रक्षामंत्री राजनाथ ने रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन की खरीद प्रक्रिया संबंधी नई नियमावली जारी किया

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नई दिल्ली। आत्मनिर्भर भारत’ के उद्देश्य की प्राप्ति के लिए रक्षा अनुसंधान और विकास (आरएंडडी) में स्टार्ट-अप्स एवं सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) सहित भारतीय उद्योगों की अधिकतम भागीदारी को प्रोत्साहित करने के लिए, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आज रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) की खरीद प्रक्रिया संबंधी नियमावली का एक नया संस्करण (पीएम-2020) जारी किया।

इस अवसर पर सम्बोधित करते हुए, राजनाथ सिंह ने कहा, “नई डीआरडीओ खरीद नियमावली प्रक्रियाओं को सरल बनाकर स्वदेशी रक्षा उद्योग को सुविधा प्रदान की गई है। इससे परिकल्पना और विकास गतिविधियों में उनकी भागीदारी को सुनिश्चित करने के भी अधिक अवसर मिलेंगे। पीएम-2020, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘आत्मनिर्भर भारत’ के सपने को साकार करने की दिशा में सहायता प्रदान करेगा। श्री सिंह ने संशोधित पीएम-2020 को लाने के लिए डीआरडीओ और रक्षा मंत्रालय के वित्त विभाग के सभी अधिकारियों के योगदान की सराहना की।

पीएम-2020 अनुसंधान एवं विकास परियोजनाओं तथा कार्यक्रमों के तेजी से निष्पादन की सुविधा प्रदान करेगा। इससे संशोधित खरीद प्रक्रिया द्वारा विभिन्न अनुसंधान एवं विकास परियोजनाओं में उद्योगों की भागीदारी को सुविधाजनक बनाने का एक लम्बा रास्ता तय होगा।

बयाना जमा के लिए बोली सुरक्षा घोषणा विकल्प, अग्रिम भुगतान के लिए प्रारंभिक सीमा में वृद्धि, न्यूनतम बोलीदाता 2 (एल 2) पर एक आदेश की नियुक्ति के मामले में एल 1 बैक आउट, इस नई नियमावली की कुछ प्रमुख विशेषताएं हैं। जो परियोजनाओं के त्वरित निष्पादन में उद्योगों को सहायता उपलब्ध कराएगा।

पीएम-2020 में शामिल किये गए कुछ अन्य उपाय इस प्रकार हैं- 10 लाख रुपये तक की बोली की सुरक्षा और निष्पादन सुरक्षा की छूट, जहां कहीं भी बाजार के माध्यम से मूल्य पर बातचीत हो रही है, वहां वाणिज्यिक और व्यावसायिक बिक्री (सीओटीएस) वस्तुओं/सेवाओं के लिए कोई समझौता नहीं होगा।

सेवा अनुबंधों के लिए निष्पादन सुरक्षा कुल अनुबंध मूल्य के बजाय भुगतान चक्र से जुड़ी हुई है। विकास भागीदारों से भंडार खरीद, बैंक गारंटी के बजाय बीमा कवर के माध्यम से खरीद सामग्री की सुरक्षा, उद्योगों की मदद के लिए अपनाए जाने वाले अन्य सुविधाजनक उपाय हैं।

नए पीएम-2020 में विकास अनुबंध के लिए परिनिर्धारित क्षति (एलडी) दर को कम कर दिया गया है। तेजी से निर्णय लेने के लिए वितरण अवधि (डीपी) विस्तार प्रक्रिया को सरल बनाया गया है। उद्योगों के साथ तेजी से जुड़ाव के लिए कई आंतरिक प्रक्रियाओं को और आसान बनाया गया है। यह ध्यान देने योग्य है कि, डीआरडीओ की पिछली खरीद नियमावली को आखिरी बार वर्ष 2016 में संशोधित किया गया था।

इस अवसर पर रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के सचिव तथा डीआरडीओ के अध्यक्ष डॉ. जी सतीश रेड्डी, सचिव (रक्षा वित्त) गार्गी कौल और रक्षा मंत्रालय के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।

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