स्वास्थ विभाग व जिला प्रशासन, मेवातियों के दिल से अफवाह का भूत नहीं निकाल सके !

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खास खबर 

: पंच, सरपंच और उलेमा रहे बेअसर

: जिला प्रशासन केवल मीटिगों तक ही सीमित रहा

: टीकाकरण 13 से मात्र 25 फीसदी तक ही हो सका

: अफवाह से पहले मेवात में टीकाकरण 45 फीसदी से अधिक था

यूनुस अलवी

मेवात:  लडकों को नपुंसक और लडकियों को बांझ बना देने कि करीब तीन माह पहले मेवात इलाके में फैली एक अफवाह ने मेवात के टीकाकरण को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। जिससे स्वास्थ्य विभाग को मिशन इंद्रधनुष कामयाब बनाना अधिकारियों की गले की फांस बन कर रह गई है। जो ना निगली जा रही है और ना ही उगली जा रही है। प्रदेश में जहां टीकाकरण की औस्त करीब 62 फीसदी है वही यह मेवात में मात्र 13 फीसदी पर अटक कर रह गई थी। इंद्रधनुष मिशन के चौथे दौर का दूसरा पार्ट मेवात में टीकाकरण 15 मई से 23 मई तक चला। प्रदेश के चीफ सैक्ट्री, स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारी, जिला प्रशासन, उलमा और राजनेता मिलकर टीकाकरण को मात्र 25 फीसदी तक तक ही पहुंचा सके जबकी मेवात में अफवाह से पहले टीकाकरण करीब 45 फीसदी था।
 
    मेवात में 2 फरवरी को अचानक अफवाह फैल गई थी कि भाजपा सरकार द्वारा केवल मुस्लिम बच्चों को टारेगेट करने कि नियत से लडकियों को बांझ और लडकों को नपुंसक बनाने के लिये जबरजस्ती टीके लगा रही हैं। उसके बाद मेवात जिला में ऐसी अफरातफरी फैली की अभिभावक अपने बच्चों को स्कूलों से जबरजस्ती ले गये। ऐग्जामों का समय होने के बावजूद भी स्कूल खाली हो गऐ। इसका असर सीधा इंद्रधनुष के टीकाकरण अभियान पर पडा। जिसकी वजह से टीकाकरण में मेवात का ग्राफ 45 फीसदी से गिरकर मात्र 13 फीसदी पर आ गया। जिसने प्रदेश सरकार और स्वास्थ्य विभाग को हिलाकर रख दिया। 
 

क्या कहते हैं सिविल सर्जन ? 

 
मेवात के सिविल सर्जन एसआर सिवाच का कहना है कि अफवाह से पहले मेवात का टीकाकरण 45 फीसदी से अधिक था। अफवाह की वजह से यह तीसरे चरण में मात्र 13 फीसदी पर अटक गया। इंद्रधनुष मिशन के चौथे दौर का दूसरा पार्ट मेवात में टीकाकरण 15 मई से 23 मई तक चला। जिसमें 26000 बच्चे और महिलाओं को टीका लगाने का लक्ष्य रखा गया था। सारी कोशिशें करने के बाद ही केवल 7700 को ही कवर कर सके। इस अभियान के तहत 0-2 वर्ष तक के बच्चों और गर्भवति महिलाओं को करीब 9 बिमारियों से बचाने के टीके लगाऐ जाते हैं।
 

इंद्रधनुष मिशन को कामयाब बनाने के लिये क्या-क्या नहीं किया : 

 
  मेवात में जब हालात बिगडते नजर आए तो स्वास्थ्य विभाग ने टीकाकरण के लक्ष्य को हांसिल करने के लिये मुस्लिम धर्म गुरूओं, पंच सरपंच, आंगनवाडी, आशावर्कर और समाजसेवियों का सहारा लेना शुरू कर दिया है। पिछले तीन महिने के दौरान स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारी मेवात का दौरा किया। हेल्थ विभाग हरियाणा के चीफ सैक्ट्री जनाब अमित झा को खुद आना पडा। वह अपने साथ हेल्थ विभाग के डारेक्टर जनरल, एनएचएम की एमडी मोहतरमां अमनीत पी कुमार, यूनिसेफ के आला अधिकारियों को भी लेकर मेवात पहुंचे। उन्होने कई धंटों तक इस्लामिक धर्म गुरूओं, गांव के पंच सरपंच, जिला पार्षदों आदि के साथ बेठक कर इंद्रधनुष मिशन में अपना सहयोग देने की अपील की। वहीं यूनिसेफ कि ओर से उत्तर प्रदेश-बिहार आदि मुस्लिम इलाकों की तैयार की गई वीडियो सीडी दिखाकर लोगों को समझाने का प्रयास किया। जमीयत उलमा हिंद के नोर्थ जोन (हरियाणा, पंजाव, हिमाचल प्रदेश और चंदीगढ) के सदर मोलाना याहया करीमी और उपाध्यक्ष मोलाना शेर मोहम्मद ने कुरान शरीफ और हदीसों का हवाला देकर लोगों को समझाने का प्रयास किया लेकिन सब फैल रहा।
 

इसलामिक कलेंडर भी काम नहीं आया

 
  टीकाकरण को कामयाब बनाने के लिये मिशन इंद्रधनुष के अधिकारी डाक्टर प्रदीप ने एक इसलामिक कलैंडर जारी किया है। जिसमें पूरे साल की जानकरी के साथ-साथ रमजान महिने के रखे जाने वाले रोजा के इफ्तियार-शहरी की समय शारिणी दीे गई है साथ ही मक्का और मदीना का फोटो भी दिया गया है। लेकिन विभाग का इंद्रधनुष अभियान परवान नहीं चढ सका। 
 

जिले के आला अधिकारी मीटिंगों तक ही सीमित रहे

 
जिला प्रशासन ने भले ही अधिकारी, उलमा, पंच-सरपंचों से मीटिंग कर और अभियान का उदघाटन करने में घूब दिलचश्पी दिखाई हो लेकिन जिले के स्वाथ्य विभाग को छोडकर प्रशासन के आला अधिकारियों ने गांव-गांव जाकर लोगों के दिलों ने इस अफवाह के बहम को निकालने में कम ही योगदान दिया। जिला प्रशासन के आला अधिकारी अगर मेवात के 443 गावों में से 150 गावों में जाकर लोगों को समझाने का प्रयास करते तो शायद लोगों के दिलों से इस अफवाह के बहम को निकाला जा सकता था।
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