संसद का शीतकालीन सत्र हंगामेदार होने के आसार, 11 दिसम्बर से शुरू

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2019 के संसदीय चुनाव के मद्देनजर कांग्रेस सहित विपक्ष हमलावर तो भाजपा के भी होंगे तेवर तीखे

एक दूसरे पर छोड़ेंगे अगस्ता हेलीकॉप्टर और राफेल के तीर

सरकार के लिए दो दर्जन से अधिक विधेयक पारित कराने की चुनौती

सुभाष चौधरी

नई दिल्ली । पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव के लिए मतदान सम्पन्न होने के ठीक बाद ही संसद का शीतकालीन सत्र अगले सप्ताह शुरू होने जा रहा है। चुनाव के दौरान आरोप प्रत्यारोप के चले दौर और राफेल एवं अगस्ता हेलीकाप्टर खरीद में कथित भ्रष्टाचार, सीबीआई में संघर्ष जैसे कई मुद्दों की काली छाया के बीच यह सत्र हंगामेदार होने के प्रबल आसार हैं। एक तरफ सरकार के समक्ष तीन तलाक, उपभोक्ता संरक्षण, चिट फंड, डीएनए, गैर कानूनी गतिविधियां रोकथाम जैसे विधेयकों सहित करीब तीन दर्जन विधेयक पारित कराने की चुनौती तो दूसरी तरफ विपक्ष के गोलबंद होकर कई मामले में सरकार को घेरने की कोशिश की तकरार, कामकाज बुरी तरह प्रभावित हो सकते हैं । सरकार 20 नए विधेयक लाएगी जबकि शेष पहले ही संसद में विचारार्थ पेश किए गए हैं ।

विधानसभा चुनाव के प्रचार के दौरान जिस प्रकार की तल्खी भाजपा व कांग्रेस नेतृत्व के बीच देखने को मिली उससे सहज ही अंदाज लगाया जा सकता है कि शीत कालीन सत्र का तापमान चरम पर रहेगा। एक दूसरे पर कीचड़ उछालने की लगभग एक माह की चली राजनीतिक आंधी ने सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच लंबी खाई पैदा कर दी है। एक तरफ कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी देश के पीएम नरेंद्र मोदी को चौकीदार चोर है की संज्ञा से संबोधित करते रहे जबकि पीएम मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह नामदार की राजनीतिक समझ पर सवाल खड़ा करते रहे।चुनाव प्रचार के अंतिम दिन पीएम मोदी ने अगस्ता हेलीकॉप्टर खरीद में भ्रष्टाचार के मुद्दे को उछाल कर गांधी परिवार की कथित भूमिका का आरोप लगाया जबकि कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने इसके जवाब में पीएम को दामदार की उपमा देकर घेरने की कोशिश की। इस तू तू मैं मैं का क्रम इस संसद सत्र में भी जारी रहने की तीव्र आशंका है।

कांग्रेस सहित विपक्षी दलों के तरकस में राफेल मुद्दा, कृषि एवं किसानों की समस्या, सीबीआई में उच्च पदों पर बैठे अधिकारियों के बीच झगड़े, बैंक घोटाले और चुनाव में ईवीएम की संदेहास्पद भूमिका जैसे तीर हैं। इनके सहारे विपक्ष की ओर से सरकार पर तेज हमले होंगे क्योंकि आने वाला वर्ष 2019 संसदीय चुनाव के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है। जनता में अपनी छवि स्थापित करने के लिए जोरआजमाइश होगी।

राज्यसभा में कांग्रेस के सचेतक भुवनेश्वर कालिता ने यह कहते हुए संकेत दे दिया है कि ‘‘ हम संसद सत्र के दौरान राफेल समेत अन्य महत्वपूर्ण मुद्दे उठायेंगे और सरकार से जवाब मांगेंगे।’’

उन्होंने कहा कि संसद में उठाये जाने वाले विषयों की रूपरेखा पार्टी की बैठक में तय की जाएगी लेकिन किसानों के मुद्दे, सीबीआई में वर्तमान स्थिति, साम्प्रदायिक सौहार्द के समक्ष चुनौती जैसे विषय निश्चित तौर पर पार्टी उठाएगी ।

वहीं, संसदीय कार्य राज्य मंत्री विजय गोयल ने कहा है कि सरकार के लिये यह सत्र महत्वपूर्ण है। तीन अध्यादेश के संबंध में विधेयक पारित कराए जाने हैं। उन्होंने यह कहते हुए स्पष्ट किया कि ‘‘हम तीन तलाक संबंधी विधेयक पारित कराना चाहते हैं ।’’

