अपार्टमेंट या फलैट की बिक्री कारपेट एरिया के आधार पर ही हो : डा. के के खण्डेलवाल

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गुरूग्राम, 27 अप्रैल। अपार्टमेंट या फलैट की बिक्री कारपेट एरिया के आधार पर ही हो, ना कि सुपर एरिया के आधार पर क्योंकि सुपर एरिया की कोई परिभाषा नहीं है और इसका हिसाब लगाना कठिन है। हर बिल्डर अपने हिसाब से सुपर एरिया की परिभाषा देता है, जोकि गलत है।


इस बारे में हरियाणा रीयल एस्टेट रेगुलेटरी अथोरिटरी (हरेरा) गुरूग्राम ने नियम जारी किए हैं। हरेरा गुरूग्राम के चेयरमैन डा. के के खण्डेलवाल ने आज गुरूग्राम के लोक निर्माण विश्रामगृह के कांफ्रेंस हाॅल में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में इस बारे में जानकारी दी . उन्होंने कहा कि 1 मई 2017 में रेरा एक्ट लागू हो गया था, उसके बाद जो भी रीयल एस्टेट का नया प्रोजेक्ट आया है उसमें अपार्टमेंट या फलैट की बिक्री केवल कारपेट एरिया के आधार पर ही होगी। जो रीयल एस्टेट के प्रोजेक्ट इस कानून के आने से पहले शुरू तो हो गए थे लेकिन पूरे नही हुए थे, उन पर भी यह नियम लागू होता है। डा. खण्डेलवाल ने यह भी कहा कि रीयल एस्टेट के ऐसे प्रोजेक्ट जिन पर कानून आने से पहले निर्माण शुरू हो गया था लेकिन आॅक्युपेशन सर्टिफिकेट नही लिया था और बिल्डर बायर एग्रीमेंट में सुपर एरिया के आधार पर फलैट या अपार्टमेंट बिक्री के लिए बिल्डर-बायर एग्रीमेंट किए गए, उन पर भी यह नियम लागू होता है।


संवाददाता सम्मेलन में डा. खण्डेलवाल ने कहा कि देश के सर्वोच्च न्यायालय तथा उच्च न्यायालयो ने अपने कई फैसलों में सुपर एरिया के आधार पर प्रोपर्टी की बिक्री को खरीददार के साथ धोखा करार देते हुए इस पर रोक लगाने की बात कही है। उन्होंने कहा कि सुपर एरिया के आधार पर फलैट अथवा अपार्टमेंट की बिक्री की गलत प्रथा वर्षो से चली आ रही थी। रेरा कानून आने के बाद खरीददारों के साथ इस प्रकार की धोखाधड़ी पर रोक लगाने का प्रयास किया गया है। उन्होंने कहा कि यह कानून के अनुसार प्रोपर्टी की बिक्री कारपेट एरिया के आधार पर होनी चाहिए और उसकी रजिस्टरी भी इसी अनुसार हो। उन्होंने कहा कि जिन बिल्डरों ने रेरा कानून आने से पहले ओसी अर्थात् आॅक्युपेशन सर्टिफिकेट नहीं लिया था और वे खरीददार के साथ सुपर एरिया के आधार पर बिल्डर बायर एग्रीमेंट कर चुके थे, उन्हें भी सुपर एरिया की विस्तृत जानकारी देनी होगी कि उसके अंदर कौन सा एरिया शामिल किया गया है। डा. खण्डेलवाल ने स्पष्ट किया कि बिल्डर जो रेट निर्धारित करता है उसमें सैस, जीएसटी आदि सबकुछ शामिल होता है। जहां तक सामुहिक सुविधाएं जैसे सामुदायिक केंद्र या बिजली सब स्टेशन आदि का निर्माण बिल्डर को करना होता है। इन सुविधाओं को सुपर एरिया में शामिल नहीं किया जा सकता। उन्होंने कारपेट एरिया के बारे में विस्तार से समझाते हुए कहा कि फलैट या अपार्टमेंट की बाहरी दिवारों के अंदर का क्षेत्रफल ही कारपेट एरिया में शामिल होता है। इसमें बरामदा, बालकनी, खुली छत और यहां तक कि शाफट भी नहीं आती।


उन्होंने कहा कि कारपेट एरिया के अलावा, अन्य आधार पर प्रोपर्टी की बिक्री का एग्रीमेंट बिल्डर या प्रमोटर द्वारा अनुचित टेªड पै्रक्टिस या धोखाधड़ी माना जाएगा जिसके लिए रेरा कानून के विभिन्न प्रावधानों के तहत कानूनी कार्यवाही की जाएगी। इस मौके पर हरेरा गुरूग्राम के सदस्य समीर कुमार भी उपस्थित थे।

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