चुनाव में अपराधियों को प्रत्याशी बनाने पर राजनीतिक दलों को देना होगा जवाब

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चुनाव के दौरान बजट पेश करने पर प्रतिबन्ध लगाने से चुनाव आयोग का इनकार

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सुभाष चौधरी 

election commission of indiaनई दिल्ली : चुनाव आयोग ने आज देश के 5 राज्यों के विधानसभा चुनाव की घोषणा कर दी. सभी 5 राज्यों में कुल 7 चरणों में मतदान  election commission of india कराए  जाएंगे। इस अवसर पर आयोजित प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त सुशील चंद्रा ने स्पष्ट किया कि चुनावी रैलियों . नुक्कड़ सभाओं एवं साइकिल व मोटरसाइकिल रैलियों पर 15 जनवरी तक पूरी तरह प्रतिबंध लागू रहेगा.  इसके बाद संबंधित राज्यों के मुख्य सचिव और जिला कलेक्टरों के साथ स्थिति की समीक्षा करने के बाद ही निर्णय लिया जाएगा। जाहिर है इन पांच राज्यों में सभी राजनीतिक दलों को इस बार चुनाव प्रचार के लिए वर्चुअल रैलियां ही आयोजित करनी पड़ेगी जबकि डिजिटल मोड पर निर्भर रहना पड़ेगा।

मुख्य चुनाव आयुक्त सुशील चंद्रा ने पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए साफ कर दिया कि कोविड-19 की दृष्टि से चुनाव आयोग ने 15 जनवरी तक चुनाव प्रचार के लिए फिजिकल रैली पर प्रतिबंध लगा दिया है.  राजनीतिक दल वर्चुअल माध्यम से रैली करेंगे. नियम का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ एफ आई आर दर्ज की जाएगी। उन्होंने कहा कि इसके लिए सभी 5 स्टेट्स के राज्य निर्वाचन आयुक्त और जिला कलेक्टरों को निर्देश दिया जाएगा।

उन्होंने कहा कि 15 जनवरी के बाद स्थिति की समीक्षा करने के बाद दोबारा इस संबंध में निर्देश जारी किया जाएगा।

एक सवाल के जवाब में चुनाव आयुक्त ने कहा कि चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन करने वाले प्रत्याशी या फिर राजनीतिक दलों के खिलाफ दर्ज की गई f.i.r. पर चुनाव बाद भी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

 

पत्रकार वार्ता के दौरान जब मुख्य चुनाव आयुक्त से आगामी 1 फरवरी को केंद्रीय बजट पेश होने और संयुक्त संसदीय अधिवेशन को राष्ट्रपति द्वारा संबोधित किए जाने के मामले में सवाल पूछा गया तो उन्होंने इसमें किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप करने से साफ इनकार कर दिया। मुख्य चुनाव आयुक्त सुशील चंद्रा ने कहा कि केंद्रीय बजट पूरे देश के लिए होता है और वित्तीय प्रबंधन की दृष्टि से यह अति आवश्यक व्यवस्था है. यह आय व्यय का व्योरा और बजट आवंटन की वार्षिक प्रक्रिया है जो आर्थिक गतिविधियों को संचालित करने की दृष्टि से आवश्यक है. इसलिए उसमें हस्तक्षेप करने का कोई सवाल नहीं उठता।

जब उनसे पंजाब में कानून व्यवस्था और आतंकी हमले के साथ-साथ कानूनों को लेकर आंदोलन के कारण उत्पन्न विषम परिस्थिति के बारे में पूछा गया तो उन्होंने इसके लिए आवश्यक कदम उठाए जाने की बात की. उन्होंने कहा कि पंजाब राज्य के मुख्य सचिव और पुलिस के साथ स्थिति की समीक्षा की गई है. वहां केंद्रीय पुलिस बल भी तैनात किए जाएंगे .मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा कि चुनाव आयोग पंजाब में उत्पन्न हुई सारी स्थितियों पर नजर रखे हुए हैं। उन्होंने कहा कि सभी चुनाव एक जैसे नहीं होते. पंजाब के बॉर्डर और आंतरिक स्थितियों का आकलन करते हुए निर्णय लिया गया है.

