हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल का बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को दो टूक जवाब

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हरियाणा सरकार ने बिहार सरकार की और से भेजा गया यात्रा किराया तत्काल वापस किया 

मनोहर लाल ने कहा, यहां रहने वाला प्रत्येक प्रवासी हरियाणवीं से कम नहीं !

सुभाष चंद्र चौधरी

चंडीगढ़ । हरियाणा सरकार ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के उस प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया है जिसमें उन्होंने हरियाणा से बिहार जाने के लिए सभी प्रवासी श्रमिकों का खर्च बिहार सरकार की ओर से देने का प्रस्ताव भेजा था। मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने बिहार की मुख्यमंत्री के नाम लिखे पत्र में प्रत्येक बिहार वासी को हरियाणवी बताया है और उन्हें अपने प्रदेश के आर्थिक एवं व्यावसायिक उत्थान में बराबर का सहयोगी करार दिया है। उन्होंने बिहार सहित अन्य राज्यों के श्रमिकों को उनके गृह जिले में पहुंचाने का पूरा खर्च हरियाणा सरकार की ओर से वहन करने का ऐलान किया है। यह कहते हुए हरियाणा सरकार ने बिहार सरकार की ओर से इस मद की भेजी गई राशि को तत्काल वापस कर दिया है।

उल्लेखनीय है कि हरियाणा में अलग-अलग जिले में प्रवासी श्रमिकों एवं मजदूरों की बड़ी संख्या आजीविका के लिए बरसों से प्रभास करते रहे हैं। कोविड-19 संक्रमण की रोकथाम की दृष्टि से पिछले डेढ़ महीने से भी अधिक समय से जारी देशव्यापी लॉक डाउन के कारण हरियाणा में भी उद्योग धंधे एवं व्यवसाय पूरी तरह ठप पड़े थे। लाखों की संख्या में प्रवासी श्रमिक बेरोजगार हो गए और उन्हें आजीविका की चिंता सताने लगी। हरियाणा सरकार की ओर से सभी जिले में शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में प्रवासी श्रमिकों एवं मजदूरों के लिए राहत शिविर की व्यवस्था की गई और उन्हें भोजन तथा चिकित्सा सुविधा लगातार मुहैया कराई जा रही है।

अब केंद्र सरकार की ओर से जारी गाइडलाइन के आधार पर सभी प्रवासी श्रमिकों को उनके गृह जिले में जाने की अनुमति दी गई है । इस आधार पर हरियाणा सरकार ने भी अपने गृह जिले जाने के इच्छुक लोगों के पंजीकरण के लिए सभी जिले में नोडल अधिकारी नियुक्त किया और ऑनलाइन पंजीकरण की व्यवस्था कराई गई। प्रतिदिन ट्रेन और बस के माध्यम से अलग-अलग राज्यों एवं स्थानों के लिए प्रवासी श्रमिकों को पंजीकरण के क्रम के अनुसार भेजने की व्यवस्था भी शुरू की गई। यात्रा का खर्च देश में बड़ा मुद्दा बन गया और सत्ता पक्ष एवं विपक्ष के बीच रेल यात्रा खर्च को लेकर बयानबाजी शुरू हो गई।

कांग्रेस पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी ने भी इस विवाद में कूदते हुए प्रवासी श्रमिकों का सारा खर्च उठाने का ऐलान किया लेकिन केंद्र सरकार और संबंधित राज्य सरकारों ने अपनी व्यवस्था कि और प्रवासी श्रमिकों को निशुल्क ट्रेन एवं बस के माध्यम से उनके गृह जिले तक पहुंचाने का निर्णय लिया।

