से लगातार उठाये जा रहे सवालों का जवाब देने के लिए मंगलवार को स्वयं देश के वित्त मंत्री अरुण जेटली और वित्त मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों की उनकी टीम ने कमान संभाल ली. उन्होंने आज की महत्वपूर्ण प्रेस वार्ता में एक तरफ मोदी सरकार की आर्थिक गतिविधियों को तेज करने का संकेत दिया जबकि दूसरी तरफ अधिकारियों ने तथ्यों के साथ सभी मुद्दों को विस्तार से मिडिया के सामने रख कर सभी आशंकाओं को दूर करने की कोशिश की. इस अवसर पर वित्त मंत्री ने 6.90 लाख करोड़ रुपये के रोड प्रॉजेक्ट्स की घोषणा की जबकि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के लिए 2.11 लाख करोड़ रुपये की पिटलाइजेशन योजना लाने का ऐलान किया.

कैबिनेट की बैठाक के बाद केन्द्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने आज आयोजित प्रेस वार्ता  में केंद्र सरकार की इन दो महत्वपूर्ण फैसले की जानकारी दी. उनका कहना था कि देश की अर्थव्यवस्था की बुनियाद बहुत मजबूत है. उनके इस दावे को आंकड़ों के माध्यम से सही साबित करने के लिए वित्त मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने विस्तृत प्रजेंटेशन भी दी। वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया कि देश में निवेश को बढ़ावा देने , नौकरियों की संभावना बढाने और ग्रोथ के लिए बैंकों को मजबूत बनाए जाने की दिशा में काम किया जा रहा है. उन्होंने सार्वजनिक बैंकों की हालत सुधारने की चर्चा करते हुए कहा कि कैपिटलाइजेशन प्लान के तहत 1.35 करोड़ रुपये के बॉन्ड जारी किए जाएंगे.

 

उनके अनुसार 76 हजार करोड़ रुपये बजटीय सहायता और बाजार से दिए जाएंगे. 18 हजार करोड़ रुपये इंद्रधनुष योजना के तहत देने की योजना है. उन्होंने आरोप लगाया कि पहले अंधाधुंध कर्ज देते समय बैंकों की सही स्थिति छुपाई जाती थी. वित्त मंत्री ने कहा बैंकिंग रिफॉर्म की दिशा में कदम बढाए जा रहे हैं. अब छोटे और मध्यम दर्जे के उद्योगों को कर्ज देने में प्राथमिकता दी जाएगी.

वित्त मंत्री ने दावा किया कि पिछले 3 साल में भारत दुनिया में सबसे तेजी से बढऩे वाली अर्थव्यवस्था रही है. इस गति को हम कायम रखने की कोशिश में हैं. उन्होंने माना कि  जब बड़े परिवर्तन होते हैं तो कुछ समय के लिए उसके कुछ असर भी दिखते हैं. उन्होंने आश्वस्त किया कि मीडियम और लॉन्ग टर्म में उसके लाभ होंगे.

वित्त मंत्रालय के अधिकारियों ने अपनी प्रजेंटेशन में दावा किया कि विदेशी पूंजी निवेश बढ़ कर 400 बिलियन डॉलर हो गया. जीएसटी को अब तक का सबसे बड़ा आर्थिक सुधार बताया और नोटबंदी से  काले धन पर नकेल कसने में कामयाबी मिलने का दावा किया. उनके अनुसार जीएसटी से देश में भ्रष्टाचार में कमी आई और चालू खाता घाटा नियंत्रण में है. उनका कहना था कि यह फिलहाल सेफ जोन में है और 2 फीसदी से नीचे है. उनके आकंडे बताते हैं कि भारत का कई देशों के साथ व्यापार बढ़ेगा.

 

इन पहलुओं पर अधिकारियों ने विस्तार से अपनी बातें रखीं : 

 

 

मजबूत वृहत आर्थिक बुनियादी सिद्धांत और सतत विकास के लिए सुधार
 आज हुए संवाददाता सम्‍मेलन में वित्‍त मंत्रालय के सचिवों द्वारा दिए गए प्रस्‍तुतीकरण की प्रमुख विशेषताएं निम्नलिखित है  : 

  1. भारत बृहत आर्थिक स्थिरता का गढ़ 

मजबूत आर्थिक विकास 

  • 2014-17 के तीन वर्षों में भारत का विकास 7.5 प्रतिशत प्रति वर्ष की बड़ी मजबूत दर पर हुआ और 2015-16 में वृद्धि दर 8 प्रतिशत से अधिक हो गई। विमुद्रीकरण और माल एवं सेवा कर के परिवर्ती प्रभाव के कारण अंतिम दो तिमाहियों में विकास में अस्‍थायी मंदी आई। वह प्रभाव अब खत्‍म हो चुका है और सभी संकेतक-औद्योगिक उत्‍पादन सूचकांक (आईआईपी), केन्‍द्रीय क्षेत्र, सूचकांक, आटोमोबाइल, उपभोक्‍ताओं द्वारा किए जा रहे खर्च आदि मजबूत उछाल की ओर संकेत करते हैं और चालू वर्ष की दूसरी तिमाही में ही बहुत अच्‍छे विकास की संभावना है। 
  • वर्तमान वैश्विक आर्थिक संभावनाओं की मुख्‍य विशेषता उन्‍नत अर्थव्‍यवस्‍थाओं एवं उभरते बाजार तथा विकासशील अर्थव्‍यवस्‍थाओं वाले देशों में अपेक्षाकृत सुदृढ़ आर्थिक गतिविधि के रूप में दिखाई दे रही है। वैश्विक आर्थिक गतिविधि धीरे-धीरे सुधार के मार्ग पर बढ़ रही है और वैश्विक जीडीपी वर्ष 2016 में 3.2 प्रतिशत के स्‍तर पर रहने के बाद वर्ष 2017 और 18 में क्रमश: 3.6 प्रतिशत और 3.7 प्रतिशत की दर पर बढ़ने की संभावना है। इस पुनरूद्धार में कारोबारी और उपभोक्‍ताओं के विश्‍वास में मजबूती के साथ-साथ निवेश, व्‍यापार और औद्योगिक उत्‍पादन में हुए उल्‍लेखनीय सुधार से मदद मिली है। इससे निर्यातों की वृद्धि में भी मदद मिलेगी जो अप्रैल-सितम्‍बर के दौरान औसतन लगभग 12 प्रतिशत की वृद्धि के साथ सितम्‍बर, 2017 में 25.6 प्रतिशत की जबरदस्‍त निर्यात वृद्धि में दिखाई देती है। 

