कार्ति चिंदबरम को रिश्वत मामले में तीन दिन और सीबीआई हिरासत में रहना होगा

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नई दिल्ली :  पूर्व वित्त मंत्री पी चिदम्बरम के पुत्र कार्ति चिंदबरम को कथित रिश्वत मामले में तीन दिन और सीबीआई हिरासत में रहना होगा.  दूसरी तरफ उनको दिल्ली उच्च न्यायालय से प्रवर्तन निदेशालय द्वारा गिरफ्तारी से अंतरिम राहत मिल गई है। मीडिया की खबर के अबुसार विशेष अदालत ने शुक्रवार को आईएनएक्स मीडिया रिश्वत मामले में कार्ति चिंदबरम की सीबीआई हिरासत की अवधि तीन दिन और बढ़ा दी है। सीबीआई ने उन्हें 28 फरवरी को गिरफ्तार किया था और पूछताछ कर रही है . 

कार्ति पर आरोप है कि पी. चिदंबरम के वित्तमंत्री रहते हुए उन्होंने निजी कंपनियों से कथित तौर पर विदेशी निवेश की मंजूरी दिलाने के बदले रिश्वत ली। विशेष अदालत के न्यायाधीश सुनील राणा ने सीबीआई को उनसे 12 मार्च तक पूछताछ करने की अनुमति  दे दी। हालाकिं एजेंसी ने कार्ति चिदंबरम की हिरासत अवधि छह दिन और बढ़ाने की मांग की थी लेकिन अदालत ने तीन दिन ही बढ़ाई। 

सीबीआई ने अदालत में दावा किया है कि उसे कुछ ऐसे दस्तावेज मिले हैं जिनसे साबित हो सकता है कि कार्ति चिदंबरम ने विदेशी निवेश की मंजूरी दिलाने के बदले रिश्वत ली थी। अतिरिक्त महाधिवक्ता तुषार मेहता ने विशेष अदालत के समक्ष यह कहा कि सीबीआई ने कई दस्तावेज बरामद किए हैं जिनसे साबित हो सकता है कि वरिष्ठ कांग्रेस नेता के पुत्र का ‘एडवांटेज स्ट्रेटजिक’ कंपनी से सीधा संबंध है। 

मेहता ने अदालत से मांग की कि पूछताछ के लिए कार्ति को छह दिन और हिरासत में रखने की जरूरत है.

दूसरी तरफ बचाव पक्ष के वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने सीबीआई की दलील का जोरदार विरोध किया. उन्होंने बताया कि एजेंसी चेन्नई में कुंबक्कन रोड स्थित एडवांटेज स्ट्रेटजिक के पंजीकृत कार्यालय का पता ढूंढने में विफल रही। उन्होंने बताया कि सीबीआई एक साल से पंजीकृत कार्यालय का पता नहीं ढूंढ पाई। उनका तर्क था कि कोई व्यक्ति गूगल पर इसकी जानकारी ले सकता है। मुझे यह हैरान करने वाला व हास्यासप्रद प्रतीत होता है।”

बताया जाता है कि अतिरिक्त महाधिवक्ता मेहता ने सिंघवी की इस दलील का प्रतिरोध किया. उन्होंने कहा कि कुछ दस्तावेज चेन्नई कार्यालय से निकालकर अन्य स्थान पर भेज दिए गए हैं। उनके अनुसार सीबीआई ने सूचना के आधार पर सात और आठ मार्च को कई दस्तावेज बरामद किए हैं। सीबीआई ने आरोप लगाया है कि कार्ति ने जेल में बंद पीटर और इंद्राणी मुखर्जी के स्वामित्व वाले आईएनएक्स मीडिया को 305 करोड़ रुपये विदेशी निवेश की मंजूरी दिलाने के लिए रिश्वत ली थी।

 

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