भोंडसी जेल की घटना से जेल प्रशासन, पुलिस तंत्र, जिला प्रशासन और सी आई डी, सभी सन्देह के घेरे में ! स्वतंत्र जांच कराने की है जरूरत

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सुभाष चौधरी

गुरुग्राम। भौंडसी जेल, गुरुग्राम में पुलिस की छापेमारी व चेकिंग लगातार जारी है। डिप्टी जेलर व उसके एक गुर्गे को कैदियों को सिम व ड्रग सप्लाई करने के मामले में गिरफ्तार करने के बाद भोंडसी जेल की व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। जेल प्रशासन की बड़ी खामियां उजागर हुई हैं। इस घटना ने प्रदेश में चल रहे अपराध को किस कदर जेल से संचालित किया जाता रहा है इसका पुष्ट प्रमाण हरियाणा की जनता के सामने आ गया है। पुलिस और प्रशासन आखिर कैसे हाथ पर हाथ धरे बैठे रहे इसका स्पष्ट उदहारण सामने आया है। क्योंकि इतनी बड़ी संख्या में मोबाइल और सिम की बरामदगी से साफ है कि यह स्थिति एक दिन में पैदा नहीं हुई है। इसमें जेल प्रशासन, स्थानीय पुलिस, सीआईडी, आई बी और जिला प्रशासन सभी नाकाम ही नहीं रहे बल्कि कुछ की मिलीभगत भी होने की आशंका प्रबल है।

जाहिर है भौंडसी जेल में यह गैरकानूनी धंधा लंबे समय से ही नहीं बल्कि हमेशा चलता रहा है। गुरुग्राम पुलिस की ओर से जेल में छापेमारी अक्सर होती रही है और वहां से इस प्रकार के आपत्तिजनक सामान व ड्रग मिलते रहे हैं। पिछले वर्षों में भी इस प्रकार के छापे जेल में पड़ते रहे हैं। कई बार जिला उपायुक्त की पहल पर भी चेकिंग हुई है और इसमें रक्षक ही भक्षक बने बैठे मिले हैं। डिप्टी जेलर ही यहां कैदियों को सिम, मोबाइल ही नहीं यहां तक कि ड्रग भी सप्लाई करता था जिसका खुलासा तीन दिन पूर्व पुलिस की उनके घर पर हुई छापेमारी से हुआ। सवाल साफ है कि क्या हरियाणा की जेल अब संगठित व सुरक्षित तरीके से हत्या, अपहरण, लूट, फिरौती और अन्य आपराधिक गतिविधियों को अंजाम देने वाला स्वर्ग बन गई हैं। यह किस प्रकार का सुशासन है ? गुरुग्राम में संगीन अपराधों का ग्राफ बढ़ गया है और दिन दहाड़े हत्या की घटनाएं लगागतर हो रही हैं। यह अलग बात है कि पुलिस की सक्रियता से इन वारदातों को अंजाम देने वाले पकड़े जा रहे हैं लेकिन यह भी सत्य है कि एक ही दिन में दिल दहलाने वाली ऐसी कई घटनाएं हो रही हैं।

शनिवार को भी भोंडसी जेल में बन्द कैदियों से गुरुग्राम पुलिस ने 4 मोबाईल फोन बरामद किए। डिप्टी सुप्रिडेंट जेल भौंडसी, गुरुग्राम व उसके साथी आरोपी की गिरफ्तारी के बाद भौंडसी जेल में लगातार चेकिंग की जा रही है। गुरुग्राम पुलिस द्वारा जेल में बन्द अपराधियों को मोबाईल फोन, सिम कार्ड व मादक पदार्थ सप्लाई करने के मामले में जेल भौंडसी के डिप्टी सुपरिडेन्ट व उसके 01 साथी आरोपी से 23 जुलाई को 11 सिम कार्ड व 230 ग्राम चरस बरामद की गई थी। उसके अगले ही दिन 24 जुलाई को डिप्टी जेलर द्वारा जेल में बंद कैदियों को दिए हुए 12 मोबाईल फोन, 11 बैट्रीयां व 9 सिम कार्ड भी बरामद किए गए थे ।