महंगाई पर काबू पा लिया गया है 

  • सरकार द्वारा उठाए गए निर्णायक कदमों के साथ-साथ कच्‍चे तेल की कीमतों में 2013-14 के ऊंचे स्‍तरों से आई गिरावट और विक्रेय वस्‍तुओं की लाभकर वैश्विक कीमतों ने अर्थव्‍यवस्‍था को स्‍फीतिकारी चक्र से निकालकर अपेक्षाकृत स्थिर कीमतों के दौर में ला खड़ा किया है। मुद्रास्‍फीति 2012-13 और 2013-14 के लगभग दो अंकीय स्‍तर से गिरकर 5 प्रतिशत से कम की औसत पर आ गई है। जुलाई, 2016 और जुलाई, 2017 के बीच मुद्रास्‍फीति दर 2 प्रतिशत के आसपास थी। उपभोक्‍ता मूल्‍य सूचकांक (सीपीआई) पर आधारित मुद्रास्‍फीति इस समय लगभग 4 प्रतिशत के लक्ष्‍य के भीतर है और वित्‍त वर्ष 2017-18 के लिए इसके लगभग 3.5 प्रतिशत होने की संभावना है। इस समय मुद्रास्‍फीति 4 प्रतिशत के लक्ष्‍य की परिधि के भीतर है। तथापि, भारतीय रिजर्व बैंक चालू वित्‍त वर्ष के उत्‍तरार्ध में इसके बढ़कर 4.2-4.6 प्रतिशत हो जाने का अनुमान लगा रहा है, जो 4 प्रतिशत के लक्ष्‍य से थोड़ा अधिक है, लेकिन 4+/-2 प्रतिशत की परिधि में है। 
  • उपभोक्‍ता मूल्‍य सूचकांक (संयुक्‍त) पर आधारित हेडलाइन मुद्रास्‍फीति 2014-15 के 5.9 प्रतिशत की तुलना में 2015-16 में औसतन 4.9 प्रतिशत रही। 2016-17 के लिए सीपीआई मुद्रास्‍फीति औसतन 4.5 प्रतिशत रही। अप्रैल-सितम्‍बर, 2017 में वर्षानुवर्ष मुद्रास्‍फीति 2.6 प्रतिशत थी जबकि पूर्ववर्ती वर्ष की तदनुरूप अवधि में यह 5.4 प्रतिशत थी। 

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मुद्रास्‍फीति लगातार संतोषजनक स्‍तर पर बनी हुई है

 

 

 

 वैश्विक मंदी के बावजूद वैदेशिक क्षेत्र के संकेतकों में उल्‍लेखनीय सुधार हुआ है 

  • अपेक्षाकृत कम मुद्रास्‍फीति के साथ-साथ चालू खाता घाटे के कम स्‍तर के कारण भी पिछले तीन चार वर्षों में काफी अधिक वृहत आर्थिक स्थिरता आई है। 2011-12 और 2012-13 में चालू खाता घाटा 4 प्रतिशत से अधिक के खतरनाक और ऊंचे स्‍तर पर था जिसके चलते रुपये की विनिमय दर में काफी अस्थिरता पैदा हो गई थी। चालू खाता शेष में आए उल्‍लेखनीय सुधार जो चालू खाता घाटे के अपेक्षाकृत कम स्‍तरों में दिखाई देता है, से विनिमय दर की अस्थिरता में भी काफी कमी आई है। 

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चालू खाता 2 प्रतिशत से कम की सुरक्षित परिधि में बना हुआ है

 

 

  • वैश्विक व्‍यापार की मात्रा (माल और सेवाएं) की वृद्धि में गिरावट जारी रही और यह 2015 के 2.8 प्रतिशत से कम होती हुई 2016 में 2.2 प्रतिशत के स्‍तर पर आ गई (आईएमएफ की डब्‍ल्‍यूईओ, अक्‍तूबर, 2017)। यह संभावना है कि इसमें गति आएगी और यह 2017 में 4.2 प्रतिशत और 2018 में 4.0 प्रतिशत की दर पर रहेंगे। 

भारत का जिंस व्‍यापार 

  • वर्ष 2015-16 में निर्यातों में गिरावट हुई जिसकी मुख्‍य वजह मंद हो गई वैश्विक मांग थी और आयातों में गिरावट हुई जिसकी वजह कच्‍चे तेल की अंतर्राष्‍ट्रीय कीमतों में आई तीव्र गिरावट और अन्‍य वस्‍तुओं की कीमतों में आई कमी थी। 201617 के दौरान निर्यातों में 5.2 प्रतिशत की वृद्धि हुई जबकि आयातों में 0.9 प्रतिशत की वृद्धि हुई जिससे व्‍यापार घाटे को कम करने में मदद मिली। अप्रैल-सितम्‍बर, 2017 के दौरान जिंस निर्यातों और आयातों में डालर मूल्‍य में क्रमश: 11.5 और 25.1 प्रतिशत की वृद्धि हुई जिसके परिणामस्‍वरूप व्‍यापार घाटा अप्रैल-सितम्‍बर, 2016 के 43.4 बिलियन अमरीकी डालर से बढ़कर अप्रैल-सितम्‍बर, 2017 में 73.1 बिलियन अमरीकी डालर हो गया। 
  • चालू खाता घाटा (सीएडी-कैड) 2015-16 में जीडीपी का 1.1 प्रतिशत था जबकि 2014-15 में यह जीडीपी का 1.3 प्रतिशत था। 2016-17 में कैड और अधिक कम होकर जीडीपी का  0.7 प्रतिशत रह गया जिसकी वजह व्‍यापार घाटे में आया संकुचन था जो 2015-16 के 130.1 बिलियन अमरीकी डालर से कम होकर 2016-17 में 112.4 बिलियन अमरीकी डालर हो गया था। तथापि, चालू खाता घाटा 2016-17 की पहली तिमाही के दौरान के 0.4 बिलियन अमरीकी डालर (जीडीपी का 0.1 प्रतिशत) से बढ़कर 2017-18 की पहली तिमाही के दौरान 14.3 बिलियन अमरीकी डालर (जीडीपी का 2.4 प्रतिशत) हो गया। जिसकी मुख्‍य वजह इस अवधि में उच्‍च व्‍यापार घाटा था। 

भारी विदेशी प्रत्‍यक्ष निवेश 

2016-17 में भारत में सकल एफडीआई आगम 60.2 बिलियन अमरीकी डालर रहा जबकि 2015-16 में यह 55.6 बिलियन अमरीकी डालर और 2014-15 में 45.1 बिलियन अमरीकी डालर रहे थे जो भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था के संबंध में बेहतर वैश्विक विश्‍वास का संकेत है। अप्रैल-अगस्‍त, 2017 के दौरान अर्थव्‍यवस्‍था में सकल एफडीआई आगम 30.4 बिलियन अमरीकी डालर रहा जो पिछले वर्ष की तदनुरूप अवधि में 23.3 बिलियन अमरीकी डालर के आगम की तुलना में अपेक्षाकृत अधिक थे। 

विदेशी मुद्रा भंडार 

विदेशी मुद्रा भंडार मार्च- अंत 2017 में 370 बिलियन अमरीकी डालर के स्‍तर पर थे जबकि मार्च- अंत 2016 में 360.2 बिलियन अमरीकी डालर के स्‍तर पर थे। 13 अक्‍तूबर, 2017 की स्थिति के अनुसार, विदेशी मुद्रा भंडार 400 बिलियन अमरीकी डालर से अधिक हो गए। पिछले दो-एक वर्षों में विदेशी मुद्रा भंडार में इस वृद्धि के चलते मुद्रा भंडार पर आ‍धारित वैदेशिक क्षेत्र के अधिकतर असुरक्षा संबंधी संकेतकों में सुधार हुआ है। 

