रोहतक की वैश्य शिक्षण संस्थाओं पर प्रशासक की नियुक्ति का प्रबल विरोध

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-अशोक बुवानीवाला ने प्रशासक की नियुक्त को लोकतांत्रित मर्यादाओं का हनन बताया

-अग्रवाल वैश्य समाज के प्रदेश अध्यक्ष ने इस नियुक्ति को तत्काल रद्द करने की मांग की

रोहतक। अग्रवाल वैश्य समाज के प्रदेश अध्यक्ष अशोक बुवानीवाला ने रोहतक की वैश्य शिक्षण संस्थाओं पर प्रशासक की नियुक्ति की निंदा की है। बुवानीवाला ने कहा कि सौ वर्षों से भी अधिक पुरानी तथा 25 हजार आजीवन सदस्यों के साथ शिक्षा के क्षेत्र में अग्रणी इन संस्थानों पर बिना किसी वजह से प्रशासक की नियुक्त लोकतांत्रित मर्यादाओं का हनन है। राजनीति से संबंधित किसी के व्यक्तिगत लाभ के लिए इतनी बड़ी संस्था पर इस तरह की नियुक्ति बिल्कुल भी बर्दास्त करने योग्य नहीं है।

बुवानीवाला ने कहा कि वैश्य शिक्षण संस्थाओं की नींव राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने अपने हाथों से रखी थी। हमारे पूर्वजों ने इस संस्थान को अपने खून -पसीने से सींचा है। अपने शताब्दी वर्ष में ये संस्थान लगभग 15 हजार छात्रों को शिक्षित कर रहे हैं. इसके अलावा 15 सौ शिक्षक एवं गैर शिक्षक कर्मचारी यहां कार्यरत है। न सिर्फ प्रदेश की बल्कि देशभर में ख्याति प्राप्त इतनी बड़ा संस्था का दायित्व अगर कोई बाहरी व्यक्ति संभाले तो ये बात किसी के भी हक में नहीं है।

उन्होंने कहा कि प्रशासक की नियुक्त से पूरे प्रदेश के वैश्य समाज के रोष बना हुआ है। इसलिए प्रदेश सरकार जल्द से जल्द प्रशासक की नियुक्ति रद्द कर चुनाव न होने तक किसी आईएएस अधिकारी की नियुक्ति करे या फिर जितना जल्दी हो सकें स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव करवाकर प्रबंधन का दायित्व वैश्य समाज के निर्वाचित प्रतिनिधियों को सौंपे।

 

वैश्य ससंथान के ही शिक्षित सदस्य को चुनाव न होने तक प्रशासक की जिम्मेदारी सौंपी जाएं : सुभाष तायल 

अग्रवाल वैश्य समाज के कार्यकारी अध्यक्ष सुभाष तायल ने भी किसी बाहरी व्यक्ति को प्रशासक नियुक्त करने की निंदा की है। श्री तायल ने कहा कि संस्थानों में आपसी मनमुटाव चलते रहते हैं लेकिन संस्थाओं के हितों में सब मिलकर काम करते हैं। इसलिए किसी बाहर के व्यक्ति की नियुक्ति संस्था के हित में नहीं है। सुभाष तायल ने कहा कि या तो शीघ्र अति शीघ्र चुनाव करवाए जाए या फिर वैश्य संस्थान के ही शिक्षित सदस्य को चुनाव न होने तक प्रशासक की जिम्मेदारी सौंपी जाएं।

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