गुरुग्राम पुलिस के पी आर ओ सुभाष बोकन के अनुसार अब तक कुल 16 मोबाईल फोन, 20 सिम कार्ड, 11 बैट्रीयां व 230 ग्राम चरस बरामद की जा चुकी है। इससे यह सहज ही अंदाज लगया जा सकता है कि इन मोबाइल फोन और सिम कार्ड का गुरुग्राम सहित हरियाणा के अन्य शहरों व जिले में अपराध को बढ़ाने में अब तक किस कदर दुरुपयोग किया गया होगा।

यह हालत तो तब है जब जेल में जैमर लगाए गए हैं। यह भी चौकाने वाली बात है कि जिस जेल में जैमर लगाए गए हैं उसमें मोबाइल कैसे काम करते हैं। क्या वहां का जैमर काम नहीं करता है या फिर जेल प्रशासन की मदद से अपराधियों की सुविधा के लिए जैमर को निष्क्रिय या बंद कर दिया जाता है। अब गुरुग्राम पुलिस के लिए यह भी जांच का विषय है कि जैमर लगने के बावजूद वहां मोबाइल का नेटवर्क कैसे काम करता रहा ? इतनी बड़ी खामी भोंडसी जेल में कैसे और किनके इशारे पर बरती जाती रही और इसे लंबे समय तक नजरअंदाज क्यों किया जाता रहा ? क्या भोंडसी जेल को भगवान के भरोसे छोड़ दिया गया है ? क्या जेलर ही यहां बन्द अपराधियों को संरक्षण देते हैं या फिर उन्हें अपराध को अंजाम देने को उकसाते हैं या उनकी मदद करते हैं ? यह मामला साफ तौर पर हरियाणा में अपराध को बढ़ावा देने का बनता है जिसके लिए अपराधियों के साथ साथ जेल प्रशासन में तैनात अधिकारी भी बराबर के जिम्मेदार दिखाई दे रहे हैं। इस मामले पर न तो जिला प्रशासन और न ही पुलिस महकमा कुछ स्पष्ट उत्तर देने की स्थिति में है। अब तक इसकी जवाबदेही निर्धारित करने के लिए स्वतंत्र प्रशासनिक जांच कराने की भी घोषणा नही की गई है।

इस प्रकार की घटना ने प्रदेश की सरकार के स्वच्छ और सख्त कानून व्यवस्था के दावे पर भी गंभीर सवाल खड़ा कर दिया है। राजनीतिक तंत्र में बैठे नेताओं को भी इसका जवाब देना होगा कि उनके रहते जेल ऐसी घोर आपत्तिजनक अव्यवस्था की शिकार कैसे हुई। जेल जिसे सबसे अधिक सख्त पहरे में रखने के लिए अलग से जेल मैन्युअल प्रभावी है , क्या जेल में तैनात अधिकारियों ने उसे शिथिल कर दिया। ऐसे मामले में जेल विभाग के बड़े अधिकारी इन गतिविधियों से कैसे अनजान रहे ? उनसे यह सवाल पूछने की जरूरत है जबकि उनके खिलाफ आवश्यक प्रशासनिक कार्यवाही करने की सख्त प्रशासनिक आवश्यकता है।

उल्लेखनीय है कि भोंडसी जेल में हरियाणा के कई अन्य जिले के कैदी भी बंद हैं। यहां की आधुनिक सुरक्षा व्यवस्था की दुहाई बारम्बार प्रदेश सरकार द्वारा दी जाती रही है लेकिन यहां से होने वाले अपराध के लिए कोई जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं है। पिछले चार दिनों से चल रहे भोंडसी जेल सीरियल का असल प्रोड्यूसर कौन है इसकी खोज तो करनी होगी। इसको लेकर कोई कुछ नहीं बोल रहा है।