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विदेशी मुद्रा भंडार की 400  बिलियन अमरीकी डालर तक पहुंचने की यात्रा 

 

 

 राजकोषीय स्थिति और राजकोषीय समेकन में सतत सुधार जारी है 

पिछले कुछ वर्षों में राजकोषीय घाटे में सतत समेकन हुआ है। केन्‍द्र सरकार का राजकोषीय घाटा 2011-12 में लगभग 6 प्रतिशत के खतरनाक रूप से उच्‍च स्‍तर पर पहुंच गया था और 2011-12 तथा 2013-14 के बीच लगभग 5 प्रतिशत की औसत पर रहा। सरकार राजकोषीय समेकन के पथ पर चलने के लिए प्रतिबद्ध है तथा इसने राजकोषीय घाटे को 2016-17 में जीडीपी के 3.5 प्रतिशत तक लाने और 2017-18 में बजट अनुमानों के अनुसार इसे और कम करके 3.2 प्रतिशत तक लाने की दृढ़ता दर्शाई है। 

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3 प्रतिशत के स्‍तर पर पहुंचने की ओर अग्रसर सतत राजकोषीय समेकन

 

 

 जीडीपी के अनुपात के रूप में केन्‍द्र सरकार का राजकोषीय घाटा 2015-16 में 3.9 प्रतिशत था और 2016-17 (संशोधित अनुमान) में 3.5 प्रतिशत था और 2017-18 में इसके 3.2 प्रतिशत होने की बजटीय व्‍यवस्‍था है। व्‍यय को युक्तिसंगत बनाने पर ध्‍यान देकर तथा सरकारी व्‍यय में व्‍याप्‍त दोषों को दूर करके और राजस्‍व जुटाने के नवीन प्रयासों ने यह स्थिति हासिल करने में मदद की है। 

आंतरिक और वैदेशिक सरकारी ऋण स्‍टाक की दृष्टि से, भारत को राजकोषीय शोधन क्षमता संबंधी गंभीर मुद्दों का सामना नहीं करना है। भारत सरकार का कुल बकाया देयताओं और जीडीपी अनुपात 2016-17 (सं.अ.) के अंत तक 46.7 प्रतिशत के स्‍तर से गिरकर 2017-18 के अंत तक 44.7 प्रतिशत हो जाने की बजटीय व्‍यवस्‍था है। 

कर राजस्‍व (केन्‍द्र को निवल) में 2016-17 में 16.8 प्रतिशत की वृद्धि की गई (अनंतिम वास्‍तविक) और 2017-18 में इसमें 11.3 प्रतिशत की वृद्धि की बजटीय व्‍यवस्‍था है। 

अप्रैल-अगस्‍त के दौरान राजकोषीय घाटा व्‍यय की फ्रंट लोडिंग के कारण पूरे वर्ष के बजटित राजकोषीय घाटे का 96 प्रतिशत है, लेकिन हमें पूरा विश्‍वास है कि जीडीपी के 3.2 प्रतिशत के राजकोषीय घाटे के पूरे वर्ष के बजटित अनुपात की सीमा लांघी नहीं जाएगी। 

  1. परिवर्तनकारी सुधार 

माल और सेवा कर (जीएसटी) के रूप में क्रांतिकारी सुधार 

अनेक केन्‍द्रीय और राज्‍य अप्रत्‍यक्ष करों को समाप्‍त करने वाला, जीएसटी एक ऐसा क्रांतिकारी सुधार है जो 1 जुलाई, 2017 से कार्यान्वित किया गया है। जीएसटी का शुभारम्‍भ एक ऐतिहासिक आर्थिक और राजनीतिक उपलब्धि का द्योतक है जो भारतीय कर और आर्थिक सुधारों की प्रक्रिया में अभूतपूर्व घटना है। इसने ढांचागत सुधारों के लिए नई आशा जगाई है। इसके परिणास्‍वरूप, देश भर में एकीकृत कर प्रणाली शुरू हुई है और इसमें माल की आवाजाही में लगी परिवहन संबंधी अड़चनों को हटाने में मदद की है जिसके परिणामस्‍वरूप उनकी आवाजाही में तेजी आई है और एक साझा बाजार सृजित करने में, भ्रष्‍टाचार और हेराफेरी कम करने में तथा मेक इन इंडिया कार्यक्रम में और सहायता मिली है। आशा है कि इससे राजस्‍व, निवेश और मध्‍यावधिक आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा। सरकार और जीएसटी परिषद द्वारा सुलझाई जा रही आरंभिक समस्‍याओं के बावजूद, जुटाए गए राजस्‍व के रूप में आरंभिक परिणाम उत्‍साहवर्धक प्रतीत होते हैं। 

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माल और सेवा कर: एक राष्‍ट्र एक कर 

 

भ्रष्‍टाचार और हेराफेरी में कमी

उत्‍पादन और बिक्री का संगठित रूप

सहकारी राजकोषीय संघवाद 

  • सभी जांच चौकियां समाप्‍त। खपत आधारित कराधान
  • अनेकानेक करों की समाप्ति। मेक इन इंडिया को प्रोत्‍साहन
  • छोटे कारोबारियों और निर्यातकों पर अनुपालन के बोझ को कम करने के उपाय किए गए। 

शोधन अक्षमता और दिवालियापन संहिता 

दूसरा महत्‍वपूर्ण सुधार शोधन अक्षमता और दिवालियापन संहिता, 2016 (संहिता) है जिसका लक्ष्‍य कंपनियों और सीमित देयतावाली संस्‍थाओं (सीमित देयतावाली भागीदारी और अन्‍य सीमित देयता वाली संस्थाओं सहित), सीमारहित देयतावाली भागीदारियों और व्‍यक्तियों जो विभिन्न कानूनों के तहत डील होते हैं, की शोधन अक्षमता से संबंधित कानूनों को एकीकृत करके एकल विधान में लाना है। यह संहिता वैश्विक स्तर की और कुछ मामलों में उससे भी बेहतर स्तर की समग्र, आधुनिक और सुदृढ़ शोधन अक्षमता और दिवालियापन व्यवस्था प्रदान करती है। 