एक मीडिया प्रतिनिधि ने मणिपुर में पिछले दिनों एक व्यक्ति की हुई हत्या और कानून व्यवस्था के संबंध में सवाल पूछा. चुनाव आयोग ने आश्वस्त किया कि स्थानीय प्रशासन के साथ स्थिति की समीक्षा की गई है और उसके अनुरूप व्यवस्था की जा रही है की दुबारा ऐसी घटना नहीं हो सके ।

चुनाव आचार संहिता उल्लंघन के मामले में आमतौर पर कार्यवाही नहीं होने का सवाल भी उठाया गया. इस पर मुख्य चुनाव आयुक्त ने स्पष्ट किया कि सभी राजनीतिक दलों एवं प्रत्याशियों के लिए एडवाइजरी जारी की जाएगी. चुनाव आचार संहिता के दौरान क्या करना है क्या नहीं करना है जैसी जानकारी भी सभी दलों को दी जाएगी। उन्होंने कहा कि इस संबंध में पीपुल्स रिप्टरेजेन्टेटिव एक्ट में उपलब्ध प्रावधान के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।

उत्तराखंड राज्य में बर्फबारी के कारण मतदाताओं को होने वाली परेशानी का सवाल भी मुख्य चुनाव आयुक्त के सामने रखा गया. चुनाव आयोग ने यह स्पष्ट कर दिया कि ऐसे क्षेत्र जो सुदूर पहाड़ी हैं उनके लिए पहाड़ से नीचे मतदान केंद्रों की स्थापना की जाएगी. इसके लिए संबंधित राज्य के प्रशासन को समुचित व्यवस्था करने को कहा गया है।

मुख्य चुनाव आयुक्त से जब यह सवाल किया गया कि उत्तर प्रदेश में वेस्ट से ईस्ट की ओर अक्सर चुनाव कराए जाते रहे हैं लेकिन इस बार राजनीतिक दलों ने ईस्ट से वेस्ट की ओर चुनाव कराने की मांग की थी. क्या इस पर चुनाव आयोग ने कोई संज्ञान लिया है ?  इस सवाल पर मुख्य चुनाव आयुक्त सुशील चंद्रा ने कहा कि इस प्रकार की कोई मांग उनके पास किसी प्रमुख राजनीतिक दल की ओर से नहीं की गई है. जहां तक चुनाव संपन्न कराने का सवाल है सभी 7 चरणों में बराबर संख्या में विधानसभा क्षेत्रों का बंटवारा किया गया है।

मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा कि उत्तर प्रदेश में 7 चरणों में होने वाले चुनाव में प्रथम चरण में 58, द्वितीय चरण में 55, तृतीय चरण में 59, चतुर्थ चरण में 60, पांचवी चरण में 60, छठे चरण में 57 और अंतिम व सातवें चरण में 54 सीटों पर मतदान कराए जाएंगे।

कोविड-19 संक्रमण की तेज गति से फैलने की आशंका के मद्देनजर इस दौरान विधानसभा चुनाव कराने के चुनाव आयोग के फैसले पर सवाल करते हुए मीडिया प्रतिनिधि ने जानना चाहा कि चुनाव आयोग ने इस विषय पर विचार क्यों नहीं किया ?  मुख्य चुनाव आयुक्त का कहना था कि इस संबंध में समुचित व्यवस्था की जा रही है . कोविड प्रोटोकॉल को पूरी तरह लागू कराने का निर्देश जारी किया गया है.

उनका तर्क था कि देश में महाराष्ट्र, दिल्ली और कर्नाटक जैसे राज्यों में ही सर्वाधिक कोविड-19 संक्रमण का फैलाव है। उन्होंने कहा कि जिन पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव कराए जाने हैं उनमें कोविड-19 महामारी की स्थिति इतनी खराब नहीं है, दूसरी तरफ फरवरी में मतदान कराए जाएंगे, उन्होंने कहा कि फरवरी तक उन सभी राज्यों में बहुतायत मतदाताओं का टीकाकरण पूरा हो जाएगा, इसलिए इसमें चिंता की कोई बात नहीं।

पत्रकार वार्ता के दौरान चुनाव में अपराधियों को प्रत्याशी बनाने पर अंकुश लगाने संबंधी सवाल भी उठाए गए. मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा कि इसके लिए खास तौर से उन राजनीतिक दलों से ऐसे अपराधिक तत्वों को प्रत्याशी बनाए जाने के संबंध में स्पष्टीकरण मांगा जाएगा. उन्होंने कहा कि सभी दलों से ऐसे प्रत्याशियों के चयन की जानकारी मांगी जाएगी. मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा कि अपने प्रत्याशियों को जानने समझने और उसके बारे में ठीक ढंग से विश्लेषण करने की दृष्टि से ही चुनाव आयोग ने ” Know Your Candidate ” ऐप लॉन्च किया है. इसके माध्यम से आम मतदाता अपने प्रत्याशियों के बारे में पूरी जानकारी ले पायेंगे और अपने मतदान का सही प्रयोग करेंगे .

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