सुप्रीम कोर्ट ने प्रशांत भूषण पर अदालत की अवमानना मामले में केवल 1 रु का जुर्माना लगाया

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नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने आज प्रशांत भूषण पर अदालत की अवमानना मामले में केवल 1 रु का जुर्माना लगाया. अगर जुर्माना नहीं जमा कराया तो उन्हें 3 साल के लिए वकालत करने से रोक दिया जाएगा और 3 महीने की कैद होगी।

जस्टिस अरुण मिश्रा की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने अदालत की अवमानना मामले में वकील प्रशांत भूषण की सजा के संबंध में फैसला सुनाया. उल्लेखनीय है कि प्रशांत भूषण ने एक ट्वीट कर सुप्रीम कोर्ट और पिछले चार चीफ जस्टिस की भूमिका को लेकर टिपण्णी की थी. अदालत ने इसे अवमानना मानते हुए स्वतः संज्ञान लेते हुए सुनवाई की थी.

मामले की सुनवाई के बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिए था. अदालत ने उन्हें दो बार माफ़ी मांगने का भी मौका दिया लेकिन वकील प्रशांत भूषण अपनी बात पर अड़े रहे. उन्होंने अब्यान वापस लेने की बजाय अवमानना की कार्यवाही का  विरोध जताया. अंततः अदालत ने आज फैसला सुनाया और एक रूपये का जुर्माना लगाया.  

पहला ट्वीट 27 जून को जब इतिहासकार भारत के बीते 6 सालों को देखते हैं तो पाते हैं कि कैसे बिना इमरजेंसी के देश में लोकतंत्र खत्म किया गया। वे (इतिहासकार) सुप्रीम कोर्ट खासकर 4 पूर्व सीजेआई की भूमिका पर सवाल उठाएंगे।


दूसरा ट्वीट 29 जून को इसमें वरिष्ठ वकील ने चीफ जस्टिस एसए बोबडे की हार्ले डेविडसन बाइक के साथ फोटो शेयर की। फोटो में सीजेआई बिना हेलमेट और मास्क के नजर आ रहे थे। भूषण ने लिखा था कि सीजेआई ने लॉकडाउन में अदालतों को बंद कर लोगों को इंसाफ देने से इनकार कर दिया।

भूषण पहले ही अफसोस जता चुके हैं :


2009 में तहलका मैगजीन को दिए इंटरव्यू में भूषण ने 16 पूर्व चीफ जस्टिस (सीजेआई) को भ्रष्ट बताया था। बाद में भूषण ने कोर्ट में अफसोस जताते हुए कहा कि भ्रष्ट शब्द आर्थिक भ्रष्टाचार के लिए नहीं, बल्कि शिष्टाचार की कमी के मायनों में इस्तेमाल किया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि वह पता करना चाहता है कि क्या मौजूदा और पूर्व जजों के खिलाफ इस तरह भ्रष्टाचार के आरोप लगाना सही है?

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