शोधन अक्षमता और दिवालियापन व्यवस्था 

  • भारत में संस्‍थापित एक प्रभावी और अंतरराष्‍ट्रीय स्‍तर पर सर्वोत्‍तम कार्यप्रणाली पर आधारित शोधन अक्षमता व्‍यवस्‍था।
  • सुदृढ़ समयबद्ध प्रक्रिया को सुनिश्चित करने वाला त्‍वरित समाधान।
  • जून तक एनसीटीएल के समक्ष 2050 आवेदन दायर किए गए।
  • 30 सितंबर, 2017 की स्थिति के अनुसार कारपोरेट शोधन अक्षमता समाधान प्रक्रिया के लिए 237 आवेदन स्‍व्‍ीकार किए गए।
  • 22 स्‍वेच्छिक परिसमापन।
  • 1054 शोधन अक्षमता कार्मिकों का पंजीकरण।
  • समाधान भी प्रारंभ किया गया है।
  • निधारित समयावधि में समाधान प्रक्रिया सफल नहीं होती है, तो परिसमापन प्रक्रिया प्रारंभ होती है।
  • इस चक्र को पूरा करने के लिए वित्‍तीय समाधान और निक्षेप बीमा विधेयक, 2017 पेश किया गया।

सरकार ने इस संहिता के कार्यान्‍वयन के लिए त्‍वरित गति से कार्रवाई की है। अभी तक एनसीएलटी को लगभग 2050 आवेदन प्राप्‍त हुए हैं जिनमें से 112 आवेदन स्वीकार किए गए हैं और 146 आवेदन खारिज किए गए अथवा वापस लिए गए हैं। स्वीकृत आवेदन के अंतर्गत कुछ लाख रूपए से लेकर कुछ हजार करोड़ रूपये की चूक अंतर्ग्रस्‍त है। आरबीआई द्वारा 12 बडे़ चूककर्ताओं की घोषणा करने से इसका दायरा और बढ़ जाएगा। 

विमुद्रीकरण सहित काले धन के विरूद्ध धर्मयुद्ध 

(क) काले धन को नियंत्रित करने के लिए ढ़ांचे की निगरानी और समीक्षा के लिए मई, 2014 में गठित काले धन के संबंध में विशेष जांच टीम; (ख) 01 जुलाई, 2015 से लागू किए गए काला धन (अघोषित विेदशी आय और आस्‍तियां) और टैक्‍स आरोपण अधिनियम, 2015; (ग) आय घोषणा  योजना, 2016; और (घ) 01 नवंबर, 2016 से प्रभावी रूप से लागू किए गए समग्र बेनामी लेनदेन (प्रतिबंध) संशोधन अधिनियम, 2016 जैसी पहलों ने काले धन के सृजन और धारिता के विरूद्ध छेडे़ गए युद्ध में सफलता दिलाई। 08 नवंबर, 2016 से प्रभावित उच्च मूल्य वर्ग के नोटों के विमुद्रीकरण से काले धन पर भारी प्रहार हुआ है। 

आवास विकास 

सरकार ने अर्थव्यवस्था में वृद्धि को बढ़ावा देने के लिए बजट सत्र 2017-18 में विभिन्न उपायों की घोषणा की है जिनमें अन्य बातों के साथ-साथ सस्ते आवास को अवसंरचना का दर्जा देकर अवसंरचना विकास की गति बढाना, राजमार्ग निर्माण को अधिक अवंटन, तटीय संपर्क पर विशेष ध्यान देना शामिल है। अन्य विकास संवर्धन उपायों में निम्नलिखित शामिल हैः 50 करोड़ रुपए तक वार्षिक कारोबार करने वाली कंपनियों के लिए कम आयकर; मैट क्रेडिट को वर्तमान की 10 वर्षों की बजाए 15 वर्ष की अवधि तक आगे स्थानांतरित करने की अनुमति देना; व्यवसाय करना आसान बनाने को उन्नत बनाने के लिए और उपाय तथा डिजीटल अर्थव्यवस्था को मुख्य रूप से आगे बढ़ाना शामिल है। बजट में भी अधिक कृषि ऋण देने और काफी हद तक रोजगार बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया। 

संस्थागत सुधार 

संस्थागत सुधारों में, व्यय का यौक्तिकीकरण और लक्ष्य एवं प्रत्यक्ष लाभ अंतरण पर विशेष जोर देते हुए सार्वजनिक सुपुर्दगी में रिसाव को प्रगामी रूप से समाप्त करना सुदृढ़ी कारगर वित्तीय समावेषण कार्यक्रम की शुरूआत; अभिशासन और निर्णय लेने में नीतिगत पारदर्शिता लाने के उपाय; डिस्कॉम के लिए उज्जवल डिस्कॉम आश्वासन योजना (यूडीएवाई) कार्यक्रम; विभिन्न क्षेत्रों में विदेशी प्रत्यक्ष निवेश का उदारीकरण; और भारत में बौद्धिक संपदा हेतु भावी दिशा-निर्देश बनाने के लिए राष्ट्रीय बौद्धिक संपदा अधिकार नीति का अनुमोदन।

व्यवसाय करना आसान बनाना 

प्रायोगिक मेक इन इंडिया कार्यक्रम के इर्दगिर्द संपूरक का निर्माण, इसमें व्यवसाय करना आसान बनाने में सुधार लाने के लिए व्यापक उपाय, स्टार्ट अप इंडिया और स्टैंड अप इंडिया पहलों के अंतर्गत उभरते उद्यमशील प्रतिभा को प्रोत्साहित करना तथा विज्ञापन एवं वैश्विक अभियान में प्रत्यक्ष रूप से व्यवसायिक केंद्र के रूप में भारत के वैश्विक दर्जा में सुधार लाया है। भारत ने, एकीकृत भुगतान केंद्र वाले सप्ताह के 24 घंटे एकल पोर्टल पर सभी व्यापार निवेश संबंधी निकासी और अनुपालना उपलब्ध करके व्यापार और निवेशक अनुकूल प्रास्थिति के सृजन के लिए ईबिज मंच शुरू किया है। 

विदेशी प्रत्यक्ष निवेश नीति के क्षेत्र में अमूलचूल परिवर्तनएफडीआई के लिए अधिकांश क्षेत्र स्वतः मार्ग पर 

सरकार ने 20 जून, 2016 को एफडीआई के क्षेत्र को एकाएक उदार बना दिया, इसका उद्देश्य मुख्य रूप से रोजगार और नौकरी के सृजन को गति प्रदान करना है। नवम्बर, 2015 में घोषित प्रमुख परिवर्तनों के बाद यह दूसरा प्रमुख सुधार है। अब छोटी सी नकारात्मक सूची को छोड़कर अधिकांश क्षेत्र स्वतः अनुमोदन मार्ग पर कार्य करेंगे। नीति में शुरू किए गए परिवर्तनों में क्षेत्रीय अंतराल बढ़ाना, स्वतः मार्ग के अंतर्गत अधिक क्रियाकलापों को लाना और विदेशी निवेश के लिए शर्तों को आसान बनाना शामिल है। इन परिवर्तनों से भारत एफडीआई के लिए विश्व में सबसे अधिक खुला देश बन गया है। 

महत्वकांक्षी विनिवेश कार्यक्रम 

पिछले तीन वर्षों में सरकारी क्षेत्र के उपक्रमों में विनिवेश से प्रगामी रूप से अधिक राजस्व जुटाया गया है और वर्तमान वित्त वर्ष में और अधिक राजस्व जुटाने का सरकार का बहुत ही महत्वकांक्षी लक्ष्य है। 

