आदिवासी कारीगरों द्वारा बनाए गए पारंपरिक शिल्प को पुनर्जीवित करने वाली झारखंड की सुचित्रा सिन्हा को ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया अवार्ड्स

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झारखंड की सुचित्रा सिन्हा को नीति आयोग के वुमन ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया अवार्ड्स के पांचवें संस्करण में सम्मानित किया गया

भारत की स्वतंत्रता के 75वें वर्ष में 75 महिलाओं को सम्मानित किया गया

नई दिल्ली : झारखंड की अंबालिका की सुचित्रा सिन्हा नीति आयोग द्वारा वुमन ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया के रूप में सम्मानित की गईं 75 महिलाओं में शामिल हैं।

भारत को सशक्त और समर्थ भारत बनाने में महिलाएं लगातार अहम भूमिका निभाती रही हैं। विभिन्न क्षेत्रों में इन महिलाओं की उल्लेखनीय उपलब्धियों को सम्मानित करने के लिए नीति आयोग ने वुमन ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया अवार्ड्स की स्थापना की है।

इस वर्ष भारत की स्वतंत्रता के 75 वर्ष पूरा होने के उपलक्ष्य में आजादी का अमृत महोत्सव मनाया जा रहा है, जिसके तहत 75  महिलाओं को डब्ल्यूटीआई पुरस्कार प्रदान किए गए। अन्य पुरस्कार विजेताओं के बारे में अधिक जानने के लिए यहां क्लिक करें

 

सुचित्रा सिन्हारांचीअंबालिका

 

श्रीमती सुचित्रा सिन्हा झारखंड राज्य के एक रेड कॉरिडोर जिले सरायकेला के निमडीह प्रखंड में सबरों द्वारा बनाए गए आदिवासी शिल्प के पुनरुद्धार, विकास और प्रचार के लिए पिछले 25 वर्षों से अथक प्रयास कर रही हैं।  सबरों को सबरी का वंशज माना जाता है, जिन्होंने भगवान राम को देने से पहले बेर का स्वाद चखा था। ये जनजातियां विलुप्त होने के कगार पर हैं और इन्हें गरीबों में सबसे गरीब के रूप में वर्गीकृत किया गया है। उनके मुददों के प्रति समर्पण से अभिभूत, वे उन्हें माँ कहते हैं और उन्हें देवी के रूप में पूजते हैं।

अंबालिका झारखंड के आदिवासी कारीगरों द्वारा बनाए गए पारंपरिक शिल्प को पुनर्जीवित कर रही है और उन्हें स्थायी आजीविका प्रदान कर रही है।

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