पराली जलाने से होने वाला वायु प्रदूषण नियंत्रण के लिए रूपरेखा सीएक्यूएम निर्देश जारी

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नई दिल्ली : पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने वायु प्रदूषण की रोकथाम के लिए फसल अवशेष प्रबंधन को प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में से एक के रूप में पहचाना है। इस मामले में, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश (यूपी), राजस्थान की राज्य सरकारों, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीटी) दिल्ली सरकार, एनसीआर राज्यों के राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों और दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) एवं और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर), भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (आईएआरआई), भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) आदि जैसे विभिन्न ज्ञान संस्थान सदृश अन्य हितधारकों के साथ बैठकों की श्रृंखला में विचार-विमर्श किया गया। इन बैठकों के आधार पर, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और आसपास के क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) द्वारा पराली जलाने की प्रभावी रोकथाम और नियंत्रण के लिए एक रूपरेखा विकसित की गई है। यह जानकारी केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने आज लोकसभा में एक लिखित उत्तर में दी।

उन्होंने बताया कि पराली जलाने की प्रभावी रोकथाम और नियंत्रण के लिए रूपरेखा सीएक्यूएम निर्देश दिनांक 10.06.2021 के माध्यम से जारी की गई थी और वर्ष 2021, 2022 और 2023 से सीख के आधार पर, पंजाब, हरियाणा और यूपी (एनसीआर जिलों) के लिए कार्य योजनाओं को और अधिक संशोधित किया गया है तथा 2024 के दौरान आगामी धान की फसल के मौसम के लिए इसे अद्यतन किया गया जिसमें पराली के इन-सीटू और एक्स-सीटू प्रबंधन के लिए विभिन्न उपाय और सूचना, शिक्षा और संचार (आईईसी) गतिविधियों और प्रवर्तन तंत्र पर ध्यान केंद्रित करना शामिल है।

केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने 12.04.2024 को पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और दिल्ली के मुख्य सचिवों को “2024 में पराली जलाने की रोकथाम और नियंत्रण के लिए अद्यतन/संशोधित कार्य योजना के कार्यान्वयन और समीक्षा” के लिए वैधानिक निर्देश जारी किए हैं।

केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने कहा कि सीएक्यूएम के उपरोक्त निर्देश के अंतर्गत पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश की राज्य सरकारों को अन्य बातों के साथ-साथ 2024 के दौरान धान की पराली जलाने की पूर्ण समाप्ति सुनिश्चित करने के लिए निम्नलिखित पर ध्यान केंद्रित करते हुए संबंधित संशोधित कार्य योजनाओं को अक्षरश: प्रभावी ढंग से लागू करने की सलाह दी गई है:

i.राज्य के सभी खेतों/किसानों को कवर करने के लिए धान की पराली के प्रबंधन के पहचाने गए साधनों (सीआरएम मशीनरी, जैव अपचायक अनुप्रयोग  (बायोडीकंपोजर एप्लिकेशन) आदि के माध्यम से इन-सीटू प्रबंधन, ईंधन / फीडस्टॉक के रूप में एक्स-सीटू प्रबंधन) की पूरी मैपिंग।

ii.सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों (सीएचसी)/ कृषक उत्पादक संगठनों (एफपीओ)/फार्म बैंकों आदि में मशीनों की उपलब्धता और आवंटन की समीक्षा।

iii.सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों की संख्या में वृद्धि तथा उनके पास उचित संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करना।

iv.वर्ष 2024 के लिए व्यक्तियों/सीएचसी द्वारा सभी पहचानी गई नई सीआरएम मशीनों की खरीद जुलाई-अगस्त 2024 तक पहले से सुनिश्चित करना।

v.गरीब और सीमांत किसानों को ऐसी मशीनों की आपूर्ति पर ध्यान केंद्रित करते हुए, सीएचसी/एफपीओ/फार्म बैंकों आदि के पास उपलब्ध मशीनरी का अनुकूलन और उपयोग बढ़ाना।

vi.ग्राम/ब्लॉक स्तरीय टीमों/अधिकारियों द्वारा निगरानी के अलावा, सीएचसी/एफपीओ/फार्म बैंकों आदि में मशीनों के उपयोग के लिए आईटी/वेब आधारित निगरानी तंत्र स्थापित किया जाएगा।

vii.पराली जलाने के दुष्प्रभावों के बारे में जागरूकता पैदा करने के लिए आईईसी/संवेदनशीलता गतिविधियों को जारी रखना और बढ़ाना।

viii.सख्त निगरानी और प्रवर्तन कार्यों के लिए नोडल/क्लस्टर/ग्राम स्तर के अधिकारियों की समय पर नियुक्ति और प्रतिनियुक्ति।

ix.मानक इसरो प्रोटोकॉल के अनुसार उन खेतों/क्षेत्रों के पिन-पॉइंटिंग और निरीक्षण के लिए तंत्र जहां धान का पुआल जलाया जाता है, यदि कोई हो और ऐसे फार्म रिकॉर्ड में रेड-एंट्री/जवाबदेही सुनिश्चित करना, जिसमें निर्धारित ईसी की बहाली और वसूली शामिल है।

x.राज्य सरकार/जिला प्रशासन में विभिन्न स्तरों पर रूपरेखा/राज्य विशिष्ट कार्य योजना के कार्यान्वयन की लगातार समीक्षा करना और कड़ी निगरानी करना।

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार (जीएनसीटी) और राजस्थान राज्य सरकार को भी आगामी फसल सीजन के दौरान धान की पराली जलाने की घटनाओं को पूरी तरह से खत्म करने की दिशा में हर संभव प्रयास करने की सलाह दी गई है।

इसके अतिरिक्त, सीएक्यूएम द्वारा निर्देशित, इसरो ने फसल अवशेष जलाने की घटनाओं की रिकॉर्डिंग और निगरानी के लिए आईएआरआई सहित प्रमुख हितधारकों के परामर्श से 16.08.2021 को जारी एक मानक प्रोटोकॉल विकसित किया, जो आग की घटनाओं/गणनाओं के विविध मूल्यांकन से बचाएगा।

कृषि अवशेष जलाने की रोकथाम और नियंत्रण की दिशा में सीएक्यूएम द्वारा विकसित ढांचे में बायोमास/धान के भूसे की प्रभावी और निरंतर आपूर्ति एक महत्वपूर्ण घटक है। इस उद्देश्य से, “एक्स-सीटू” पराली प्रबंधन के लिए कुशल और मजबूत आपूर्ति श्रृंखला सुनिश्चित करने के लिए राज्यों को सलाह जारी की गई थी।

लगातार प्रयासों से, भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (आईएआरआई) बुलेटिन के अनुसार, 2023 के दौरान धान के अवशेष जलाने की घटनाओं में पंजाब में 27% और हरियाणा में 37% की कुल कमी देखी गई।

धान अवशेष जलाने की घटनाएँ (30 नवंबर, 2023 तक)

पंजाब हरियाणा कुल

(दिल्ली और राजस्थान के राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र वाले जिलों सहित)

2021 2022 2023 2021 2022 2023 2021 2022 2023
71304 49922 36663

(2022 पर -27% सहित )

6987 3661 2303

(2022 पर-37%)

78550 53792 39186

(2022 पर 27%)

धान के भूसे के फीडस्टॉक पर आधारित एक वाणिज्यिक दूसरी पीढ़ी (2जी) का इथेनॉल संयंत्र इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (आईओसीएल) द्वारा पानीपत (हरियाणा) में स्थापित किया गया है। यह संयंत्र 10 अगस्त 2022 को राष्ट्र को समर्पित किया गया है।

 

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