अब तक का सबसे अधिक विनिवेश कार्यक्रम 

पूर्वोत्तर क्षेत्रों में निर्धनतम परिवारों के लिए कल्याणकारी कार्यक्रम पहुंचाना 

अत्यन्त निर्धनों की सहायता करने तथा उनका जीवन स्तर सुधारने के लिए विशेषकर महिलाओं के लिए सरकार ने मई, 2016 और जून, 2017 के बीच 3 करोड़ से भी अधिक एलपीजी कनेक्शन मुहैया कराया है, जो गंदगी भरे पारंपरिक ईंधनों की जगह लेंगे जोकि स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हैं। इसी प्रकार मानवकृत तथा प्राकृतिक आपदाओं के सदमें से गरीब जनता को सुरक्षित करने के लिए प्रधानमंत्री जीवन ज्योति योजना और प्रधानमंत्री स्वस्थ बीमा योजना के अंतर्गत सितम्बर, 2017 तक कुल 14 करोड़ व्यक्तियों का नामांकन किया गया। 

प्रत्येक भारतीय को सम्मान देना और देश के दुरस्थ जगहों में अत्यन्त निर्धनों को सेवा देना

III.  अवसंरचना (इन्फ्रास्ट्रक्चर) पर बल 

सरकार ने रोजगार को बढ़ावा देने और आर्थिक विकास को नये सिरे से गति प्रदान करने के उद्देश्य से अवसंरचना पर सार्वजनिक व्यय में निरंतर वृद्धि की है। इस वर्ष 21.46 लाख करोड़ रुपए के बजटीय व्यय (पिछले वर्ष की तुलना में 1.2 लाख करोड़ रुपए की वृद्धि) में से, भारत सरकार का कुल व्यय 11.47 लाख करोड़ रुपए (सितम्बर,  2017) से अधिक हो चुका है।  

इस अभियान का विशेष जोर ग्रामीण सड़कों, आवासन, रेलवे, विद्युत, राजमार्गों और डिजिटल अवसंरचना सहित महत्वपूर्ण विकास के क्षेत्रों पर है। वर्ष 2017-18 के लिए भारत सरकार का पूंजीगत व्यय का लक्ष्य 3.09 लाख करोड़ रुपए है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 31.28 प्रतिशत अधिक है, जिसमें से सितम्बर, 2017 तक 1.46 लाख करोड़ रुपए की राशि पूंजीगत कार्यों पर खर्च की जा चुकी है। इसके अलावा, भारत सरकार ने वर्ष 2017-18 के लिए केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों (सीपीएसई) के लिए पूंजीगत व्यय लक्ष्य 3.85 लाख करोड़ रुपए नियत किया है, जिसमें से सितम्बर, 2017 तक सीपीएसई द्वारा 1.3 लाख करोड़ रुपए के पूंजीगत व्यय के खर्च का लक्ष्य प्राप्त किया जा चुका है। 

रेलवे 

  • रेलवे के लिए पूंजीगत व्यय हेतु 1,31,000 करोड़ रुपए का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस लक्ष्य के विपरीत, 50,762 करोड़ रुपए का व्यय किया जा चुका है। मुख्य जोर सुरक्षा को बेहतर बनाने, नई लाइनें बनाने और यात्रियों को सुख-सुविधाएं प्रदान करने के लिए अवसंरचना के उन्नयन पर है। 
  • निम्नलिखित महत्वपूर्ण कार्य पूरे किए गए : नई लाइनें (निर्माण) (4531.93 करोड़ रुपए), गेज बदलना (1842.24 करोड़ रुपए), ईबीआर-भागीदारी (11504.29 करोड़ रुपए), पटरी को डबल करना (4069.60 करोड़ रुपए), यातायात सुविधाएं (517.05 करोड़ रुपए), रोलिंग स्टॉक (8214.11 करोड़ रुपए), पट्टे पर दी गई परिसंपत्तियां – मुख्य घटक (7781.97 करोड़ रुपए), रोड ओवर/अंडर ब्रिज (1068.09 करोड़ रुपए), पटरियों का नवीकरण (2837.72 करोड़ रुपए), विद्युतीकरण परियोजनाएं (1119.17 करोड़ रुपए), यात्रियों को सुख-सुविधाएं (539.73 करोड़ रुपए), जेवी/एसपीवी में निवेश (1263.52 करोड़ रुपए), महानगरीय परिवहन परियोजनाएं (446.16 करोड़ रुपए) आदि। 

सौभाग्य (प्रधानमंत्री सहज बिजली हर घर योजना) 

  • इस कार्यक्रम के अंतर्गत, मार्च, 2019 तक देश में बिजली प्राप्त करने से वंचित रह गए सभी उपभोक्ताओं को कनेक्टिविटी और बिजली कनेक्शन प्रदान करने के लिए सर्वसुलभ विद्युतीकरण का कार्य शुरू किया जा रहा है। यह कार्यक्रम ग्रामीण विद्युतीकरण की चालू योजना (दीन दयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना) के अतिरिक्त है। 
  • इसमें प्रस्तावित परिव्यय 16,320 करोड़ रुपए है, जिसमें भारत सरकार की 12,50 करोड़ रुपए की सहायता शामिल है। 

ग्रामीण सड़कें  प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) : 

  • पीएमजीएसवाई के फेस-I और II को पूरा करने के लिए, भारत सरकार का राज्‍यों के साथ मिलकर 2017-18 से शुरू करके 03 वर्षों में 88,185 करोड़ रुपए की राशि खर्च करने का प्रस्‍ताव है। इससे 1,09,302 किलोमीटर की ग्रामीण सड़कों का निर्माण होगा, जिससे 36,434 बस्‍तियों को लाभ होगा। 
  • इसके अतिरिक्‍त, 11,725 करोड़ रुपए की लागत की सड़कों का निर्माण 2019-20 तक पूरा कर लिया जाएगा, जिसमें मौजूदा सड़कों के 5411 किलोमीटर का उन्‍नयन और 44 एलडब्‍ल्‍यूई जिलों में नई सड़कों का निर्माण शामिल है। 

पीएम आवास योजना (पीएमएवाई) – शहरी और ग्रामीण 

  • निर्माण सेक्‍टर को प्रोत्साहन देने के लिए सभी के लिए सार्वभौमिक किफायती आवासन का क्रियान्‍वयन किया जा रहा है और इसे प्रोत्‍साहित किया जा रहा है। पीएमएवाई (शहरी) के अधीन, अगले 03 वर्षों में 1,85,069 करोड़ रुपए के परिव्‍यय से 1.2 करोड़ यूनिटों का निर्माण किया जाएगा। पीएमएवाई (ग्रामीण) के अधीन, मार्च, 2019 तक केंद्र और राज्‍यों द्वारा 126,795 करोड़ रुपए के परिव्‍यय से 1.02 करोड़ यूनिटों (इस वर्ष 51 लाख यूनिट) का निर्माण किया जाएगा। 

