बिन गांधी होगी कांग्रेस, तीन नाम आए सामने

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नई दिल्ली । आज़ादी के दौर के बाद सत्ता पर काबिज हुई कांग्रेस वर्तमान में अपनी रहनुमाई और दिन संवारने की उम्मीद में नेहरू-गांधी परिवार से इतर नजरें टिकाई बैठी है। कांग्रेस में गैर गांधी युग की शुरूआत का नया अध्याय लिखे जाने की चर्चाएं तेज हो गई हैं। अध्यक्ष पद पर बने रहने के नेताओं के अनुरोध को राहुल गांधी द्वारा अस्वीकार किए जाने के बाद आज पार्टी के नए अध्यक्ष के चयन को लेकर मंथन का दौरा चला। इस बीच, पार्टी संसदीय दल की नेता सोनिया गांधी और अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे चुके राहुल गांधी ने नया अध्यक्ष चुनने की प्रक्रिया से खुद को अलग कर लिया है।

नए अध्यक्ष को लेकर सुबह हुई सीडब्ल्यूसी बैठक के बाद नेताओं ने पांच अलग-अलग समूहों में मंथन किया। इन समूहों के परामर्श के आधार पर सीडब्ल्यूसी रात आठ बजे बैठक कर कोई फैसला करेगी। रात आठ बजे एक बार फिर सीडब्ल्यूसी की बैठक होगी जिसमें पार्टी के नए अध्यक्ष को लेकर कोई न कोई निर्णय होने की संभावना है।

सूत्रों के मुताबिक जो जानकारी सामने आ रही है उसके अनुसार पार्टी नेताओं से अध्यक्ष पद के लिए अब तक की रायशुमारी में तीन नाम सामने आए हैं। इन तीन नामों में राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और मुकुल वासनिक के नाम शामिल हैं। हालांकि, वासनिक का नाम बहुत कम लोगों ने लिया है, लेकिन राहुल और प्रियंका के अलावा सिर्फ उनका ही नाम लिया गया है। मुकुल वासनिक अध्यक्ष पद के दावेदारों में सबसे आगे हैं। मुकुल वासनिक सबसे लंबे समय तक लगातार कांग्रेस महासचिव रहे हैं। इसके अलावा मुकुल वासनिक राजीव गांधी फाउंडेशन के भी सदस्य रहे हैं, इससे साफ होता है कि वह गांधी परिवार के बेहद करीबी हैं। महाराष्ट्र के वरिष्ठ नेताओं में से एक मुकुल वासनिक के राजनीतिक जीवन की शुरुआत एनएसयूआई से हुई थी। उनके पिता बालकृष्ण वासनिक महाराष्ट्र के दिग्गज नेताओं में से एक थे। इस समय वह कांग्रेस महासचिव हैं और गांधी परिवार के काफ़ी क़रीबी समझे जाते हैं।

सीडब्ल्यूसी की पहले दौर की बैठक के बाद पार्टी के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि सीडब्ल्यूसी पांच अलग-अलग समूहों में परामर्श कर रही है। रात आठ बजे सीडब्ल्यूसी की फिर बैठक होगी जिसमें इन समूहों की बातचीत में निकले निष्कर्ष के आधार पर निर्णय लिया जाएगा। ऐसे में नेतृत्व संकट से जूझ रही देश की सबसे पुरानी पार्टी को कांग्रेस गांधी परिवार के खूटे से खुद को अलग कर पाने में सक्षम हो पाती है या नहीं और कौन कांग्रेस का खेवैया बनकर सामने आता है इसका पता कार्यसमिति की बैठक के बाद ही पता चलेगा।

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