जब अनिल विज की चलती ही नहीं, तो दे दें इस्तीफा : अशोक बुबानीवाला

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-मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य मंत्री के आदेशों को रद्दी की टोकरी में फेंक दिया
-एक भ्रष्टाचारी को बचाने के लिए मुख्यमंत्री ने सरकारी मशीनरी का किया दुरुपयोग

चंडीगढ़ 5 अगस्त। हरियाणा प्रदेश कांग्रेस के पूर्व प्रवक्ता एवं अग्रवाल वैश्य समाज के प्रदेश अध्यक्ष अशोक बुवानीवाला ने कहा है कि भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस का ढिंढोरा पीटने वाली भाजपा सरकार की पोल खुल गई है । हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खुद भ्रष्टाचारियों के साथ हैं और उन्हें बचाने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा रहे हैं। ऐसा ही मामला हरियाणा राज्य फार्मेसी काउंसिल से जुड़ा है, जिसमें एक भ्रष्टाचारी को बचाने के लिए मुख्यमंत्री ने कोई कसर नहीं छोड़ी।

अशोक बुबानीवाला ने कहा कि स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज खुद को गब्बर सिंह कहते हैं, लेकिन ऐसा लगता है कि वह केवल बातें करते हैं, उनकी सरकार में चलती नहीं है। स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने हरियाणा राज्य फार्मेसी काउंसिल के प्रधान धनेश अदलखा, रजिस्ट्रार राजकुमार वर्मा और उपप्रधान सोहनलाल कंसल को निलंबित करने के लिए आदेश दिए थे। इन आदेशों को मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने रद्दी की टोकरी में फेंक दिया । जिससे साफ है कि मुख्यमंत्री स्वास्थ्य मंत्री के आदेशों को कुछ नहीं समझते। भ्रष्टाचार की विभिन्न धाराओं के तहत धनेश अदलखा, राजकुमार वर्मा और सोहनलाल कंसल के खिलाफ केस दर्ज होने के बावजूद मुख्यमंत्री ने धनेश अदलखा को बचाने के लिए सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग किया और विजिलेंस के अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि धनेश अदलखा को बचाया जाए। हरियाणा राज्य फार्मेसी काउंसिल के तथाकथित प्रधान धनेश अदलखा को हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल बचाने की कोशिश शुरू से कर रहे हैं और उसके हाथों में हरियाणा राज्य फार्मेसी काउंसिल का दफ्तर बेच दिया है। प्रदेश के फार्मासिस्टों से लाखों रुपए रिश्वत लेकर फार्मेसी लाइसेंस जारी करने वाले के खिलाफ कार्यवाही ना होना दर्शाता है कि हरियाणा राज्य चौकसी ब्यूरो को मुख्यमंत्री के निर्देश है कि धनेश अदलखा की गिरफ्तारी ना की जाए। अब तो भ्रष्टाचार के आरोपी धनेश अदलखा की इतनी हिम्मत हो गई है कि स्वास्थ्य मंत्री के आदेशों के बावजूद फार्मेसी काउंसिल के दफ्तर पर अवैध तौर पर कब्जा कर लिया। ‌

अशोक बुवानीवाला ने कहा कि हरियाणा राज्य चौकसी ब्यूरो ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 के तहत हरियाणा राज्य फार्मेसी काउंसिल के चेयरमैन, उप प्रधान और रजिस्ट्रार के खिलाफ केस दर्ज किया, लेकिन केवल उप्रधान कंसल को ही गिरफ्तार किया गया है। जबकि धनेश अदलखा और राजकुमार वर्मा अभी भी गिरफ्त से बाहर हैं। धनेश अदलखा, सोहनलाल कंसल और राजकुमार वर्मा को निलंबित करने के लिए हरियाणा के स्वास्थ्य मंत्री ने फाइल मुख्यमंत्री मनोहर लाल के पास भेजी, लेकिन 25 दिन बीत जाने के बाद भी मुख्यमंत्री ने उस फाइल पर हस्ताक्षर नहीं किए, जिससे साफ हो रहा है कि भ्रष्टाचार के मामले को दबाने और लोगों को गुमराह करने की कोशिश की जा रही है । कुछ दिन भी जाने के बाद इस फाइल को दबा दिया जाएगा। जबकि इस भ्रष्टाचार में इन तीनों की भूमिका सबसे अहम है, क्योंकि जितने भी फार्मेसी लाइसेंस बनते हैं, उन पर इन धनेश अदलखा और रजिस्ट्रार राजकुमार वर्मा के ही हस्ताक्षर होते थे। धनेश अदलखा ने लिखित तौर पर रजिस्ट्रार को आदेश दे रखे थे कि मेरी परमिशन के बिना कोई रजिस्ट्रेशन नहीं होगी। सोहनलाल कंसल 1 मीडिएटर का काम कर रहा था। जो कि इन्हें बताता था कि केस फार्मासिस्ट से पैसे आ गए हैं और किस का सर्टिफिकेट बनाना है, जिसके बाद ही यह दोनों सर्टिफिकेट्स पर हस्ताक्षर करते थे।

 

अशोक बुवानीवाला ने कहा कि धनेश अदलखा मुख्यमंत्री का नाम लेकर बेबस फार्मासिस्ट को धमकाता था और उसका नतीजा है कि सैकड़ों फार्मासिस्ट नौकरी लगने से वंचित रह गए। उन्होंने कहा कि इस मामले में कई बार सैकड़ों शिकायतें आ चुकी हैं, लेकिन मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री की शह के कारण सभी धनेश अदलखा पर कार्यवाही नहीं हुई, जिसका नतीजा यह रहा कि उनके हौंसले बुलंद होते रहे और मध्यम वर्गीय फार्मासिस्ट के लिए रोजी-रोटी के लाले पड़ गए।

उन्होंने कहा कि यदि जल्द ही धनेश अदलखा की गिरफ्तारी ना हुई, तो मजबूरन लोगों को हरियाणा के मुख्यमंत्री का घेराव करना पड़ेगा। उन्होंने इस मामले की जांच पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के किसी रिटायर्ड जज से करवाने की मांग की और कहा कि फार्मेसी काउंसिल को प्रशासनिक तौर पर टेकओवर कर लेना चाहिए, इसमें जितनी भी अनियमितताएं हैं उनकी निष्पक्ष जांच की जानी चाहिए। भ्रष्टाचार के आरोपियों को जेल में भेजा जाए

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