भारतमाला परियोजना 

  • अधिक दक्ष परिवहन प्रणाली उपलब्‍ध कराने की अपनी प्रतिबद्धता को आगे बढ़ाते हुए, सरकार ने सड़क सेक्‍टर के अवरोधों को समाप्‍त किया है और राजमार्ग विकास एवं सड़क निर्माण कार्यक्रम को महत्‍वपूर्ण रूप से बढ़ावा दिया है। देशभर में माल और लोगों के आवागमन की सुगमता को और सुविधाजनक बनाने के लिए, सरकार एक नए अम्‍ब्रैला कार्यक्रम की शुरूआत करने जा रही है। 83,677 किलोमीटर की सड़कों के लिए, इस सड़क निर्माण कार्यक्रम में अगले 05 वर्षों में 6.92 लाख करोड़ रुपए का पूंजीगत परिव्‍यय शामिल है। 
  • इसमें से, 5,35,000 करोड़ रुपए के परिव्‍यय से क्रियान्‍वित की जाने वाली भारतमाला परियोजना से रोजगार के 14.2 करोड़ श्रमदिवसों का सृजन होगा। 
  • बीएमपी के अधीन सड़कों (34,800 किलोमीटर) की निम्‍नलिखित श्रेणियां प्रस्‍तावित की गई हैं: 
  • आर्थिक कॉरिडोर (9000 किलोमीटर)
  • अंतर कॉरिडोर और फीडर मार्ग (6000 किलोमीटर)
  • राष्‍ट्रीय कॉरिडोर क्षमता सुधार (5000 किलोमीटर)
  • सीमा सड़क और अंतरराष्‍ट्रीय कनेक्टिविटी (2000 किलोमीटर)
  • तटीय सड़क और पत्‍तन कनेक्टिविटी (2000 किलोमीटर)
  • ग्रीन फील्‍ड एक्‍सप्रेसवे (800 किलोमीटर)
  • शेष एनएचडीपी निर्माण कार्य (10,000 किलोमीटर) 
  • भारतमाला निर्माण कार्य, एनएचएआई, एनएचआईडीसीएल, एमओआरटीएच और राज्‍य पीडब्‍ल्‍यूडी के माध्‍यम से 05 वर्षों में 2021-22 तक संपन्‍न किए जाने का प्रस्‍ताव है। 
  • एनएचएआई, एनएचआईडीसीएल और सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय को महत्‍वपूर्ण शक्‍तियां प्रत्‍यायोजित की गई हैं ताकि तीव्र कार्यान्‍वयन को समर्थ बनाया जा सके। 
  • बीएमपी के लिए निधियन: बाजार से ऋण के रूप में 2.09 लाख करोड़ रुपए जुटाए जाएंगे, पीपीपी के माध्‍यम से 1.06 लाख करोड़ रुपए जुटाए जाएंगे और केंद्रीय सड़क निधि (सीआरएफ) की प्राप्‍तियों, टीओटी मुद्रीकरण अधिप्राप्‍तियों तथा एनएचएआई के टोल संग्रहण से 2.19 लाख करोड़ रुपए दिए जाने हैं। 
  • भारतमाला के अधीन 34,800 किलोमीटर के अतिरिक्‍त, अन्‍य चालू स्‍कीमों के अधीन निर्माण कार्यों में से 48,877 किलोमीटर के शेष निर्माण कार्य का कार्यान्‍वयन 1.57 लाख करोड़ रुपए के परिव्‍यय से एनएचएआई/एमओआरटीएच द्वारा साथ-साथ किया जाएगा। इस का वित्‍तपोषण सीआरएफ से 0.97 लाख करोड़ रुपए और सकल बजटीय सहायता के रूप में 0.59 लाख करोड़ रुपए प्रदान करके किया जाएगा। 
  • टीओटी मुद्रीकरण: पहली बार, एक न्‍यून जोखिम टोल – प्रचालन – अनुरक्षण – अंतरण (टीओटी) मॉडल के अधीन 82 कार्यरत राजमार्गों का मुद्रीकरण 34,000 करोड़ रुपए के निजी संभावित निवेश के साथ प्रारंभ किया गया है। एनएचएआई द्वारा 6258 करोड़ रुपए की संभावित मुद्रीकरण कीमत वाले 64 किलोमीटर के 09 एनएच खंडों के पहले बंडल के लिए निविदा आमंत्रित की गई है। 

अर्थव्यवस्था के मजबूत वृहत-आर्थिक आधारभूत तत्वों और पिछले वर्षों की तुलना में पर्याप्त रूप से संवर्धित स्तरों पर सतत लोक व्यय को देखते हुए, सरकार ने देश में निवेश विषयक माहौल को सुधारने हेतु अनेक उपाय किए हैं। सरकार द्वारा किए गए व्यापक आर्थिक सुधार कार्यों के परिणामस्वरूप विदेशी प्रत्यक्ष निवेश विगत 3 वर्ष में अभूतपूर्व स्तर पर है। तथापि, निजी क्षेत्रक घरेलू निवेश अतीत में अग्रवर्ती ऋणों के बढ़ते सम्मिश्रण द्वारा प्रभावित होता रहा जो अब असहनीय बन गया है। निवेश विषयक सामान्य माहौल को प्रभावित करने के अलावा, इन अनर्जक ऋणों (नॉन-फरर्मिंग लोन्स) ने प्रावधान के अभूतपूर्व स्तरों को, विशेषकर सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में, भी आवश्यक बना दिया है। इसके परिणामस्वरूप, उनकी उधार देने की सामर्थ्य प्रभावित हुई है जिससे विशेष रूप से मध्यम और लघु क्षेत्र पर असर पड़ा है। यह देखा जा सकता है कि जहां निकट अतीत में अनेक कार्पोरेट बांड बाजार में कदम रख चुके हैं, वहां एमएसएमई ही ऐसे हैं जो बैंकों की असामर्थ्य के कारण पूंजी से वंचित हो गए हैं। ये बैंक अतृप्त प्रावधान (डिमांडिंग प्रविजनिंग) मानदंड के अत्यधिक बोझ से पीड़ित हैं। इससे सहायक माहौल सृजन का असरदार उपाय करने की जरूरत पड़ी जिसमें पीएसबी,  निजी क्षेत्र, विशेष रूप से मध्यम और लघु स्तरीय उद्योगों, को ऋण प्रदान कर सकें। 

 

  1. IVसार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का पुनर्पूंजीकरण 
  • सरकार सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को अभूतपूर्व मजबूती देने के लिए प्रतिबद्ध है 
  • लंबे समय से चली आ रही अनर्जक आस्तियों को समाप्त करने के लिए बैंकों के पुनर्पूंजीकरण हेतु 2,11,000 करोड़ रुपये की आरंभिक राशि उपलब्ध कराई जाएगी 
  • पुनर्पूंजीकृत बैंकों के साथ विकास के पथ पर आगे बढ़ने के लिए बैंकों द्वारा ऋण में वृद्धि 
  • बैंक रोजगार सृजन और विकास कार्यों के लिए सूक्ष्मलघु और मध्यम उद्यमों को बड़ी राशि कर्ज देंगे     

सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को आरंभिक निवेश हेतु धनराशि उपलब्ध कराने के लिए बैंकों के पूंजीकरण की दिशा में एक बड़ा कदम उठाने का निर्णय लिया है ताकि बैंकों द्वारा दिए जाने वाले ऋण की राशि में वृद्धि हो और अधिकाधिक रोजगार सृजन हो सके। इसके लिए चालू वर्ष में अधिकतम आवंटन,  तथा आगामी दो वर्षों के दौरान लगभग 2,11,000 करोड़ रुपये का बजटीय प्रावधान किया जाएगा जिसके लिए 18,139  करोड़ रुपये का बजटीय प्रावधान, लगभग 1,35,000 करोड़ रुपये का पुनर्पूंजीकरण बांड जारी करने तथा शेष राशि के लिए बैंकों द्वारा बाजार से पूंजी जुटाने और सरकारी इक्विटी को भुनाकर (लगभग 58,000 करोड़ रुपये संभावित) धनराशि जुटाने की आवश्यकता है। 

 

 

सरकार का कार्य केवल सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के पूंजीकरण तक ही सीमित नहीं है। पूंजीकरण के साथ ही उन्हें वित्तीय प्रणाली में प्रमुख भूमिका निभाने में सक्षम बनाने के लिए सुनिश्चित कदम उठाए जाएंगे। जिन सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की बैंकिंग क्षेत्र में 70 प्रतिशत बाजार हिस्सेदारी है उन्हें और अधिक विकास करने के लिए और बर्धित ऋण की राशि को उठाने के लिए प्रेरित किया जाएगा। इस दिशा में देशभर में ‘मुद्रा प्रोत्साहन’ का अभियान चलाकर काम शुरू कर दिया गया है। 

वित्तपोषण और बाजार तक पहुंच में वृद्धि करके सूक्ष्मलघु एवं मध्यम उद्यमों के विकास पर व्यापक बल दिया जाएगा तथा 50 कलस्टरों में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों को वित्तपोषित करने का अभियान चलाया जाएगा। इस संबंध में संबंधित मंत्रालयों द्वारा नेतृत्व किया जाएगा एवं अभियान को गति प्रदान की जाएगी, ऋण के लिए किए गए आवेदनों पर बैंकों द्वारा निर्बाध रूप में त्वरित कार्रवाई की जाएगी। मूल्यांकन प्रक्रिया को कम करने और सही ऋण आवेदनों को प्रस्तुत करने के लिए फिनटेक कंपनियों (वित्तीय प्रौद्योगिकी कंपनियों) से सहायता ली जाएगी। सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों को निम्नलिखित के माध्यम से सहायता प्रदान करके प्रोत्साहित किया जाएगा। 

  • नकदी चक्र को कम करने के लिए बड़े सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों द्वारा 90 दिनों के भीतर व्यापार प्राप्य इलेक्ट्रानिक छूट प्रणाली (टीआरईडीएस) पंजीकरण को अनिवार्य बनाना
  • क्षेत्रक-विशिष्ट मुद्रा वित्तीय उत्पाद जैसेकि मुद्रा लेदर, मुद्रा टेक्सटाइल, आदि
  • तेजी से ऋण उपलब्ध कराने के लिए 100 बैंक अनुमोदित सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों से संबंधित परियोजनाओं को आदर्श बनाया गया है
  • संपुष्ट in पोर्टल शुरू किया गया है ताकि बैंकों द्वारा सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों से संबंधित परियोजनाओं को वित्तपोषित करने के लिए प्रतिस्पर्धा आधार पर कार्य किया जाए।
  • जीईएम (गवर्नमेंट इलेक्ट्रानिक बाजार) पोर्टल और ई-वाणिज्य प्लेटफॉर्म पर सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों को पंजीकृत करने के लिए अभियान चलाया जाए

यह याद रखा जाए कि अतिरिक्त क्षमता से युक्त किंतु उपयुक्त परिश्रम को निम्न मात्रा में करने वाले सेक्टरों को बहुत अधिक ऋण देने के कारण दबाव में स्थित आस्तियां सृजित हुई हैं जो मार्च 2014 तक बढ़कर 11.9 प्रतिशत हो गई है। 

स्पष्ट और पूर्णत: तैयार किए गए बैंक तुलन-पत्रों की जांच के लिए वर्ष 2015 की गई आस्ति गुणवत्ता समीक्षा (एक्यूआर) से यह पता चला कि काफी अधिक मात्रा में अनर्जक आस्तियां सृजित हो गई हैं। दबाव में स्थित ऋण जिन्हें पूर्व में ऋण पुनर्गठन के लिए दी गई छूट के अंतर्गत चुकाया नहीं गया,  के लिए हुई हानि के अंतर्गत स्थित ऋण का अनर्जक आस्ति के रूप में पुनर्वर्गीकरण किया गया जिसके लिए धनराशि उपलब्ध कराई गई। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने अनर्जक आस्तियों की पहचान करके उन्हें निपटाने की प्रक्रिया आरंभ की तथा आपेक्षित हानि के लिए राशि उपलब्ध कराई। 

सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में सकल अनर्जक आस्ति 2015 के बाद से तेजी से बढ़ी और मार्च 2015 के 5.43 प्रतिशत (2,78,466 करोड़ रुपये) से बढ़कर जून 2017 में 13.69 प्रतिशत (7,33,137 करोड़ रुपये) हो गई। अनुमानित हानि के लिए उपलब्ध कराई जाने वाली राशि में पर्याप्त वृद्धि हुई। 2014-15 से 2017-18 की पहली तिमाही तक 3,79,080 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया जबकि पूर्ववर्ती 10 वर्षों के दौरान केवल 1,96,937 करोड़ रुपये का ही प्रावधान किया गया था। यह दबाव में स्थित ऋण के कारण अनुमानित हानि से निपटने का सही उपाय था। 

सरकार ने पीएसबी को पारदर्शी और अधिक दक्ष बनाने के लिए स्वच्छता अभियान के साथ अन्य सुधारों को पुनः पूंजीकृत किया है और उन्हें प्रारंभ किया है।  इसके लिए बैंक बोर्ड ब्यूरो स्थापित किया गया था तथा पीएसबी में गैर-कार्यकारी अध्यक्षों की नियुक्ति हेतु कदम उठाए गए थे। 

