हमारा अनूठा देश है , बड़ा अपराधी, बड़ा हंगामा : न्यायाधीश खेहर

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नई दिल्ली: देश के प्रधान न्यायाधीश जे एस खेहर ने शनिवार  को विधि कार्यकर्ताओं का आह्वाहन किया कि वे  अपराध पीड़ितों के लिए काम करें. उन्होंने दुष्कर्म पीड़ितों या तेजाबी हमले के शिकार अथवा अपने घर के एकमात्र रोजी रोटी कमाने वाले को गंवाने वालों की परिस्थितियों पर हैरानी व्यक्त करते हुये कहा कि अपराधियों की तो आखिरी उपाय तक न्याय के लिये पहुंच होती है. प्रधान न्यायाधीश ने विधि कार्यकर्ताओं से ऐसे प्रभावित लोगों तक पहुंचने की अपील की ताकि उन्हें अपेक्षित मुआवजा मिल सके.

उन्होंने कहा कि भारत में आतंकवाद के अपराध में अभियुक्त को उच्चतम न्यायालय तक सभी कानूनी उपायों का इस्तेमाल करने के बाद भी न्याय के लिये कानून के तहत प्रदत्त सभी संभव कानूनी उपायों के इस्तेमाल की अनुमति है.प्रधान न्यायाधीश परोक्ष रूप से 1993 के मुंबई विस्फोट के एकमात्र मृत्युदंड प्राप्त दोषी याकूब मेमन के मामले का हवाला दे रहे थे जिसकी फांसी की सजा उच्चतम न्यायालय ने 29 जुलाई 2015 को ठुकरा दी थी लेकिन कुछ एक्टिविस्ट वकील ने उसी रात फैसले पर फिर से गौर करने के लिए एक और याचिका दायर की क्योंकि दोषी को 30 जुलाई की सुबह फांसी दी जानी थी. उच्चतम न्यायालय इस याचिका पर सुनवाई के लिये सहमत भी हुआ और 30 जुलाई को रात दो बजे से दो घंटे से ज्यादा समय तक एक पीठ ने विशेष सुनवाई की.
राज्य विधि सेवा प्राधिकारण के 15 वें अखिल भारतीय सम्मेलन के अपने उद्घाटन संबोधन में न्यायमूर्ति खेहर ने कहा, ‘हमारा अनूठा देश है. बड़ा अपराधी, बड़ा हंगामा. जैसा कि हमने पहले देखा है कि आतंकवाद जैसे अपराध में दोषी उच्चतम न्यायालय में नाकाम हुआ और पुनर्विचार में भी असफल रहने के बावजूद एक तरीके से न्याय तक पहुंच हो सकती है जिसका हम विस्तार करते हैं.’

 

उन्होंने कहा, ‘मुझे वर्षों तक आश्चर्य होता रहा कि पीड़ितों का क्या होता है. वर्षों तक हैरान रहा कि उन परिवारों का क्या जिन्होंने अपने एकमात्र रोजी रोटी कमाने वाले को खो दिया. मुझे वषरें तक तेजाब कि हमले के पीड़ितों के बारे में हैरानी हुयी जिनका चेहरा बिगड़ गया और समाज में जी नहीं सकते. मैंने दुष्कर्म पीड़िताओं के बारे में उनकी जिंदगी के बारे में सोचा और मुझे हैरानी कि हमारी उनतक क्यों पहुंच नहीं है.’
न्यायमूर्ति खेहर ने कहा, ‘इस संस्था के संरक्षक के तौर पर आज मेरी आपसे अपील करने की इच्छा है. पीड़ितों तक पहुंचा जाए। 2017 को पीड़ितों के लिए काम का वर्ष बनाया जाए.’ प्रधान न्यायाधीश ने राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (नलसा), राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को अपने सहायक विधिक (पारा-लीगल) कार्यकर्ताओं को हरेक निचली अदालतों में भेजकर पीड़ितों को सूचित करने को कहा कि उनके मुआवजे का हक बंद नहीं हुआ है.

उन्होंने कहा, ‘अपने सहायक विधिक कार्यकर्ताओं को प्रत्येक निचली अदालत में भेजकर पीड़ितों को अवगत कराएं. प्रत्येक पीड़ितों को सीआरपीसी की धारा 357-ए के बारे में बताया जाए कि उन्हें मुआवजे का अधिकार है.’ उन्होंने कहा, ‘उन्हें समझाएं कि आरोपी को बरी किये जाने या दोषसिद्धि के साथ मामला बंद नहीं हुआ है. दिल बड़ा करें और पीड़ितों तक पहुंचे.’

न्यायमूर्ति खेहर ने कहा कि पीड़ितों के लिए राष्ट्रीय स्तर और राज्य स्तर पर कोष तैयार करने के लिए संसद ने सीआरपीसी की धारा 357-ए शुरू की. न्यायमूर्ति खेहर ने कहा कि पीड़ितों को मुआवजे के साथ किसी भी मामले में आरोपी को खासकर आपराधिक मामले में प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए और जैसे ही उसे गिरफ्तार किया जाता है तो उसके मामले में उस तक मदद के लिए किसी की पहुंच होनी चाहिए.

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