बताया जाता है कि बिहार सरकार ने पहले ही यह निर्णय लिया था कि श्रमिक स्वयं श्रमिक स्पेशल ट्रेन में यात्रा किराया का भुगतान कर बिहार पहुंचेंगे और उन्हें 14 दिन तक क्वॉरेंटाइन में रखने के बाद टिकट किराया के साथ न्यूनतम ₹500 अतिरिक्त कैश भुगतान कर उनके घर भेजा जाएगा। इस पर बिहार में भी विपक्षी दलों ने हाय तोबा मचाना शुरू किया कुल 2000 बस भेजने का दावा ठोकने लगा दो कोई रेल किराया देने की बात जोर शोर से उठाने लगा लेकिन खासकर हरियाणा से अपने गृह जिले जाने वाले सभी प्रवासी श्रमिकों एवं मजदूरों को हरियाणा सरकार ने स्वयं के खर्च पर भेजने का निर्णय लिया। हालांकि पूर्व में हरियाणा सरकार ने भी बिहार सरकार को प्रवासी श्रमिकों का रेल किराया संबंधित जोन के रेलवे के खाते में जमा कराने का पत्र लिखा था लेकिन बाद में राजनीतिक बवंडर खड़ा होने के बाद हरियाणा सरकार ने इस खर्च को स्वयं ही वहन करना शुरू कर दिया।

अब राजनीतिक कारण हो या फिर व्यवहारिक परेशानियों के कारण बिहार सरकार ने हरियाणा सरकार को पत्र लिखकर हरियाणा में फंसे बिहार के नागरिकों के बारे में चिंता व्यक्त की गई और हरियाणा से बिहार जाने वाले सभी लोगों के मध्य में अब तक हरियाणा सरकार द्वारा दी जा रही सुविधाओं की एवज में हुए खर्च का भुगतान करने का पत्र भेजा। लेकिन हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नाम लिखे पत्र में उनके इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया। मुख्यमंत्री हरियाणा ने अपने पत्र में कहा है कि प्रवासी नागरिकों के बारे में बिहार सरकार की चिंता उचित और प्रशंसनीय है लेकिन हरियाणा सरकार उन्हें आश्वस्त कराना चाहती है कि हरियाणा में रह रहे प्रत्येक भारतीय नागरिक उतने ही अपने हैं जितने उन राज्यों के जहां से वह आते हैं।

पत्र ने यह कहा गया है कि हरियाणा सरकार इस बात को समझती है कि हरियाणा की आर्थिक और औद्योगिक और कृषि क्षेत्र की उन्नति में प्रवासी श्रमिकों एवं मजदूरों का भी बहुत योगदान है। क्या है कि हरियाणा में आकर काम करने वाला हर नागरिक चाहे कहीं भी पैदा हुआ हूं पर आज वह हरियाणा कीजिए हरियाणवी से कम नहीं है। मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने नीतीश कुमार से कहा है कि हरियाणा सरकार ने सभी प्रवासी श्रमिकों एवं मजदूरों को अपनों की तरह रखा है और उनका पूरा ख्याल किया है उनकी सुविधा और असुविधा हरियाणा सरकार की जिम्मेदारी है और सरकार की ओर से उन्हें हर संभव मदद की जा रही है और आगे भी उन्हें मदद मुहैया कराने का आश्वासन दिया गया है।

पत्र में राष्ट्रीय एकता और अखंडता की संवैधानिक प्राण की रक्षा करने का हवाला देते हुए मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने इसके प्रति अपनी प्रतिबद्धता जताई है। पत्र में बिहार के मुख्यमंत्री को सूचित किया है कि हरियाणा में प्रतिदिन स्थिति सामान्य होने के साथ-साथ औद्योगिक एवं व्यावसायिक कामकाज पुनः शुरू हो रहे हैं और यहां की अर्थव्यवस्था वापस सामान्य स्थिति में आ रही है इसलिए जब कभी बिहार वासी अपने परिवार वालों से मिलकर वापस हरियाणा आना चाहें तो उनका यहां स्वागत है।

मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की ओर से प्रवासियों के मध्य में हुए खर्च का भुगतान करने का प्रस्ताव भेजने के लिए धन्यवाद ज्ञापित किया है और उनके इस प्रस्ताव को पूरी तरह अस्वीकार कर दिया है साथ ही उनकी ओर से भेजी गई राशि को भी वापस करने का निर्णय लिया है।

 

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