पीएसबी के पुनःपूंजीकरण तथा आमूल-चूल परिवर्तन के लिए सरकार ने दिनांक 14-8-2015 को इंद्रधनुष योजना की घोषणा की। सरकार ने 2018-19 तक 1,80,000 करोड़ रु. की पूंजी की आवश्यकता की कल्पना की है। तदनुसार, सरकार ने 70,000 करोड़ रु. का प्रावधान किया तथा बैंकों द्वारा 1,10,000 करोड़ रु. की पूंजी को बाजार से जुटाने का प्रस्ताव रखा। अभी तक, सरकार ने पीएसबी में 51,858 करोड़ रु. की पूंजी लगायी है। एक्यूआर और एनपीए मान्यता के कराण दवाब के अंतर्गत पीएसबी अभी तक बाजार से 21,261 करोड़ रु. की पूंजी जुटा पाई है। दिसंम्बर, 2015 में पीएसबी के साथ आरबीआई द्वारा एक्यूआर निष्कर्षों को साझेदारी से पहले इंद्रधनुष के प्रारंभ ने पीएसबी को अन्य एनपीए तथा परिणामस्वरूप एक्यूआर के जरिए पता लगाई गई अनंतिम अपेक्षा के बावजूद सफलतापूर्वक बेसल III अनुपालनकर्ता बने रहने हेतु समर्थ बनाया है। वर्तमान निर्णय इंद्रधनुष योजना में ज्यादा सहायक होगा।   

सरकार ने दबावग्रस्त आस्तियों की वसूली एवं समाधान को सुकर बनाने के लिए विभिन्न कानूनी बदलाव भी किए थे। दिवालियापन और शोधन अक्षमता संबंधी मामलों को सुलझाने के लिए एक एकीकृत रूपरेखा के रूप में दिवालियापन एवं शोधन अक्षमता संहिता, 2016 अधिनियमित की गई। शीघ्र वसूली को सुकर बनाने के लिए वित्तीय आस्तियों का प्रतिभूतिकरण एवं पुनर्निर्माण तथा सुरक्षा हितों का प्रवर्तन अधिनियम, 2002 (एसएआरएफएईएसआई अधिनियम) और बैंकों को देय ऋण की वसूली एवं वित्तीय संस्थान अधिनियम 1993 (जोकि ऋण वसूली प्राधिकरण को संचालित करता है), 2016 में संशोधित किए गये थे। इसके अतिरिक्त, सरकार को समर्थ बनाने के लिए इस वर्ष बैंकिंग विनियम अधिनियम, 1949 को संशोधित किया गया ताकि  सरकार को भारतीय रिजर्व बैंक को यह प्राधिकृत करने के लिए समर्थ बनाया जा सके कि वह बैंको को दिवालियापन एवं शोधन अक्षमता संहिता के अंतर्गत दिवालियापन समाधान प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश दे। 

पिछले तीन वर्षों में उठाये गये इन साहसी कदमों ने न सिर्फ परपरागत मुद्दों का समाधान किया है बल्कि पीएसबी के पूंजीगत सामर्थ्य के पुनर्निर्माण के लिए सुधारों को और अधिक मजबूत बनाया गया है। मजबूत, बड़े बैंक बनाने की प्रक्रिया भारतीय स्टेट बैंक के एकीकरण से शुरू हो गई है एवं घोषित पुनःपूंजीकरण इसे और अधिक गति देगा। इसके लिए प्रत्येक पीएसबी की पूंजीगत सामर्थ्य पर आधारित विशिष्ट पहुंच अपनाई जाएगी। 

आज घोषित किये गए अप्रत्याशित पुनः पूंजीकरण एवं पहलों से यह आशा की जाती है कि इससे निकट भविष्य में आर्थिक गतिविधियों को त्वरित करने में योगदान, रोजगार और अर्थव्यवस्था का विकास जैसे महत्वपूर्ण प्रभाव देखें जाएंगे।   

  1. भविष्य में अधिक मजबूत आर्थिक विकास 

जीडीपी वृद्धि द्वारा मापी जाने वाली अर्थव्यवस्था की वास्तविक वृद्धि ने लगातार सुधार दर्शाया है पिछले दो वर्षों में 5.9 प्रतिशत की तुलना में 2014-15 और 2016-17 के बीच इसका औसत 7.5 प्रतिशत है। यद्यपि, पिछली कुछ तिमाहियों में वृद्धि में कुछ गिरावट रही है, जिसे अस्थायी राडार लक्ष्य माना जा सकता है और अगर उपलब्ध संकेतकों से देखा जाए तो ऐसा लगता है कि हम इस गिरावट से बाहर आ गए हैं और जीडीपी वृद्धि पुन: शुरू होने की आशा है। 

वर्ष 2016-17 के लिए कृषि, सहकारिता और किसान कल्याण विभाग द्वारा जारी खाद्यान्न उत्पादन के चौथे अग्रिम अनुमान के अनुसार खाद्यान्नों का कुल उत्पादन 275.7 मिलियन टन होने की आशा है जो पिछले वर्ष 251.6 मिलियन टन कुल खाद्यान्न उत्पादन की तुलना में 9.6 प्रतिशत अधिक है। वर्ष 2017-18 के लिए पहले अग्रिम अनुमान के अनुसार खरीफ मौसम के लिए खाद्यान्नों का उत्पादन 134.67 मिलियन टन होने का अनुमान है जबकि वर्ष 2016-17 के चौथे अग्रिम अनुमान के अनुसार खाद्यान्नों का उत्पादन 138.52 टन मिलियन था। 

वैश्विक आर्थिक स्थिति में गिरावट के परिणामस्वरूप भारत के निर्यात की मांग कम होने के बावजूद औद्योगिक उत्पादन का सूचकांक (आईआईपी) 2016-17 के दौरान 4.6 प्रतिशत बढ़ा जबकि 2015-16 में यह वृद्धि 3.3 प्रतिशत (संशोधित आईआईपी श्रृंखला के अनुसार) थी। अप्रैल-अगस्त, 2017 के दौरान सामान्य आईआईपी वृद्धि 2.2 प्रतिशत थी जबकि पिछले वर्ष की इसी अवधि में यह 5.9 प्रतिशत थी। अगस्त, 2017 के दौरान आईआईपी में 4.3 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जो जून में (-)0.2 प्रतिशत तथा जुलाई, 2017 में 0.9 प्रतिशत की वृद्धि से काफी अधिक है। सवारी वाहनों की बिक्री में सितम्बर, 2017 के लिए 11.3 प्रतिशत और अप्रैल-सितम्बर के लिए 9.2 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। इसी प्रकार वाणिज्यिक वाहनों की बिक्री सितम्बर, 2017 में 25.3 प्रतिशत और अप्रैल-सितम्बर, 2017 के लिए 6 प्रतिशत बढ़ी। 

वास्तविक जीडीपी वृद्धि 

अक्तूबर, 2017 में अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष के आंकलन के अनुसार भारत का विकास 2017 में 6.7 प्रतिशत और 2018 में 7.4 प्रतिशत होने की आशा है अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष ने भी पूर्वानुमान लगाया है कि 2022 तक भारत का विकास 8.2 प्रतिशत बढ़ जाएगा। चीन का विकास 2016 में 6.7 प्रतिशत था और क्रमशः 2017 तथा 2018 में 6.8 प्रतिशत और 6.5 प्रतिशत होने की आशा है। हम आशा करते है कि इस तिमाही में दुबारा मजबूत विकास करेंगे और हमारे भावी वर्ष अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष के अनुमानों से भी बेहतर होंगे। 

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