उन्होंने कहा कि लोकसभा में पेश किये गए करीब 15 विधेयक और राज्यसभा में पेश 9 विधेयक पारित होने हैं । अन्य महत्वपूर्ण नये विधेयक भी पेश किये जाने हैं और पारित होने हैं ।

यह पूछे जाने पर कि, विपक्ष राफेल समेत कई मुद्दों पर सरकार को घेरने का प्रयास करेगा, गोयल ने कहा कि विपक्ष नियमों के तहत कोई भी मुद्दा उठा सकता है और सरकार इसके लिये तैयार है। सरकार का दामन और नीयत दोनों साफ हैं । ‘‘हम नियमों के तहत चर्चा कराने को तैयार हैं । ’’

दूसरी तरफ संसद का यह शीतकालीन सत्र ऐसे समय में शुरू हो रहा है जब पांच राज्यों … मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, तेलंगाना मिजोरम के विधानसभा चुनाव के नतीजे आने वाले हैं । जाहिर है मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान सत्तारूढ़ भाजपा और कांग्रेस दोनों के लिये बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि इसी परिणाम पर 2019 की कहानी का प्लॉट तैयार किया जाएगा। यह अंदाजा लगाना भी आसान है कि संसद सत्र पर इन चुनाव परिणाम का प्रभाव भी देखने को मिल सकता है ।

अगर भाजपा को कामयाबी मिली तो विपक्ष निराशा के माहौल में और असहयोगात्मक रुख अख्तियार कर सकता है लेकिन अगर परिणाम भाजपा के खिलाफ आया तो कांग्रेस स्वयं को मजबूत विकल्प के रूप में स्थापित करने की कोशिश में जी जान लगा देगी । ऐसे में सरकार के लिए संसदीय कामकाज करवाना टेढ़ी खीर होगी। यह कहना सही होगा कि मोदी सरकार के लिए दूध औऱ मछली दोनों ही प्रतिकूल साबित होंगे।

लोकसभा में पेश होने वाले नये विधेयक :

तीन तलाक संबंधी विधेयक, कंपनी संशोधन विधेयक, भारतीय चिकित्सा परिषद संशोधन विधेयक, भारतीय औषधि प्रणाली के लिये राष्ट्रीय आयोग संबंधी विधेयक, राष्ट्रीय होम्योपैथी आयोग विधेयक, राष्ट्रीय योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा आयोग विधेयक, राष्ट्रीय विमान संशोधन विधेयक, जलियांवाला बाग राष्ट्रीय स्मारक संशोधन विधेयक, सूचना प्रौद्योगिकी संशोधन विधेयक, राष्ट्रीय जांच एजेंसी संशोधन विधेयक, गैर कानूनी गतिविधि रोकथाम संशोधन विधेयक, बांध सुरक्षा विधेयक, एनसीईआरटी विधेयक आदि शामिल हैं ।

इसके अलावा सार्वजनिक परिसर अनधिकृत कब्जा हटाने संबंधी विधेयक, दंत चिकित्सक संशोधन विधेयक, उपभोक्ता संरक्षण विधेयक, नयी दिल्ली अंतरराष्ट्रीय पंचाट केंद्र विधेयक, भारतीय हवाई अड्डा आर्थिक नियामक प्राधिकार संशोधन विधेयक, किशोर वय :बाल देखरेख एवं संरक्षण: संशोधन विधेयक, डीएनए प्रौद्योगिकी :उपभोक्ता एवं व्यवहार: नियामक विधेयक, मानवाधिकार संरक्षण संशोधन विधेयक, ट्रांसजेंडर अधिकार संरक्षण विधेयक, किराये की कोख संबंधी नियामक विधेयक, चिटफंड संशोधन विधेयक, बिना नियमन की जमा योजना को प्रतिबंधित करने संबंधी विधेयक आदि शामिल है ।

लोकसभा अध्यक्ष व राज्यसभा सभापति ने बुलाई बैठक :

लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने 11 दिसंबर से शुरू हो रहे संसद के शीतकालीन सत्र के पहले दिन सर्वदलीय बैठक बुलाई है। राज्यसभा के सभापति एम वेंकैया नायडू ने एक दिन पहले 10 दिसंबर को सर्वदलीय बैठक बुलाई है। इन बैठकों का उद्देश्य सदन का कामकाज सुचारु रूप से चलाने के लिए सर्वसम्मति बनाना है।

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