उल्लेखनीय है कि गत 23 जुलाई को गुरुग्राम पुलिस ने जेल में मोबाईल फोन, सिम कार्ड व नशीले पदार्थ सप्लाई करने के आरोप में डिप्टी सुपरिडेन्ट जेल भौंडसी, गुरुग्राम व उसके 01 साथी आरोपी (1. धर्मबीर चौटाला, डिप्टी सुपरिडेन्ट जेल, भौन्डसी, जिला गुरुग्राम व 2. रवि उर्फ गोल्डी निवासी लखनऊ, उत्तर-प्रदेश हाल निवासी गाँव वजीराबाद, गुरुग्राम।) को गिरफ्तार किया था। पुलिस टीम द्वारा डिप्टी सुपरिडेन्ट जेल के घर से कुल 11 (4जी) सिम कार्ड व 230 ग्राम चरस भी बरामद की गई थी।

गुरुग्राम पुलिस के पी आर ओ सुभाष बोकन के अनुसार 25 जुलाई शनिवार को गुरुग्राम पुलिस द्वारा आरोपी डिप्टी सुप्रिडेंट जेल, भौंडसी से गहनता से पूछताछ की गई। उनका कहना है कि आरोपी डिप्टी सुप्रिडेंट जेल ने पूछताछ में पैसे लेकर जेल में बंद जिन अपराधियों को सिम कार्ड व मोबाईल फोन दिए गए थे उन अपराधियों के नाम का खुलासा किया। आरोपी जेलर की सूचनाओं के आधार पर पुलिस टीम ने 24 जुलाई को जेल में पुनः छापा मारा और चिन्हित अपराधियों से कुल 12 मोबाईल फोन, 09 सिम कार्ड व 11 बैट्रियां (मोबाईल फोन) बरामद किए ।

बोकन का कहना है कि पुलिस ने 25 जुलाई को भी जेल में बंद कैदियों से 4 मोबाईल फोन बरामद किए ।

उन्होंने बताया है कि इस संबंध में थाना भौंडसी, गुरुग्राम में मामला दर्ज किया गया है। मामले की जांच चल रही है। गौरतलब है कि लगातार तीन दिन की छापेमारी के बाद पुलिस ने भोंडसी जेल से अब तक कुल 16 मोबाईल फोन, 20 सिम कार्ड, 11 बैट्रीयां व 230 ग्राम चरस बरामद किए हैं।

गुरुग्राम के नव नियुक्त पुलिस कमिश्नर के के राव जो अक्सर अपराधियों पर हमलावर रहते हैं इस मामले में कितनी सख्ती बरतते हैं यह देखने वाली बात होगी। अब उनके सामने उन सभी अपराधों का खुलासा करने की चुनौती है जिन्हें ऊक्त सिम कार्ड से संचालित किया जाता रहा है। इतनी बड़ी संख्या में बरामद सिम कार्ड से ये अपराधी जेल से बाहर किन लोगों से बात करते रहे हैं ? क्या ये लोग अपने परिवार वालों से सम्पर्क में थे या फिर अपने गिरोह के अन्य सदस्यों के माध्यम से अपराध को अंजाम दे रहे थे। क्या इन सिम के जरिये गुरुग्राम पुलिस के भी किसी अधिकारी या पुलिस कर्मी से बात की गई है ? इन बरामद सिम कार्ड से भोंडसी जेल में बंद अपराधियों के तार अन्य राज्यों से भी जुड़े होने के संकेत का पता लगाया जा सकता है। यह बात साफ है कि अगर गुरुग्राम पुलिस ने जांच का दायरा सीमित रखा तो कोढ़ में खाज रूपी इस अनैतिक गठबंधन का जिसमें अपराधी, अधिकारी और अन्य लोगों के शामिल होने की आशंका प्रबल है का न तो खुलासा हो पायेगा और न ही इस घाव का मुकम्मल इलाज।

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